BY: Yoganand Shrivastva
मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव करीला धाम में हुए एक हादसे में बाल-बाल बच गए। रंगपंचमी के अवसर पर आयोजित मेले में शामिल होने पहुंचे सीएम यादव मीडिया से बातचीत के दौरान अचानक सीढ़ियां टूटने से गिरने लगे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं की तत्परता के चलते उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना के बाद प्रशासन की लापरवाही पर भी सवाल उठने लगे हैं।
करीला धाम में हादसा, बड़ा अनहोनी टली
रंगपंचमी के मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव करीला मेले में पहुंचे थे, जहां भारी संख्या में उनके समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद थे। मीडिया से बातचीत के लिए जब वह एक छत पर बनी सीढ़ियों पर चढ़े, तभी अचानक सीढ़ियां कमजोर होने के कारण टूट गईं और सीएम यादव लड़खड़ा गए।
👉 गनीमत रही कि वह ज्यादा ऊंचाई पर नहीं थे।
👉 कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उन्हें संभाल लिया।
👉 समय रहते उन्हें नीचे उतार लिया गया, जिससे किसी गंभीर चोट की नौबत नहीं आई।
यह पूरी घटना कुछ ही सेकंड में घटित हो गई, लेकिन अगर थोड़ी भी देर होती, तो यह बड़ा हादसा हो सकता था।
सीएम की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सीएम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
🔹 क्या सुरक्षा अधिकारियों ने मंच और सीढ़ियों की मजबूती की जांच नहीं की थी?
🔹 क्या इस मेले में इतनी भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा उपाय पर्याप्त थे?
🔹 कैसे मुख्यमंत्री के चढ़ने से पहले ही मंच की स्थिति नहीं परखी गई?
इस पूरे घटनाक्रम पर अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि सीढ़ियां कैसे टूटीं और क्या यह सुरक्षा में बड़ी चूक थी?
घटना के बाद सीएम रवाना
हादसे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वहां ज्यादा समय नहीं बिताया और इंदौर के लिए रवाना हो गए। हालांकि, उन्होंने इस घटना को लेकर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन समर्थकों और प्रशासन में हलचल जरूर देखी गई।
यह घटना एक बार फिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को चेतावनी देती है कि वीआईपी सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। करीला धाम में इस हादसे से जुड़े सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच के बाद सामने आएंगे।
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