BY
Yoganand Shrivastava
Maha Shivaratri हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि की रात को केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ऊर्जा का महापर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और खगोलीय दृष्टि से इस रात ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह अत्यंत तीव्र होता है। यही कारण है कि इस रात जागरण और साधना को आध्यात्मिक व शारीरिक उन्नति के लिए अनिवार्य बताया गया है।
शिवरात्रि की रात जागरण का महत्व और वैज्ञानिक आधार
Maha Shivaratri मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध इस प्रकार स्थित होता है कि मनुष्य के भीतर की ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर (रीढ़ की हड्डी के माध्यम से) बढ़ती है। इस ऊर्जा का लाभ लेने के लिए रीढ़ की हड्डी का सीधा होना आवश्यक है, इसीलिए पूरी रात जागकर ध्यान करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, इस रात किया गया जप-तप अन्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावी और फलदायी होता है।
चार प्रहर की पूजा: शिव अभिषेक की विधि और मंत्र
Maha Shivaratri महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में बांटा गया है। हर प्रहर में भगवान शिव का अलग-अलग द्रव्यों से अभिषेक करने का विशेष महत्व है:
- प्रथम प्रहर: दूध से स्नान कराएं। मंत्र: ‘ह्रीं ईशानाय नमः’
- द्वितीय प्रहर: दही से स्नान कराएं। मंत्र: ‘ह्रीं अघोराय नमः’
- तृतीय प्रहर: घी से स्नान कराएं। मंत्र: ‘ह्रीं वामदेवाय नमः’
- चतुर्थ प्रहर: शहद से स्नान कराएं। मंत्र: ‘ह्रीं सद्योजाताय नमः’
Maha Shivaratri इसके साथ ही शिव चालीसा, स्तोत्र पाठ और पके हुए चावल, घी व तिल के साथ हवन करने से शिव कृपा प्राप्त होती है।
पूरी रात जागना संभव न हो, तो अपनाएं यह विकल्प
Maha Shivaratri व्यस्तता या स्वास्थ्य कारणों से यदि कोई श्रद्धालु पूरी रात जागने में असमर्थ है, तो शास्त्रों में इसका भी समाधान बताया गया है। ऐसी स्थिति में ‘निशिता काल’ के दौरान जागना और पूजा करना पूरे जागरण का फल दे सकता है।
- निशिता काल मुहूर्त: 2026 में यह समय रात 12:09 से 01:01 बजे तक रहेगा।
- क्या करें: इस विशेष काल में शिवलिंग का अभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें। यह समय भगवान शिव के प्रकट होने का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस 52 मिनट की साधना का अत्यंत महत्व है।





