kanshiram-bharat-ratna: उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोट बैंक को लेकर सियासी घमासान बना ही रहता है। बहुजन आंदोलन के जनक माने जाने वाले कांशीराम की विरासत को लेकर अब विभिन्न दलों के बीच बयानबाज़ी और राजनीतिक दावे तेज़ हो गए हैं। दरअसल, दलित राजनीति की धुरी माने जाने वाले बहुजन समाज पार्टी और उसकी नेता मायावती लंबे समय से कांशीराम की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करती रही हैं। लेकिन अब अन्य दल भी दलित समाज को साधने के लिए उसी विरासत का हवाला दे रहे हैं। कांशीराम ने दलित, पिछड़े और वंचित वर्ग को राजनीतिक रूप से संगठित कर एक मजबूत बहुजन आंदोलन खड़ा किया था।

kanshiram-bharat-ratna: कांशीराम की विरासत, दलितों पर सियासत
उनके इसी आंदोलन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया सामाजिक समीकरण तैयार किया, जिसका असर आज भी दिखाई देता है।आज कांशीराम की 92वीं जयंती पर पार्टी अध्यक्ष मायावती ने श्रद्धांजलि दी साथ ही विरोधियों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस की तरह समाजवादी पार्टी भी बहुजन समाज की हितकारी नहीं है। इन दलों से बहुजन समाज के हित व कल्याण की आशा करना रेगिस्तान में पानी तलाशने जैसा है।
इन पार्टियों के छलावा व दिखावा से सावधान रहना जरूरी है। उन्होंने आह्वान किया कि बहुजन समाज के लोग बसपा मूवमेंट से जुड़कर मिशनरी अंबेडकरवादी बनें। अपने वोटों की शक्ति से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करें। मायावती ने कहा कि बसपा ही डॉ. अंबेडकर के नक्शे कदम पर चलने वाली ’असली पार्टी’ है। सपा व अन्य विरोधी दलों की कथनी व करनी में बड़ा अंतर है।
kanshiram-bharat-ratna: कांशीराम की विरासत, दलितों पर सियासत
सांसदी और विधायकी आदि का प्रलोभन देकर बहुजन समाज के वोट की शक्ति को कमजोर करने वाले इन दलों के साथ निजी लाभ व स्वार्थ के लिए पार्टी व मूवमेंट से दगा करने वालों से भी दूरी रखनी जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तरह वर्तमान भाजपा सरकार भी कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करने में और देरी ना करे। बीएसपी के यूपी प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने कहा कि सभी दलित, ओबीसी व अन्य वर्ग के लोग बीएसपी के साथ हैं। सपा का पीडीए का मतलब परिवार एलायंस दल है।
कांग्रेस ने अपनी सरकार में कांशीराम को अपमान करने का काम किया। कांग्रेस चाहती तो कांशीराम को प्रधानमंत्री बनाती। उधर मायावती और BSP नेताओं के हमलों पर विरोधियों ने भी जमकर पलटवार किया। अब सवाल यह है कि कांशीराम की इस विरासत का असली वारिस कौन है और दलित समाज किस दल के साथ खड़ा होगा। आने वाले चुनावों में यही मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।।।।
kanshiram-bharat-ratna: यूपी में सीटों की संख्या और स्थिति
- • उत्तरप्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें
- • भाजपा के पास 255 सीटें, सपा 111, 37 अन्य
- • उत्तरप्रदेश में दलित वोटर्स 20 से 21 प्रतिशत
- • ओबीसी वोट बैंक करीब 40 से 50 प्रतिशत
- • सवर्ण वोटर्स की संख्या करीब 18 से 20 प्रतिशत
- • यूपी में ब्राह्मण वोटर्स की संख्या 9-12 फीसदी
- • मुस्लिम वोटर्स की संख्या भी 19 से 20 प्रतिशत
- • अनुसूचित जनजाति करीब 1 प्रतिशत के आसपास
kanshiram-bharat-ratna: मायावती का बयान
- • मायावती के निशाने पर सपा, भाजपा, कांग्रेस
- • दलित वोटों की शक्ति, सत्ता की मास्टर चाबी
- • सपा का पीडीए प्रेम जनता के साथ छलावा
- • विरोधी पार्टियों की कथनी-करनी में बहुत अंतर
- • कांशीराम को भारत रत्न देने में देरी न करे सरकार
- • दलित वोटों की शक्ति, सत्ता की मास्टर चाबी
- • विरोधी पार्टियों के छलावा व दिखावे से सावधान रहें
- • कांग्रेस चाहती तो कांशीराम को प्रधानमंत्री बनाती
- • कांग्रेस ने अपनी सरकार में कांशीराम को अपमान किया
- • बसपा ही डॉ. अंबेडकर के नक्शे कदम पर चलने वाली ’असली पार्टी’

