Jal Ganga Abhiyan : सदानीरा समागम, जल स्रोतों का संरक्षण-पुनर्जीवन,दुनिया के 6 देश अपनाएंगे जल गंगा संरक्षण मॉडल
Jal Ganga Abhiyan : जल संरक्षण और जल आत्मनिर्भरता की दिशा में मध्यप्रदेश का ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है। जनभागीदारी पर आधारित यह अभियान नदियों, तालाबों, कुओं और बावड़ियों के संरक्षण तथा पुनर्जीवन का सफल मॉडल बनकर उभरा है, जिसकी सराहना राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी होने लगी है। दरअसल भोपाल में आयोजित सदानीरा समागम में छह देशों के राजनयिकों ने प्रदेश के जल संरक्षण मॉडल की सराहना करते हुए इसे अपने देशों में लागू करने में रुचि दिखाई है। भारत भवन में आयोजित कार्यक्रम में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो व इक्वाडोर के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। उन्होंने जल संरक्षण को वैश्विक चुनौती बताते हुए मध्यप्रदेश में जनभागीदारी के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों को अनुकरणीय बताया।
Jal Ganga Abhiyan : कार्यक्रम में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों ने माना कि जल संरक्षण में जनभागीदारी आधारित मध्यप्रदेश का मॉडल अन्य देशों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।आपको बता दें कि प्रदेश सरकार के अनुसार जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत अब तक 2.12 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण या पुनर्जीवन किया जा चुका है। सरकार ने इस संख्या को 3.66 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना रहा। अभियान के तहत प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन, तालाबों के गहरीकरण, चेकडैम निर्माण और वृक्षारोपण जैसे व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। इन प्रयासों ने जल संचयन क्षमता बढ़ाने, भूजल स्तर सुधारने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
Jal Ganga Abhiyan : अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जनभागीदारी है। गांवों से लेकर शहरों तक समाज के विभिन्न वर्ग जल संरक्षण गतिविधियों से जुड़ रहे हैं। यही कारण है कि मध्यप्रदेश का यह मॉडल जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूलन के क्षेत्र में एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट से जूझ रही दुनिया के लिए मध्यप्रदेश का यह प्रयास सामुदायिक सहभागिता आधारित जल प्रबंधन का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करता है। यही वजह है कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है और इसे जल संरक्षण के सफल प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है।
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