Indore Metro Tree Controversy: पुराने पेड़ों और हजारों तोतों के आशियाने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
मध्य प्रदेश के इंदौर में मेट्रो स्टेशन के निर्माण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। रानी सराय और रीगल चौराहे के आसपास मौजूद 50 से 60 साल पुराने पेड़ों को बचाने के लिए दायर याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई पूरी हो गई है। कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इन पुराने पेड़ों पर हजारों तोतों और अन्य पक्षियों का बसेरा बताया जा रहा है। ऐसे में मेट्रो परियोजना के निर्माण और पक्षियों के प्राकृतिक आवास को बचाने के बीच संतुलन बनाने का मुद्दा अहम हो गया है।
Indore Metro Tree Controversy: मेट्रो स्टेशन की जगह बदलने के तीन विकल्प पेश
मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने हाईकोर्ट के सामने स्टेशन की जगह बदलने के तीन संभावित विकल्पों का विवरण रखा है। हालांकि, प्रबंधन के मुताबिक, इन विकल्पों को लागू करने में जमीन अधिग्रहण, निर्माण संबंधी चुनौतियां और अतिरिक्त खर्च जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। मेट्रो प्रबंधन का अनुमान है कि वैकल्पिक स्थानों पर स्टेशन बनाने से परियोजना की लागत करीब 400 करोड़ रुपये बढ़ सकती है और निर्माण कार्य में तीन से चार साल की देरी हो सकती है।
Indore Metro Tree Controversy: रीगल टॉकीज क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की चुनौती
मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के मुताबिक, पहला विकल्प रीगल टॉकीज क्षेत्र में स्टेशन बनाने का है। इसके लिए मिल्की-वे परिसर के साथ लगभग पांच हजार वर्गमीटर निजी जमीन का अधिग्रहण करना पड़ सकता है। इस विकल्प से आसपास स्थित होटल, सरकारी आवास और जजों के बंगलों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
प्रबंधन का कहना है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में करीब दो साल लग सकते हैं। इसके अलावा, स्टेशन की जगह बदलने से परियोजना की लागत में लगभग 400 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसी आधार पर मेट्रो प्रबंधन ने वैकल्पिक स्थान से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों को सामने रखा है।
Indore Metro Tree Controversy: प्रीतमलाल दुआ सभागृह क्षेत्र में भी कई बाधाएं
दूसरे विकल्प के तौर पर प्रीतमलाल दुआ सभागृह क्षेत्र में स्टेशन बनाने पर विचार किया गया है। हालांकि, मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, इस स्थान पर निर्माण होने से सभागृह, महावीर स्तंभ, सिंगापुर मार्केट और अहिल्या पुस्तकालय जैसे महत्वपूर्ण स्थान प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, हाईकोर्ट के बगीचे और मुख्य प्रवेश द्वारों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
इस विकल्प में आसपास के महत्वपूर्ण स्थलों और सार्वजनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण की व्यवहार्यता का सवाल खड़ा होता है। ऐसे में स्टेशन की जगह बदलने का निर्णय केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की संरचना और मौजूदा सुविधाओं से भी जुड़ा हुआ है।
Indore Metro Tree Controversy: गांधी हॉल में स्टेशन बनाने के विकल्प पर भी चुनौती
मेट्रो स्टेशन के लिए तीसरे विकल्प के रूप में गांधी हॉल परिसर पर विचार किया गया। लेकिन मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि राजवाड़ा स्टेशन के निर्माण के चलते रूट में बदलाव करना संभव नहीं है। गांधी हॉल ऐतिहासिक महत्व की धरोहर है, इसलिए यहां निर्माण से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
इस तरह मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने तीनों विकल्पों से जुड़ी तकनीकी, आर्थिक और संरचनात्मक समस्याओं को अदालत के सामने रखा है। अब इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Indore Metro Tree Controversy: पद्मश्री भालू मोंढे ने अतिरिक्त खर्च के तर्क पर उठाए सवाल
इस मामले में याचिकाकर्ता पद्मश्री भालू मोंढे ने मेट्रो प्रबंधन के जवाब पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि करीब 400 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च का हवाला देकर पुराने पेड़ों को बचाने की संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इन पेड़ों पर हजारों पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, जिसे नष्ट करने के बाद केवल नए पौधे लगाकर पहले जैसी व्यवस्था तैयार नहीं की जा सकती।
मोंढे ने पक्षियों के प्राकृतिक आवास को बचाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय प्रभाव को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
बाइट: पद्मश्री भालू मोंढे, याचिकाकर्ता
Indore Metro Tree Controversy: पुराने पेड़ों की जगह नए पौधे नहीं ले सकते
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट अभिनव पी. धनोधकर ने भी परिपक्व पेड़ों के संरक्षण का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि पुराने पेड़ों के खोखले तनों में पक्षियों को आश्रय मिलता है। दशकों में विकसित हुई इस प्राकृतिक व्यवस्था की भरपाई नए पौधे लगाकर तुरंत नहीं की जा सकती।
उन्होंने मेट्रो परियोजना की लागत और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, विकास कार्यों की योजना बनाते समय पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
बाइट: एडवोकेट अभिनव पी. धनोधकर
Indore Metro Tree Controversy: रीगल चौराहे पर ट्रैफिक और कनेक्टिविटी का सवाल
मेट्रो स्टेशन की जगह बदलने के विकल्पों पर यातायात के नजरिए से भी विचार किया जा रहा है। इंदौर के ट्रैफिक विशेषज्ञ इंजीनियर अतुल सेठ के मुताबिक, रीगल चौराहा शहर का एक प्रमुख यातायात केंद्र है। ऐसे में स्टेशन के स्थान में बदलाव से ट्रैफिक प्रबंधन और कनेक्टिविटी से जुड़ी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
उन्होंने मेट्रो प्रबंधन, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के बीच समन्वय के साथ व्यावहारिक इंजीनियरिंग योजना तैयार करने की जरूरत बताई है, ताकि यातायात व्यवस्था और मेट्रो परियोजना दोनों प्रभावित न हों।
Indore Metro Tree Controversy: हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
इंदौर में मेट्रो स्टेशन की जगह और पुराने पेड़ों को बचाने का मामला अब हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर है। एक ओर मेट्रो परियोजना की लागत, निर्माण की समयसीमा और यातायात से जुड़ी जरूरतें हैं, तो दूसरी ओर दशकों पुराने पेड़ों और उन पर बसे हजारों पक्षियों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण है।
मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने वैकल्पिक स्थानों से जुड़ी चुनौतियां सामने रखी हैं, जबकि याचिकाकर्ताओं ने पुराने पेड़ों को बचाने की जरूरत पर जोर दिया है। अब देखना होगा कि हाईकोर्ट अपने फैसले में विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इन पहलुओं पर किस तरह विचार करता है।
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