Hasya Hathauda : भैया, महंगाई डायन खाय जात है, अब सिर्फ गाने में नहीं, आम आदमी की थाली में बैठ गई है। हर महीने तनखा वही पुरानी, नौ हज़ार आती है और महंगाई डायन पूछती भी नहीं, सीधे खा जाती है।
आम आदमी की हालत ऐसी होती जा रही कि अब पेट खाने से कम और कल्पना से ज्यादा भरता है। आम आदमी सुबह नून, दोपहर तेल, शाम को आटा-दाल, और रात में मटन, मछली, चिकन सिर्फ सोच लेता है, क्योंकि सोचने पर अब तक जीएसटी नहीं लगा है।
Hasya Hathauda : अब धन्नाराम का दर्द सुन लीजिए, बीबी बोली, सब्ज़ी ले आओ सनम। वो बोले, जरा साढ़े दस बज जाने दो जानम, क्योंकि तब तक हाट-बाजार उठने लगता है, सब्जी ढेर में बिकने लगती है, और टमाटर खुद शर्म से लाल नहीं, पिलपिला हो जाता है। सब्जी के साथ फ्री में धनिया मिर्च भी मिल जाता है, धन्नाराम मन ही मन बुदबदाया, 200 रुपये में हफ्तेभर की सब्ज़ी लाना ऐसा हो गया है, जैसे यूपीएससी बिना कोचिंग निकालना।
महंगाई डायन अब भस्मासुर बन गई है जिसे छू ले, वही भस्म। आम आदमी बन गया घनचक्कर, बेटी की शादी का बोझ सिर पर। महंगाई भोजन पानी ही नहीं अब सोना-चांदी की खदानें भी निगल रही, शेयर बाजार धड़ाम-धुड़ हो रहा, जिसे देखो वो रो रहा, ट्रंपवा दुनिया को आए दिन डरा रहा, तेल-तेल चिला रहा, ईरान भी हैरान परेशान, महंगाई सातवें आसमान, भारत ही नहीं, महंगाई के रडार पर पूरी दुनिया जहान।

फिर भी धन्नाराम सोच रहा है, बेटी की शादी हो जाए तो गंगा नहा लूं, लेकिन सोना अब सोच से भी बाहर, घर में रखे दहेज के गद्दा तकिया, मसेरी सोफा हो ना जाए बेकार, पंडित जी कह रहे, दान बढ़ाइए, हलवाई बोलता है, रेट बढ़ गए, लड़के वाले भेजते हैं, डिमांड ऑर्डर 5 तोला सोना और बोनस में ईवी कार होना। धन्नाराम ने व्हाट्सऐप मैसेज पढ़ा, आंखें और मुंह दोनों रह गया फटा का फटा। बेटी ने पढ़ लिया मैसेज, मां से बोली ऐसे लोभियों के घर नहीं जाना, पिताजी से कह दो, अब ब्याह नहीं रचाना। बेटी महंगाई से बढ़ा बोझ नहीं।
Hasya Hathauda : अब तो महंगाई ने डाइट प्लान भी दे दिया, कम खाओ, ज्यादा सोचो। डॉक्टर बोलते हैं, शुगर मत खाओ। सरकार बोलती है, धैर्य रखो और जेब बोलती है, खामोश रहो। अब आदमी होटल के मेन्यू को कविता की तरह पढ़ता है, ऑर्डर नहीं करता। मॉल में घूमता है, कपड़े और सामान पर लगी चिट ढूंढता है, सेल के ढेर में खोजता है, फ्री वाला परफ्यूम सूंघता है, फिर भी खरीदता कुछ नहीं, ऑनलाइन सामान सर्च कर लेता है, कार्ट भी भर लेता है फिर खाली कर देता है। क्योंकि दिमागी सीपीयू में बाइ डिफाल्ट ऑनलाइन महंगाई का डाइट प्लान सेव फॉर फ्यूचर है !

Hasya Hathauda : भैया, महंगाई डायन ने क्रांतिकारी नहीं, गणनाकारी बना दिया, हर निवाले के साथ आधी सांस का हिसाब, हर ख्वाब से पहले कैलकुलेटर। महंगाई माई बेलगाम, सारी सरकारें और सिस्टम नाकाम, अब बस यही प्रार्थना है, महंगाई डायन थोड़ी डाइटिंग कर ले, वरना जिस रफ्तार से खा रही है, कल को आम आदमी नहीं, सिर्फ बिल बचेंगे। क्योंकि तिल-तिल मर रहे, रोज आधा पेट खाने के साथ कल्पना से भर रहे, डायन माई महंगाई को कैसे भी तो मनाओ, आरती की थाली सजाओ और गाओ, जय महंगाई डायन माई, मैया.. जय महंगाई डायन माई, निस दिन तुम को पूजत, कम कर लो डाइट, जय डायन माई….

