गणतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत शुभकामनाएं।
Hasya Hathauda : भैयाजी, हम 77वां गणतंत्र मना रहे, देश भक्ति तो हमारे खून में है, जब भी कोई भारत को आंख दिखाता है, हमारा खून खौल उठता है, भारत के हर घर का नारा है, हिंदू-मुस्लिम, सिख-ईसाई आपस में सब भाई-भाई। हमारा देश विविधताओं से भरा है, फिर भी हरा भरा है, धर्म की लंबी फेहरिस्त है, बौद्ध, जैन, पारसी, यहूदी, बहाई और जनजातीय धर्मों के असंख्य अनुयायी।
भारत में कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर बानी। फिर भी एक भारत श्रेष्ठ भारत, जान लो दुनिया के अज्ञानी। देश प्रेम ही नहीं हमारे खून में वसुधैव कुटुंबकम’। पूरी दुनिया एक परिवार है। भारत की हजारों वर्षों से चली आ रही सनातन परंपरा प्रमाण है, हर मंदिर में गूंजे विश्व का कल्याण हो, विश्व शांति के गूंजते हैं जयकारे, सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्, यानि सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।

Hasya Hathauda : सनातन विशाल है, सनातन निरंतर है, सनातन में सांस्कृतिक समावेश है, भारत में कितने आक्रांता आए, फारसी-सायरस, यूनानी-सिकंदर, शक, कुशाण, हूण, अरब-मोहम्मद बिन कासिम, तुर्क-गजनवी, गोरी, मंगोल-चंगेज, तैमूर, अहमद अब्दाली, पुर्तगाली, डच और अंग्रेज। समय के साथ सब मिट गए नहीं बचा कोई शेष। भारत माता ने सही 1200 वर्षों की गुलामी। फिर भी मिट्टी और संस्कृति को कोई नहीं पहुंचा पाया हानि। प्रसिद्ध शायर अल्लामा इक़बाल का एक शेर है। कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी। सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा। सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा। हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा।
Hasya Hathauda : गणतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत शुभकामनाएं।

