Hasya Hathauda : भैया, आजकल पाखंड कोई साधारण चीज़ नहीं रही। अब ये अकेला नहीं चलता, इसके साथ पूरा कुनबा रहता है। ढोंग इसका बड़ा भाई, आडंबर मँझला, दिखावा फुफेरा, प्रपंच मौसेरा, कपट पड़ोसी, धोखाधड़ी रिश्तेदार, नकली और बेईमानी तो घर के ही बच्चे हैं, और ढकोसला? वो तो कुल का कुलगुरु है।
Hasya Hathauda : अब एक दिन की बात सुनो भैयो। हम बाजार जा रहे थे, सामान लेने नहीं, दाम देखकर वापस आने। वहीं अचानक पाखंड टकरा गयो। बोला, “भैया, ऑडी ले लो।” हम बोले, “कितनी की? पाखंड ने दांत दिखाए, मत पूछो, सुन नहीं पाओगे। जितनी तुम सोचो, उससे भी ज़्यादा की है।
हमने सोचा, सोचते-सोचते माथा गर्म हो गयो, “बीस लाख?”

Hasya Hathauda : पाखंड बोला, “अरे दादा, ऑडी तुम्हारी सोच से भी ऊपर है। इतने में आडंबर आ धमका। सीना बाहर, पेट अंदर, जैसे खुद ही शो-रूम हो। बोला, “ऑडी? अरे छोड़ो यार, मेरी गाड़ी देखो, लंदन से मंगाई है। हमने पूछा, कागज़? बोला, कागज़ छोड़ो, फीलिंग देखो।
Hasya Hathauda : भैया, आजकल देश फीलिंग से ही चलता है। दस्तावेज़ पुराने जमाने की बीमारी है। फिर प्रपंच आया। बोला, मैं तो बड़ा सीधा आदमी हूं। और उसी वक़्त तीन लोगों का सीधा-सादा हक, टेढ़ा करके जेब में डाल रहा था। कपट बोला, मैं ईमानदार हूं। धोखाधड़ी ने कहा मैं परिस्थितियों का शिकार हूं। नकली चिल्लाया, मैं असली हूं। बेईमानी बोली, मैं सिस्टम की मजबूरी हूं और ढकोसला ? वो मंच पर चढ़ा, माइक पकड़ा, और बोला, मैं संस्कार हूं, मैं संस्कृति हूं, मेरे बिना समाज अधूरा है।
Hasya Hathauda : भैया, आजकल पाखंड, फेसबुक पर लाइव आता है, इंस्टाग्राम पर ज्ञान देता है और व्हाट्सऐप पर सच को अफवाह बता देता है। जो चुपचाप सही काम करे, उसे कोई नहीं जानता और जो ढोल पीट-पीटकर गलत को सही बताए, वो ब्रांड एंबेसडर बन जाता है। सच बेचारा, कोने में बैठा है, नंगे पाँव, सर झुकाए। और पाखंड, रेशमी कपड़े पहनकर, तालियाँ बटोर रहा है। तो भैया, अगर सच का मुँह काला है, तो इसमें हैरानी कैसी? जब पाखंड का बोलवाला हो, तो उजाला भी मेकअप मांगता है।

