Hasya Hathauda 10 : भैया, हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहां क्रांति अब सड़कों पर नहीं, रील्स में होती है। पहले लोग आंदोलन के लिए घर से निकलते थे, अब मोबाइल निकालते हैं। पहले नारे लगते थे, अब कैप्शन लगते हैं और सबसे बड़ी बात क्रांति अब इतनी आसान हो गई है, कि उसे चाय खत्म होने से पहले निपटाया जा सकता है।
सुबह-सुबह आंख खुलते ही कोई न कोई रील बताती है कि देश बर्बाद हो चुका है। दूसरी रील बताती है कि देश बच चुका है। तीसरी रील समझाती है कि असल में देश है ही नहीं, सब मैनेजमेंट है। आम आदमी बिस्तर पर बैठे-बैठे तीनों क्रांतियों में हिस्सा ले लेता है। बस अंगुली ऊपर-नीचे करनी पड़ती है।
रील बनाने वाला युवा गुस्से में होता है। आंखें लाल, आवाज भारी और बैकग्राउंड में देशभक्ति वाला म्यूज़िक। वह बताता है कि अब बहुत हो गया, जनता जाग चुकी है और सिस्टम हिलने वाला है। वीडियो खत्म होते ही वह फोन रखता है और पूछता है।

Hasya Hathauda 10 : चाय बन गई क्या?
असल जिंदगी में सिस्टम वही रहता है, बस रील का फ़िल्टर बदल जाता है। क्रांति करने वाला युवा जब बिजली का बिल भरने जाता है तो लाइन में चुपचाप खड़ा रहता है। सरकारी दफ्तर में वही क्रांतिकारी अचानक बहुत सभ्य हो जाता है, सर, जरा देख लीजिए ना।
Hasya Hathauda 10 : रील की क्रांति में सबसे सुरक्षित चीज होती है, जिम्मेदारी।
न कोई गिरफ़्तारी, न कोई संघर्ष, न कोई जोखिम। बस एक वीडियो, दस हैशटैग और आपकी सौ लाइक रील क्रांति सफल।
सोशल मीडिया पर लोग कहते हैं, अगर जनता साथ आ जाए तो सब बदल सकता है लेकिन जनता असल में साथ आने को कहती है। भैया, आज नहीं… नेट स्लो है।
Hasya Hathauda 10 : सबसे दिलचस्प बात यह है कि रील की क्रांति हमेशा दूसरों से उम्मीद करती है।
कोई कहता है युवा आगे आए। युवा कहता है बुज़ुर्ग समझें। बुज़ुर्ग कहते हैं सरकार करे। सरकार कहती है कमेटी बनेगी और कमेटी बनने तक एक नई रील आ जाती है।
आज क्रांति का पैमाना यह नहीं कि आपने क्या बदला, बल्कि ये है कि आपकी रील कितनी वायरल हुई। अगर व्यूज कम हैं तो क्रांति असफल मानी जाती है इसलिए लोग मुद्दा नहीं चुनते, ट्रेंड चुनते हैं। देश बदलने की जिम्मेदारी अब संविधान से ज़्यादा एल्गोरिदम पर है।
Hasya Hathauda 10 : नतीजा यह है कि देश वही है, समस्याएं वही हैं, सिस्टम वही है बस हर शाम एक नई रील आती है और हर सुबह वही पुरानी चाय। क्योंकि आज के दौर में रील में क्रांति करना आसान है, असल में बदलाव मेहनत से आता है और मेहनत…वो तो अगली रील में करेंगे।

