Gyan Yug Diwas 2026 : भोपाल, आज जब पूरी दुनिया तनाव, अशांति, युद्ध और असंतुलन के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में भारतीय वैदिक ज्ञान और चेतना विज्ञान एक बार फिर मानवता को शांति का मार्ग दिखा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चेतना वैज्ञानिक एवं भावातीत ध्यान के प्रणेता परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी के 109वें जन्मदिवस के अवसर पर ‘महर्षि ज्ञान युग दिवस’ का दो दिवसीय समारोह का शुभारंभ भोपाल स्थित स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती आश्रम के महर्षि उत्सव भवन में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरु हुआ।

यह आयोजन केवल भोपाल या भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के 300 से अधिक शहरों और विश्व के 150 देशों में ज्ञान युग दिवस उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। यह समारोह मात्र एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महर्षि महेश योगी जी के उस दिव्य दर्शन का वैश्विक विस्तार है, जिसमें ज्ञान, चेतना और विज्ञान के माध्यम से स्थायी विश्व शांति की स्थापना का संकल्प निहित है।
Gyan Yug Diwas 2026 : ज्ञान युग की अवधारणा
महर्षि महेश योगी जी का मानना था कि मानव जीवन का मूल उद्देश्य चेतना का विकास है। ‘ज्ञान युग’ वह कालखंड है, जहाँ आध्यात्मिक चेतना, वैज्ञानिक सोच और तकनीकी विकास एक-दूसरे के पूरक बनते हैं। इस युग में वैदिक ज्ञान को केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन विज्ञान के रूप में स्वीकार किया जाता है।

Gyan Yug Divas 2026 : महर्षि महेश योगी जी ने वैदिक ज्ञान, योग और भावातीत ध्यान को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाया: ब्रह्मचारी गिरीश जी
समारोह के प्रथम सत्र में महर्षि संस्थान के प्रमुख ब्रह्मचारी डॉ. गिरीश चंद्र वर्मा ने कहा कि महर्षि महेश योगी जी ने भारतीय वैदिक ज्ञान, योग और भावातीत ध्यान को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि आज का समय वास्तव में ‘ज्ञान युग’ है, जहाँ मानव चेतना का विकास ही मानवता के भविष्य का निर्धारण करेगा।

Gyan Yug Divas 2026 : ज्ञान ही विज्ञान है: प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा
महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर प्रमोद कुमार वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि वैदिक ज्ञान केवल आध्यात्मिक नहीं है, बल्कि उसमें विज्ञान समाहित है। आज का आधुनिक विज्ञान वेदों में निहित सिद्धांतों की ही पुनः खोज है।

Gyan Yug Divas 2026 : विज्ञान, तकनीक और चेतना का संगम ज्ञान युग दिवस: प्रो. भुवनेश शर्मा
विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर भुवनेश शर्मा ने आध्यात्मिक चेतना और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चेतना के बिना विज्ञान दिशाहीन हो जाता है और विज्ञान के बिना चेतना का व्यापक प्रभाव संभव नहीं।

Gyaan Yug Divas 2026 : भविष्य में एआई मानव को नियंत्रित कर सकती है: डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा
डीआरडीओ के सुप्रसिद्ध मिसाइल वैज्ञानिक डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा ने वर्चुअल माध्यम से संबोधन में कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया को तेजी से बदल रही है। यदि एआई को चेतना और नैतिक मूल्यों से नहीं जोड़ा गया, तो भविष्य में एआई मानव को नियंत्रित कर सकती है। इसलिए तकनीकी विकास के साथ चेतना का विकास अनिवार्य है।

Gyan Yug Divas 2026 : प्रसन्नता दो प्रकार की होती है—एक आंतरिक और दूसरी बाह्य: डॉ. निलोय खरे
भारत सरकार के सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय के सलाहकार डॉ. निलोय खरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमें यह प्रयास करना चाहिए कि विज्ञान और तकनीक के माध्यम से समाज में प्रसन्नता कैसे लाई जाए और विश्व शांति की स्थापना कैसे हो। उन्होंने कहा कि प्रसन्नता दो प्रकार की होती है—एक आंतरिक और दूसरी बाह्य। आंतरिक प्रसन्नता के लिए व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर चलना होता है। इसके लिए नियमित साधना, आत्मसंयम और स्वयं के भीतर निहित चेतना की किरण को जाग्रत करना आवश्यक है। यही आंतरिक खुशी व्यक्ति को स्थायी संतोष और मानसिक शांति प्रदान करती है।

वहीं दूसरी ओर, आम व्यक्ति की बाह्य प्रसन्नता भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति से जुड़ी होती है। यदि जीवन में मूलभूत सुविधाएँ और ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ उपलब्ध हों, तो व्यक्ति संतुलित और प्रसन्न रहता है तथा समाज में भी सकारात्मकता का प्रसार करता है।
डॉ. खरे ने कहा कि जब आंतरिक चेतना और बाह्य संसाधनों के बीच संतुलन स्थापित होता है, तभी एक सुखी, शांत और समरस समाज का निर्माण संभव हो पाता है।

Gyan Yug Diwas 2026 : शिक्षा और युवा पीढ़ी के लिए संदेश: जय नारायण चौकसे
एलएनसीटी ग्रुप के चेयरमैन जय नारायण चौकसे ने कहा कि आध्यात्मिक चेतना के बिना शिक्षा और विकास दोनों अधूरे हैं। महर्षि महेश योगी जी का दर्शन आज की युवा पीढ़ी के लिए दिशासूचक है, जो तनावमुक्त और संतुलित जीवन की ओर ले जाता है।
यूरोप से पधारीं क्रिस्टियान कुहल ने भी वैदिक ज्ञान और भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए और कहा कि वैदिक जीवन दृष्टि आज पूरी दुनिया को आंतरिक शांति प्रदान कर रही है।

Gyan Yug Diwas 2026 : ज्ञान से विश्व शांति की ओर
महर्षि ज्ञान युग दिवस 2026 यह स्पष्ट संदेश देता है कि आध्यात्मिक चेतना में ही संपूर्ण ज्ञान और विज्ञान समाहित है। रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, तकनीक और समाज के हर क्षेत्र में यदि चेतना आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो विश्व शांति केवल कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविकता बन सकती है। महर्षि महेश योगी जी द्वारा रोपे गए वैदिक ज्ञान के बीज आज विश्व के 150 से अधिक देशों में पुष्पित-पल्लवित होकर मानवता को शांति, संतुलन और समृद्धि का मार्ग दिखा रहे हैं।
संपादकीय नजरिया:
पूज्यवर, महर्षि महेश योगी ने लगभग सात दशक पहले जिस आध्यात्मिक चेतना की मशाल विश्व को सौंपी थी, आज 68 वर्षों बाद वही चेतना एक बार फिर मानवता को दिशा दिखा रही है। जब उन्होंने भावातीत ध्यान और वैदिक ज्ञान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया, तब दुनिया विज्ञान और भौतिक प्रगति के उत्साह में आध्यात्मिक मूल्यों से दूर होती जा रही थी। आज वही दुनिया तनाव, युद्ध, पर्यावरण संकट और मानसिक अवसाद से जूझ रही है। ऐसे समय में महर्षि जी की चेतना विज्ञान आधारित सोच पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होती है।
महर्षि महेश योगी का संदेश स्पष्ट था, शांति बाहर नहीं, भीतर से आती है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि जब व्यक्ति की आंतरिक चेतना संतुलित होती है, तभी समाज और राष्ट्र में स्थायी शांति संभव है। आज विश्व के 150 से अधिक देशों में भावातीत ध्यान, चेतना आधारित शिक्षा और वैदिक जीवन पद्धति के माध्यम से करोड़ों लोग मानसिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव कर रहे हैं।
डिजिटल युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में महर्षि जी का दर्शन और भी मार्गदर्शक बन गया है। तकनीक जितनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही ज़रूरत मानव को आत्मचिंतन और आत्मसंयम की है। महर्षि जी की आध्यात्मिक चेतना विज्ञान और अध्यात्म के बीच सेतु बनकर यह संदेश दे रही है कि प्रगति तभी सार्थक है, जब वह मानव कल्याण से जुड़ी हो। 68 वर्षों बाद भी महर्षि महेश योगी की चेतना विश्व को यही दिग्दर्शन दे रही है—ज्ञान से चेतना और चेतना से विश्व शांति।

