China G219 Highway : भारत सहित 14 देशों की सीमाओं से गुजरेगा,तीन हिस्सों से तैयार हो रही रिंग रोड
China G219 Highway : china अपनी जमीनी सीमाओं के पास करीब 25,000 किलोमीटर लंबा मेगा रोड नेटवर्क बना रहा है, जिसे चीनी मीडिया में ‘गोल्डन बॉर्डर-कोस्ट लूप’ नाम दिया गया है। इस परियोजना का लक्ष्य 2030 तक इसे पूरा करना है… इसका मुख्य हिस्सा करीब 10,000 किलोमीटर लंबा G219 हाईवे है, जो भारत समेत 14 देशों (वियतनाम, लाओस, म्यांमार, भूटान, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, रूस ) की सीमाओं के पास से गुजरता है…इस विशाल सड़क नेटवर्क और बुनियादी ढांचे के जरिए चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में अपनी सेना, भारी सैन्य उपकरणों तथा रसद (logistics) को तेजी से तैनात करने में मदद मिलेगी। भारत और अन्य पड़ोसी देशों की सीमाओं के पास इस तरह के दोहरे उपयोग (आर्थिक और सैन्य) वाले मार्ग के निर्माण से सामरिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। चीन ने हालिया वर्षों में बॉर्डर के आसपास लगातार अपने सड़क, पुल और सुरंगों को मजबूत किया है। भारत बॉर्डर पर उसके निर्माण खासतौर से चर्चा में आते रहे हैं।
China G219 Highway : चीन अपनी जमीनी सीमाओं और समुद्र तटों के साथ एक बड़ा रोड लिंक बना रहा है। इस प्रोजेक्ट को इकोनॉमिक डेवलपमेंट, सोशल स्टेबिलिटी और नेशनल यूनिटी को बढ़ावा देने की कोशिश के तौर पर पेश किया गया है। इसमें 25,000 किमी से ज्यादा का रूट कई ऐसे इलाकों से होकर गुजरेगा, जहां बड़ी एथनिक माइनॉरिटी आबादी है। साथ ही यह भारत की सीमा के पास से भी निकलेगा। यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है लेकिन जियोपॉलिटिकल और इकोलॉजिकल रिस्क पैदा करता है। इस प्रोजेक्ट में खासतौर से भारतीय सीमा के आसपास के इलाके मुश्किल का सबब बन सकते हैं।जुलाई में चीन की ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने इसके लिए पांच साल का ब्लूप्रिंट जारी किया है। इसमें बताया गया है कि इस रिंग रोड के तीन सेक्शन होंगे। चीन और भारत के बीच रिश्तों में बॉर्डर विवाद लगातार बना हुआ है। भारत खासतौर से G219 हाईवे को चिंता की नजर से देखता है। दिल्ली ने 2024 में विवादित बॉर्डर इलाकों में हो रहे रोड अपग्रेड और एक्सटेंशन का विरोध किया था, जो G219 प्रोजेक्ट की तैयारी का हिस्सा था।भारत की एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन पर भी चिंता है।
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