मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के मुख्यमंत्री निवास में आयोजित ‘किसान सम्मेलन’ में किसानों के हित और प्रदेश की कृषि प्रगति पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के खाते में सीधे पैसों का भुगतान हो रहा है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन की कटाई से पहले ही नुकसान का मुआवजा किसानों के खातों में पहुंच गया, जिससे किसानों की भावनाओं का सम्मान किया गया है।
डॉ. यादव ने बताया कि देश में सबसे ज्यादा गेहूं का दाम मध्यप्रदेश को मिला और किसानों की जरूरतों को समझना सिर्फ किसान परिवार का बेटा ही कर सकता है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1956 में मध्यप्रदेश के गठन के बावजूद कांग्रेस ने कभी भी किसी किसान के बेटे को मुख्यमंत्री नहीं बनाया। उन्होंने किसानों की मेहनत को सम्मान देते हुए कहा कि वे धूप, ओला-पाला, सुखा और बाढ़ का सामना करके अन्न उगाते हैं और सबका पेट भरते हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जल संपदा और सिंचाई योजनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और 250 से अधिक नदियां इसी प्रदेश से निकलती हैं। नदी जोड़ो अभियान के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों को सोलर पंप की लागत का केवल 10% देना होगा और 90% अनुदान मिलेगा, जिससे वे अपनी बिजली का खर्चा खुद चला सकेंगे। वर्तमान में 52 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है, जिसे सरकार भविष्य में 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
कृषि उत्पादन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की स्थिति बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश संतरा, मसाला, लहसुन, अदरक और धनिया में नंबर 1 पर है, मटर, प्याज, मिर्च और अमरूद उत्पादन में दूसरे, जबकि फूल, औषधि और सुगंधित पौधों के उत्पादन में तीसरे नंबर पर है। खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, फल और सब्जियों में भी मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है।
उन्होंने धार्मिक पर्यटन के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि सरकार श्री राम वन गमन पथ पर प्रत्येक स्थान पर तीर्थ स्थल विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में उपस्थित सभी किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी अपने किसान पुत्र के निवास पर आए हैं, यह आपका ही निवास है। अंत में उन्होंने सभी को आने वाले दीपावली के पावन पर्व की शुभकामनाएं दी।





