Cheetah Project के तहत मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। बोत्सवाना से भारत लाई गई मादा चीता CCB-2 को अब कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में स्थानांतरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 सितंबर को गांधी सागर में CCB-2 को नए बाड़े/आवास क्षेत्र में छोड़ेंगे।
Cheetah Project के तहत की जा रही इस शिफ्टिंग का उद्देश्य मध्यप्रदेश में चीतों के लिए नए प्राकृतिक आवास विकसित करना और अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी आबादी को बढ़ावा देना है। गांधी सागर में पहले से मौजूद चीतों के साथ CCB-2 भी रहेगी।
Cheetah Project: 20 सितंबर को गांधी सागर में छोड़ी जाएगी CCB-2
Cheetah Project के तहत CCB-2 को कूनो से गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी ले जाने की तैयारी पूरी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 सितंबर को इसे गांधी सागर में छोड़ेंगे। इसके साथ ही मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण और प्रबंधन के अगले चरण की शुरुआत होगी।
Cheetah Project में गांधी सागर को कूनो के साथ एक महत्वपूर्ण चीता आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। नए क्षेत्र में चीता आबादी के विस्तार से संरक्षण कार्यक्रम को व्यापक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
Cheetah Project: बोत्सवाना से ढाई साल की उम्र में भारत आई थी CCB-2
Cheetah Project के तहत CCB-2 को बोत्सवाना के घांजी से भारत लाया गया था। करीब ढाई वर्ष की उम्र में यह मादा चीता 28 फरवरी को भारत पहुंची और इसके बाद उसे कूनो नेशनल पार्क में रखा गया।
Cheetah Project के तहत भारत पहुंचने के बाद CCB-2 को निर्धारित अवधि के लिए क्वारंटीन में रखा गया था। क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद मई में उसे खुले जंगल में छोड़ा गया। इसके बाद उसने भारतीय परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता दिखाई।
Cheetah Project: कूनो में अनुकूलन के बाद अब गांधी सागर की बारी
Cheetah Project में किसी चीते को एक नए क्षेत्र में स्थानांतरित करने से पहले उसके स्वास्थ्य और अनुकूलन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। CCB-2 ने कूनो में खुले जंगल में रहने के दौरान भारतीय पर्यावरण के साथ तालमेल बनाया।
Cheetah Project के अगले चरण में अब CCB-2 को गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में रखा जाएगा। यहां उसके लिए प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध है और वह पहले से मौजूद चीतों के साथ नए क्षेत्र में रह सकेगी।
Cheetah Project: गांधी सागर में अब होंगे 2 नर और 2 मादा चीते
Cheetah Project के तहत CCB-2 के गांधी सागर पहुंचने के बाद यहां चीतों की संख्या चार हो जाएगी। इनमें दो नर और दो मादा चीते शामिल होंगे। इससे गांधी सागर क्षेत्र में चीता आबादी के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
Cheetah Project में चीतों को अलग-अलग उपयुक्त क्षेत्रों में बसाने का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना ही नहीं, बल्कि लंबे समय में स्थायी आबादी विकसित करना भी है। गांधी सागर में CCB-2 की मौजूदगी इस दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।
Cheetah Project: कूनो-गांधी सागर लैंडस्केप में 60-70 चीतों का लक्ष्य
Cheetah Project के तहत कूनो और गांधी सागर को जोड़कर एक बड़े चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित करने की योजना है। केंद्र सरकार के आधिकारिक प्रोजेक्ट फ्रेमवर्क में कूनो-गांधी सागर परिदृश्य में लंबे समय में करीब 60 से 70 चीतों की मेटापॉपुलेशन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
Cheetah Project में मेटापॉपुलेशन का मतलब अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाली चीतों की ऐसी आबादी से है, जिनके बीच भविष्य में प्राकृतिक या प्रबंधित तरीके से संपर्क और जीन प्रवाह बनाए रखने की संभावना हो। इससे चीता संरक्षण को एक ही क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय व्यापक स्तर पर विकसित करने में मदद मिल सकती है।
Cheetah Project: एमपी में बढ़ रहा चीता संरक्षण का दायरा
Cheetah Project के तहत मध्यप्रदेश में कूनो के साथ गांधी सागर को भी चीता संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। CCB-2 का स्थानांतरण इसी व्यापक योजना का हिस्सा है।
Cheetah Project के इस चरण में नए आवास में चीता आबादी के विस्तार के साथ उनके संरक्षण, निगरानी और प्रजनन की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। गांधी सागर में CCB-2 के आने से मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण कार्यक्रम का दायरा और विस्तृत होगा।


