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हास्य-हथौड़ा

Hasya Hathauda

Hasya Hathauda : वो मेरा गांव और पीपल के पेड़ की छांव !

  Hasya Hathauda : भैया, पाठशाला का नाम सुनते ही दिमाग में पढ़ाई लिखाई और कक्षा के दृश्य छा जाते हैं, अपन के गांव में वो भी क्या दिन थे, स्कूल में टाट पट्टी, झोले में स्लेट पट्टी, दीदी आई मिठाई लाई, हिंदी की किताब, स्लैट पट्टी, लिखने का बर्तना,

Hasya Hathauda

Hasya Hathauda : पाखंड का बोलवाला, सच का मुंह काला !

Hasya Hathauda : भैया, आजकल पाखंड कोई साधारण चीज़ नहीं रही। अब ये अकेला नहीं चलता, इसके साथ पूरा कुनबा रहता है। ढोंग इसका बड़ा भाई, आडंबर मँझला, दिखावा फुफेरा, प्रपंच मौसेरा, कपट पड़ोसी, धोखाधड़ी रिश्तेदार, नकली और बेईमानी तो घर के ही बच्चे हैं, और ढकोसला? वो तो कुल

Hasya Hathauda

Hasya Hathauda ; संस्कृति पर गर्व, संस्कारों को ‘तिलांजलि’ !

हास्य हथौड़ा, हमने अपना ही सिर फोड़ा 😀 Hasya Hathauda हमारी संस्कृति को दुनिया की सबसे समृद्धशाली संस्कृति कहा जाता है।हम भारत के लोग खुद को सबसे संस्कारी कहलाना पसंद करते हैं।लेकिन सच यह है कि हम अपने संस्कार घर से निकलने से पहले ताक पर रख देते हैं। घर

Hasya Hathoda ;

Hasya Hathoda ; हास्य-हथौड़ा, नल से पानी नहीं, व्यवस्था टपक रही है… !

Hasya Hathoda ; कहते हैं, पानी जीवन है, पर आजकल हमारे शहरों के कई इलाकों में यह जीवन का नहीं, व्यवस्था का पोस्टमार्टम करता दिख रहा है। नल खुलते ही जो बहता है, वह पानी कम और भरोसे का रिसाव ज्यादा लगता है। नागरिक उसे पीने से पहले भगवान को