
Hasya Hathauda : वो मेरा गांव और पीपल के पेड़ की छांव !
Hasya Hathauda : भैया, पाठशाला का नाम सुनते ही दिमाग में पढ़ाई लिखाई और कक्षा के दृश्य छा जाते हैं, अपन के गांव में वो भी क्या दिन थे, स्कूल में टाट पट्टी, झोले में स्लेट पट्टी, दीदी आई मिठाई लाई, हिंदी की किताब, स्लैट पट्टी, लिखने का बर्तना,





