नई दिल्ली, 18 अप्रैल 2025 – जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के एक प्रोफेसर को जापानी दूतावास की एक अधिकारी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। यह फैसला विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की जांच के बाद लिया गया, जिसमें प्रोफेसर के खिलाफ ऑडियो रिकॉर्डिंग्स सहित सबूत पाए गए।
क्या हुआ था?
- जापानी अधिकारी प्रो. स्वरन सिंह के साथ शैक्षणिक सम्मेलनों का आयोजन कर रही थीं, जब यह घटना हुई।
- उन्होंने अपनी बातचीत की रिकॉर्डिंग्स ICC को सौंपी, जिसके आधार पर जांच शुरू हुई।
- ICC की रिपोर्ट पर एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने बुधवार को प्रो. सिंह को बर्खास्त करने का फैसला किया।
पहले भी आरोप लग चुके हैं
- सूत्रों के मुताबिक, सिंह पर पहले भी ऐसे आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्होंने एक बार इस्तीफा दिया था, लेकिन बाद में वापस लौट आए।
- विश्वविद्यालय को पिछले कुछ वर्षों में उनके खिलाफ आठ शिकायतें मिल चुकी हैं।
- यह बर्खास्तगी उनकी रिटायरमेंट से सिर्फ एक साल पहले हुई है, जिससे उनका तीन दशक लंबा शैक्षणिक करियर अचानक खत्म हो गया।
अन्य कार्रवाइयाँ
काउंसिल ने तीन अन्य शिक्षकों के खिलाफ भी कार्रवाई की:
- दो प्रोफेसर्स के तीन साल के वेतन वृद्धि रोक दी गई।
- तीसरे को संवेदनशीलता प्रशिक्षण लेने का आदेश दिया गया।
JNU का रुख
कुलपति संतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने कहा कि विश्वविद्यालय का शून्य सहनशीलता का नियम है। पहली बार, ICC में छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
प्रो. स्वरन सिंह कौन हैं?
- चीन और इंडो-पैसिफिक मामलों के विशेषज्ञ, DU और JNU से पढ़ाई की।
- JNU में मुख्य सतर्कता अधिकारी (2012-14) रह चुके।
- कनाडा, चीन और IDSA (दिल्ली) में भी पढ़ाया।
- भारत-चीन संबंध, साइबर सुरक्षा और जलवायु राजनीति पर किताबें लिखी हैं।
कोई प्रतिक्रिया नहीं
सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया, जबकि जापानी दूतावास ने भी चुप्पी साध ली।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
इस घटना से पता चलता है कि सबूत होने पर प्रभावशाली लोगों को भी सजा मिल सकती है। साथ ही, यह सवाल भी उठता है कि पहले की शिकायतों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
फिलहाल, JNU का संदेश साफ है: उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे आरोपी कितना भी ताकतवर क्यों न हो।
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