इंदौर ने फिर बनाया इतिहास! भारत का पहला ग्रीन वेस्ट प्लांट लॉन्च

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इंदौर, जो पिछले सात सालों से भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में जाना जाता है, अब एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। भारत का पहला पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट इंदौर में शुरू किया जाएगा। यह प्लांट स्वच्छ भारत मिशन के तहत लगाया जाएगा और यहां पेड़ों की टहनियों और लकड़ी को इको-फ्रेंडली लकड़ी के पैलेट्स में बदला जाएगा। ये पैलेट्स कोयले के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जाएंगे, जिससे पर्यावरण को बचाने में मदद मिलेगी।

प्लांट की मुख्य विशेषताएं

  • स्थान: बिछोली हापसी, इंदौर
  • क्षेत्रफल: 55,000 वर्ग फुट
  • उत्पाद: लकड़ी के पैलेट्स
  • उपयोग: कोयले के विकल्प के रूप में
  • रॉयल्टी: इंदौर नगर निगम (IMC) को प्रति टन 3,000 रुपये

इंदौर का बढ़ता ग्रीन वेस्ट उत्पादन

इंदौर शहर में हर दिन लगभग 30 टन ग्रीन वेस्ट (पेड़ों की टहनियां, पत्तियां, फूल आदि) उत्पन्न होता है। मौसम के बदलने पर, खासकर पतझड़ के समय, यह मात्रा 60 से 70 टन तक पहुंच जाती है। इस वेस्ट को अब उपयोगी उत्पादों में बदला जाएगा।

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पीपीपी मॉडल कैसे काम करेगा?

  • निजी कंपनी की भूमिका: एस्ट्रोनॉमिकल बिजनेसेज प्राइवेट लिमिटेड ने इंदौर नगर निगम के साथ मिलकर यह प्रोजेक्ट शुरू किया है। कंपनी प्लांट की स्थापना और प्रबंधन का जिम्मा संभालेगी।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर: शेड, बिजली और पानी की सुविधाएं निजी कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी।
  • कमाई का मॉडल: नगर निगम को प्रति टन 3,000 रुपये की रॉयल्टी मिलेगी।

अन्य इको-फ्रेंडली पहल

  • मेघदूत और सब-ग्रेड फैक्ट्रियां: सिरपुर में 10,000 से 15,000 वर्ग फुट की फैक्ट्रियां लगाई गई हैं, जहां छोटी टहनियों और पत्तियों को प्रोसेस किया जाएगा।
  • कम्पोस्टिंग: नगर निगम के बगीचों में कम्पोस्ट पिट बनाए गए हैं, जहां ग्रीन वेस्ट को खाद में बदला जाएगा।

लकड़ी के पैलेट्स का उपयोग

लकड़ी के पैलेट्स का इस्तेमाल एनटीपीसी (NTPC) जैसी संस्थाओं में किया जाएगा। ये पैलेट्स कोयले के विकल्प के रूप में ऊर्जा उत्पादन में मदद करेंगे। इसके अलावा, इन्हें पैकिंग मटेरियल बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्यों है यह पहल महत्वपूर्ण?

  • पर्यावरण संरक्षण: ग्रीन वेस्ट को रिसाइकल करके पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सकता है।
  • ऊर्जा बचत: लकड़ी के पैलेट्स कोयले के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाते हैं।
  • आर्थिक लाभ: नगर निगम को रॉयल्टी के रूप में आमदनी होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

निष्कर्ष

इंदौर का यह प्रोजेक्ट न केवल शहर की स्वच्छता को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा कदम साबित होगा। यह पहल देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मिसाल बनेगी।

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