̥Religious Crowd Control: ये हादसे खोल रहे सिस्टम की पोल !कोलकाता, ग्वालियर में हाहाकार,कौन कसूरवार ?
Religious Crowd Control: देश में आस्था के नाम पर लोगों का इकट्ठा होना कोई नई बात नहीं है…लेकिन जब ये धार्मिक आयोजन मौत को दावत देते हैं…तो जनता की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना लाजिमी है…ये सवाल इसलिए खड़े हुए हैं क्योंकि कोलकाता के चित्तरंजन एवेन्यू के पास चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की जिंदगी चली गई और 25 घायल हो गए..जिसमें से एक ही हालत गंभीर है….मृतकों में चार पुरुष, दो बच्चे और 13 महिलाएं शामिल हैं..मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूजा समिति के सभी सदस्यों को थाने में बुलाने का निर्देश दिया है और पुलिस ने पूजा आयोजक समेत 10 लोगों को हिरासत में लिया है..जबकि मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख, ग्रुप-डी में सरकारी नौकरी और घायलों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक मदद का एलान किया गया..वहीं हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर एक सिटिंग जज के नेतृत्व में एसआईटी गठित करने को कहा गया है…इधर ग्वालियर में भी शीतला माता मंदिर में दर्शन के लिए लाइन में लगे श्रद्धालुओं को ट्रक ने कुचल दिया…जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो पुलिसकर्मियों समेत 26 लोग घायल हैं…ट्रक श्रद्धालुओं और दुकानों को रौंदते हुए मंदिर के एंट्री गेट से टकराया…टक्कर से दीवार ढह गई, जिसके मलबे में कई लोग दब गए…घटना के बाद पुलिस ने ट्रक मालिक मोहित सिंह और ड्राइवर दिलबाग सिंह को गिरफ्तार कर लिया है…इस भीषण हादसे के बाद सीएम डॉक्टर मोहन यादव मृतकों के परिजन को 4-4, गंभीर घायलों को 2-2 लाख की आर्थिक मदद दी है..और कार्रवाई करते हुए कुछ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है और पारदर्शी जांचकर दोषियो पर कार्रवाई करने को कहा है…वहीं इस गंभीर घटना पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी दुख जताया है…
Religious Crowd Control: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पोस्ट में लिखा कि चोर बागान पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना के बारे में जानकर मैं स्तब्ध और बेहद दुखी हूं.. मां दुर्गा से प्रार्थना करता हूं कि सभी घायलों को जल्द स्वस्थ होने की शक्ति मिले और इस मुश्किल समय में उनके परिवारों को हिम्मत और संबल मिले..वहीं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लिखा कि सभी घायलों को तुरंत बेहतर इलाज मिले और इस हादसे की निष्पक्ष जाँच हो ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न दोहराई जाए..इन हादसों ने पुलिस की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं….स्थानीय लोगों ने दावा किया कि तेज बारिश होने के कारण पंडाल के अंदर मौजूद लोग बारिश रुकने का इंतजार कर रहे थे, जबकि बाहर इंतजार कर रहे लोग बेसब्र होकर पहले से ही खचाखच भरे पंडाल में प्रवेश करने की कोशिश करने लगे..इन दिनों मेलों, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में अचानक होने वाली भगदड़ एक गंभीर मानव निर्मित आपदा है, जिसमें सुरक्षा नियमों का पालन करना अत्यंत जरूरी है..भगदड़ के बाद राजनेताओं की भी अपने बयान देने के साथ एक-दूसरे पर प्रश्न उठाने की भी भगदड़ मच जाती है…लेकिन सबके बीच जरुरत की बातें पीछे छूट जाती है..जिसके कारण घटनाओं से जनता सबक नहीं ले पाती है..आधी-अधूरी और तीखी बहस और बयानों के बावजूद लोगों के मन मे कई प्रकार के प्रश्न उठते हैं..लेकिन कोई जिम्मेदार इनका जबाब देने के लिए तैयार नहीं होता है..सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि भगदड़ की घटनाएं लगभग वैसे ही कारणों से होती हैं, जैसे पहले हो चुकी होती हैं..हर बार जांच, कठोर कार्रवाई करने, सबक सीखने की बातें की जाती हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही रहता है..
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