Delhi University Women Discourse Seminar: मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय में स्त्री विमर्श पर संगोष्ठी
दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय (सांध्य) के हिंदी विभाग की ओर से स्त्री विमर्श विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वानों, साहित्यकारों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में स्त्री अस्मिता, समाज में महिलाओं की भूमिका, मीडिया में उनकी भागीदारी, भाषा-संस्कृति और साहित्य में स्त्री के योगदान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
संगोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से किया गया। इसमें कुल तीन सत्र आयोजित हुए, जिनमें देश के विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से जुड़े विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने अपने विचारों के माध्यम से स्त्री विमर्श के सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषायी और साहित्यिक पक्षों को सामने रखा।
Delhi University Women Discourse Seminar: प्राचार्य प्रो. संदीप गर्ग ने किया उद्घाटन
संगोष्ठी का उद्घाटन मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संदीप गर्ग ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। पहले सत्र का विषय ‘डिजिटल युग में स्त्री: छवि, चुनौतियां और संभावनाएं’ रहा।
प्रो. संदीप गर्ग ने स्त्री विमर्श से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने उन सामाजिक परिस्थितियों और समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिनके कारण आज भी स्त्री-अस्मिता के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने डिजिटल युग में महिलाओं की छवि, उनकी सामाजिक स्थिति और उनके सामने मौजूद संभावनाओं पर चर्चा की।
Delhi University Women Discourse Seminar: प्रो. सुधा सिंह ने मीडिया में महिलाओं की भागीदारी पर उठाए सवाल
पहले सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुधा सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने अपने वक्तव्य में महाभारत के द्रौपदी प्रसंग का उल्लेख करते हुए स्त्री की स्थिति और उसके अधिकारों से जुड़े प्रश्नों पर चर्चा की।
प्रो. सुधा सिंह ने मीडिया और जनसंचार में महिलाओं की भागीदारी के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इस बात पर विचार करने की आवश्यकता बताई कि मीडिया में महिलाओं की उपस्थिति, उनकी छवि और उनके विचारों को किस तरह प्रस्तुत किया जाता है। उनके वक्तव्य में स्त्री की अभिव्यक्ति, सामाजिक दृष्टिकोण और मीडिया में प्रतिनिधित्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आए।
Delhi University Women Discourse Seminar: अमेरिका से जुड़ीं कुसुम नैपचिक ने समानता पर रखे विचार
संगोष्ठी के पहले सत्र में अमेरिका से जुड़ीं कुसुम नैपचिक ने भी मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। उन्होंने भारत और विदेशों में महिलाओं की स्वतंत्रता से जुड़े अनुभवों और परिस्थितियों के अंतर पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि अमेरिका में भी समान वेतन जैसे मुद्दों को लेकर आवाज उठाई जा रही है। उनके वक्तव्य से यह बात सामने आई कि महिलाओं की समानता और अधिकारों से जुड़े प्रश्न किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग समाजों में विभिन्न रूपों में मौजूद हैं।
Delhi University Women Discourse Seminar: राष्ट्रभाषा और संस्कृति में स्त्री की भूमिका पर चर्चा
संगोष्ठी के दूसरे सत्र का विषय ‘राष्ट्रभाषा और संस्कृति के विकास में स्त्री की भूमिका’ रहा। इस सत्र की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर अनिल राय ने की, जबकि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के विभागाध्यक्ष प्रो. सुधीर प्रताप सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।
प्रो. अनिल राय ने अपने वक्तव्य में जी20 का उल्लेख करते हुए राष्ट्रभाषा और राजभाषा की संकल्पनाओं पर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने महात्मा गांधी के हिंदुस्तानी संबंधी विचारों का भी जिक्र किया। उन्होंने हिंदी और उसकी बोलियों के संबंध पर बात रखते हुए कहा, “हिंदी की बोलियां उसकी विरोधी नहीं हैं। राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा होता है।”
उनके वक्तव्य में भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान के आपसी संबंधों पर जोर दिया गया। साथ ही इस बात पर भी चर्चा हुई कि भाषा और सांस्कृतिक विकास की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका को किस तरह समझा जाना चाहिए।
Delhi University Women Discourse Seminar: प्रो. सुधीर प्रताप सिंह ने ऐतिहासिक महिलाओं के योगदान को किया याद
दूसरे सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. सुधीर प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में बेगम हजरत महल, रानी लक्ष्मीबाई, हंसा मेहता, दुर्गाबाई देशमुख और महादेवी वर्मा जैसी महत्वपूर्ण महिलाओं का उल्लेख किया। उन्होंने इतिहास, समाज और साहित्य में महिलाओं के योगदान के माध्यम से रूढ़िवादी सोच पर सवाल उठाए।
उन्होंने महादेवी वर्मा की प्रसिद्ध कविता ‘मैं नीर भरी दुःख की बदली’ का पाठ भी किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने स्त्री की शक्ति, सामाजिक धारणाओं और महिलाओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति से जुड़े सवाल सामने रखे।
प्रो. सुधीर प्रताप सिंह ने सवाल किया कि यदि स्त्री इतनी कमजोर थी, तो राम को शक्तिपूजा की आवश्यकता क्यों पड़ी? उन्होंने इस तरह के सवालों के माध्यम से समाज में प्रचलित धारणाओं पर पुनर्विचार करने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा, “आज की स्त्रियों में अपने अभिव्यक्ति के स्वर हैं। स्त्रियां अपनी भाषा स्वयं रचती हैं।” उन्होंने स्त्री और पुरुष से जुड़े शोध में मौजूद अंतर यानी रिसर्च गैप की ओर भी ध्यान दिलाया।
इस सत्र का संचालन प्रो. कान्हाराम मीणा ने किया, जबकि डॉ. सत्येंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
Delhi University Women Discourse Seminar: साहित्य में महिलाओं के सृजन और संघर्ष पर तीसरा सत्र
संगोष्ठी का तीसरा सत्र अपराह्न में आयोजित किया गया। इसका विषय ‘साहित्य की आधी दुनिया: सृजन, संघर्ष और बदलाव’ रहा। इस सत्र में इंग्लैंड से जुड़ीं श्रीमती दिव्या माथुर मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। जानी-मानी साहित्यकार नासिरा शर्मा विशिष्ट वक्ता रहीं, जबकि इंद्रप्रस्थ महाविद्यालय की उप-प्राचार्य प्रो. हर्षबाला ने सत्र की अध्यक्षता की।
इस सत्र में साहित्य में महिलाओं की भूमिका, उनके सृजनात्मक अधिकार, लेखन के अनुभव और सामाजिक बदलावों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने साहित्यिक दुनिया में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े विषयों पर विचार रखे।
Delhi University Women Discourse Seminar: नासिरा शर्मा ने कहा, सृजन पर औरत का पूरा अधिकार
तीसरे सत्र में साहित्यकार नासिरा शर्मा ने अपने संबोधन की शुरुआत आत्मीय अंदाज में की। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा, “आप सबको मेरा बहुत-बहुत प्यार।” साथ ही उन्होंने श्रोताओं से सवाल पूछने का आग्रह किया, ताकि उन्हें भी उनसे सीखने का अवसर मिल सके।
नासिरा शर्मा ने महिलाओं की सामाजिक स्थिति और सृजनात्मक क्षमता पर बात करते हुए कहा, “अब औरत आधी दुनिया नहीं रही। औरत की ही पूरी दुनिया है।” उन्होंने सृजन की जिम्मेदारी और साहित्य में महिलाओं के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। अपने वक्तव्य में उन्होंने थेरीगाथा का उल्लेख किया और जेबुन्निसा के शेर पढ़कर उस दौर के सामाजिक परिदृश्य को सामने रखने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा, “सृजन पर औरत का पूरा अधिकार है।” नासिरा शर्मा ने यह भी कहा कि स्त्री और पुरुष दोनों गलतियां करने वाले इंसान हैं। महिलाओं को उनकी कमजोरियों के साथ स्वीकार करने और उनका सम्मान करने की जरूरत है।
उन्होंने प्रकाशक, संपादक, लेखक और प्रकाशन संस्थानों के बीच संबंधों पर भी चर्चा की। उनके वक्तव्य में साहित्य की दुनिया में महिलाओं के अधिकार, उनकी स्वतंत्र पहचान और सृजन के प्रति समाज के नजरिये जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
तीसरे सत्र का संचालन मीनू कुमारी ने किया, जबकि आशुतोष शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
Delhi University Women Discourse Seminar: हिंदी विभाग के शिक्षकों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन में मोतीलाल नेहरू महाविद्यालय (सांध्य) के हिंदी विभाग के शिक्षकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन में डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. लक्ष्मी, श्री प्रशांत मिश्र, डॉ. आशुतोष शर्मा और डॉ. हिदाम पीटर सहित विभाग के अन्य शिक्षकों का योगदान रहा।
संगोष्ठी के तीनों सत्रों में स्त्री विमर्श को सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषायी और साहित्यिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया गया। देश-विदेश से जुड़े वक्ताओं और प्रतिभागियों ने अपने विचारों के माध्यम से महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता, अभिव्यक्ति और सृजनात्मक अधिकारों पर विमर्श को आगे बढ़ाया।
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