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Leg Tingling : पैरों में बार-बार झनझनाहट क्यों होती है ? इन बीमारियों से हो सकता है संबंध

Leg Tingling Diabetes Symptoms

by: vijay yadav

Leg Tingling : क्या आपके पैरों में बार-बार झनझनाहट होती है पैर सुन हो जाते हैं, बैठने के बाद उठने का मन नही करता, चलने परेशानी होती है ? कभी ऐसा लगता है जैसे पैर में चींटियां रेंग रही हों, तो कभी सुन्नपन या सुई चुभने जैसा एहसास होता है। अक्सर लोग इसे लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या गलत तरीके से पैर रखने का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, अगर पैरों में झनझनाहट बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह शरीर में किसी समस्या का संकेत भी हो सकती है।

मेडिकल भाषा में इस तरह की झनझनाहट को पैरास्थीसिया (Paresthesia) कहा जाता है। इसके पीछे नसों पर दबाव से लेकर विटामिन की कमी, डायबिटीज और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं तक कई कारण हो सकते हैं।

Leg Tingling

Leg Tingling : पैरों में झनझनाहट होने के प्रमुख कारण

  1. डायबिटीज यानी मधुमेह

पैरों में बार-बार झनझनाहट होने का एक प्रमुख कारण डायबिटीज हो सकता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा रहने से शरीर की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इस स्थिति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।

इसमें पैरों में जलन, झनझनाहट, सुन्नपन या दर्द महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को पैरों में चोट लगने के बावजूद दर्द का एहसास कम होता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपने पैरों की नियमित जांच करनी चाहिए।

  1. विटामिन B12 की कमी

विटामिन B12 शरीर में नसों के सामान्य कामकाज और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर हाथों-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी और चलने में संतुलन की समस्या हो सकती है।

शाकाहारी भोजन करने वाले लोगों, पेट या आंतों में पोषक तत्वों के अवशोषण की समस्या वाले व्यक्तियों और कुछ विशेष दवाएं लंबे समय तक लेने वालों में इसकी कमी का जोखिम बढ़ सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट के जरिए इसकी जांच करा सकते हैं।

  1. नसों पर दबाव पड़ना

लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने, पैर पर पैर रखकर बैठने या गलत मुद्रा में सोने से नसों पर अस्थायी दबाव पड़ सकता है। इससे पैरों में कुछ समय के लिए झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होता है।

आमतौर पर स्थिति बदलने और थोड़ी देर चलने-फिरने से राहत मिल जाती है। लेकिन यदि झनझनाहट लगातार बनी रहे या बार-बार होने लगे, तो इसके दूसरे कारणों की जांच जरूरी है।

  1. रीढ़ की हड्डी और कमर की समस्या

कमर की रीढ़ में डिस्क खिसकने या नस दबने की स्थिति में दर्द और झनझनाहट पैर तक पहुंच सकती है। इसे साइटिका जैसी समस्या में देखा जा सकता है।

इसमें कमर या कूल्हे से शुरू होकर पैर के पिछले हिस्से तक दर्द, जलन या झनझनाहट महसूस हो सकती है। खांसने, छींकने या लंबे समय तक बैठने पर परेशानी बढ़ सकती है।

  1. थायरॉइड और अन्य बीमारियां

Leg Tingling : थायरॉइड हार्मोन की कमी, किडनी से जुड़ी कुछ बीमारियां और अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं भी नसों को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक अधिक मात्रा में विटामिन B6 लेने से भी नसों को नुकसान पहुंच सकता है।

कुछ मामलों में शराब का अधिक सेवन, नसों को प्रभावित करने वाली दवाएं और अन्य न्यूरोलॉजिकल स्थितियां भी झनझनाहट की वजह बन सकती हैं।

Leg Tingling : पैरों में झनझनाहट होने पर क्या करें?

यदि झनझनाहट लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने के बाद होती है, तो समय-समय पर स्थिति बदलें और हल्की गतिविधि करें। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और डायबिटीज होने पर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है।

हालांकि, बार-बार होने वाली झनझनाहट का इलाज उसके वास्तविक कारण पर निर्भर करता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड शुगर, विटामिन B12, थायरॉइड या अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के विटामिन सप्लीमेंट या दवाएं लेना उचित नहीं है।

Leg Tingling : कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?

यदि पैरों में झनझनाहट लगातार बनी रहती है, धीरे-धीरे बढ़ती है, कमजोरी के साथ आती है या चलने में परेशानी पैदा करती है, तो डॉक्टर से परामर्श लें।

यदि अचानक एक तरफ के पैर में कमजोरी या सुन्नपन के साथ चेहरे का एक हिस्सा लटकने, बोलने में परेशानी या शरीर के संतुलन में गड़बड़ी जैसे लक्षण हों, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

इसी तरह, कमर दर्द के साथ पैरों में तेजी से बढ़ती कमजोरी, जांघों के बीच के हिस्से में सुन्नपन या पेशाब-पाखाने पर नियंत्रण में परेशानी होने पर भी तत्काल अस्पताल जाना चाहिए।

पैरों में कभी-कभार होने वाली झनझनाहट अक्सर अस्थायी दबाव के कारण हो सकती है, लेकिन बार-बार या लंबे समय तक होने वाली झनझनाहट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डायबिटीज, विटामिन B12 की कमी और नसों से जुड़ी समस्याएं इसके संभावित कारण हैं। सही समय पर जांच और उपचार से समस्या को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।

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