Riaz Manzil Enemy Property विवाद में हाईकोर्ट के आदेश पेश
भोपाल रियासत के आखिरी नवाब हमीद उल्लाह खां की संपत्ति से जुड़ी खानूगांव स्थित ऐतिहासिक रियाज मंजिल कोठी और खसरा क्रमांक 42 को कथित तौर पर ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित किए जाने का विवाद अब महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार को सहायक अभिरक्षक शत्रु संपत्ति एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान प्रभावित पक्षकारों ने अपने स्वामित्व और कब्जे से जुड़े दस्तावेजों के साथ वैधानिक आपत्तियां भी पेश कीं।
Riaz Manzil Enemy Property मामले में प्रभावित पक्षकारों की पैरवी
प्रभावित रहवासियों की ओर से एडवोकेट जेड.यू. अल्वी, खालिद हफीज और अन्य अधिवक्ता मामले में पैरवी कर रहे हैं। मंगलवार की सुनवाई के दौरान दो पक्षकारों की ओर से एडवोकेट जेड.यू. अल्वी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों की प्रतियां एसडीएम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कीं। हाईकोर्ट के आदेश सामने आने के बाद मामले की कानूनी स्थिति और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
Riaz Manzil Enemy Property विवाद अब हाईकोर्ट की न्यायिक समीक्षा में
रियाज मंजिल का विवाद अब केवल राजस्व अधिकारियों के स्तर पर चल रही जांच तक सीमित नहीं रह गया है। मामला हाईकोर्ट की न्यायिक समीक्षा के दायरे में भी पहुंच चुका है। हाईकोर्ट के समक्ष प्रभावित पक्षकारों के साथ केंद्र सरकार के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय, कलेक्टर और जिला प्रशासन को भी विवादित संपत्ति की वास्तविक स्थिति तथा उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर अपना पक्ष रखना होगा।
Riaz Manzil Enemy Property पर आफताब जहां बेगम के नाम को लेकर सवाल
घर बचाओ संघर्ष समिति के उप संयोजक एडवोकेट जगदीश छावानी के मुताबिक, पूर्व में नोटिसधारियों की ओर से इस मामले में गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। उनका कहना है कि जिस रियाज मंजिल और खसरा नंबर 42 को नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से जोड़ते हुए वर्ष 2024 के कथित प्रमाण-पत्र के आधार पर शत्रु संपत्ति बताया जा रहा है, उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित जमीन आफताब जहां के नाम दर्ज होना प्रदर्शित नहीं होता।
आपत्तियों में यह भी कहा गया है कि संपत्ति का संबंध नवाब हमीदुल्लाह खान और उनके बाद मान्यता प्राप्त उत्तराधिकारी साजिदा सुल्तान से बताया जाता है। ऐसे में स्वामित्व से संबंधित पुराने राजस्व रिकॉर्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों की भूमिका इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण हो गई है।
Riaz Manzil Enemy Property प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता पर भी उठे सवाल
प्रभावित पक्षकारों ने 29 अप्रैल 2024 को जारी किए गए कथित प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता और उसके आधारभूत रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पक्षकारों की ओर से CEPI मुंबई से संबंधित मूल फाइल मंगाए जाने की मांग की गई है।
इसके साथ ही नोटशीट, प्रमाणित प्रमाण-पत्र, स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, जांच एवं सत्यापन रिपोर्ट तथा जिला प्रशासन के साथ हुए पत्राचार को भी रिकॉर्ड पर बुलाने की मांग की गई है। प्रभावित पक्षकारों का कहना है कि इन मूल दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित प्रमाण-पत्र किन रिकॉर्ड और जांच के आधार पर जारी किया गया था।
Riaz Manzil Enemy Property मामले में अगली सुनवाई 4 नवंबर को
मंगलवार की कार्यवाही के दौरान हाईकोर्ट के आदेशों की प्रतियां पेश किए जाने के साथ ही अन्य प्रभावित पक्षकारों ने भी अपने दस्तावेज और आपत्तियां न्यायालय के समक्ष रखीं। सुनवाई के बाद सहायक अभिरक्षक शत्रु संपत्ति एवं एसडीएम न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 नवंबर 2026 की तारीख तय की है।
अब अगली सुनवाई में सामने रखे गए दस्तावेजों और आपत्तियों के आधार पर मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
Riaz Manzil Enemy Property विवाद में दो बड़े सवाल
इस पूरे मामले में अब दो अहम सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पहला यह कि क्या रियाज मंजिल और खसरा नंबर 42 वास्तव में आफताब जहां बेगम के स्वामित्व वाली संपत्ति थी? दूसरा सवाल यह है कि 29 अप्रैल 2024 का कथित शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र किन मूल सरकारी अभिलेखों और दस्तावेजों के आधार पर जारी किया गया?
हाईकोर्ट तक मामला पहुंचने के बाद इन सवालों का जवाब केवल दावों या शिकायतों के आधार पर नहीं, बल्कि मूल सरकारी रिकॉर्ड, राजस्व दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सामने आना होगा। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी, जिस पर प्रभावित पक्षकारों और प्रशासन की ओर से पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड महत्वपूर्ण रहेंगे।
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