Sasaram Bypass को लेकर सासाराम शहर के लोगों के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 6 अक्टूबर को करीब 122 करोड़ रुपये की लागत से तैयार बाईपास सड़क का उद्घाटन करेंगे। इस बाईपास के चालू होने के बाद शहर के मुख्य मार्ग पर वाहनों का दबाव कम होने और लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
Sasaram Bypass करीब 9 किलोमीटर लंबा है और इसे सासाराम शहर के मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। परियोजना में रेलवे ओवरब्रिज भी शामिल है। पूर्व की रिपोर्टों में इस बाईपास की लागत 122.39 करोड़ रुपये और लंबाई करीब 9 किलोमीटर बताई गई है।
Sasaram Bypass: 9 किलोमीटर की सड़क से शहर को मिलेगी राहत
Sasaram Bypass के शुरू होने के बाद सासाराम शहर से होकर गुजरने वाले बाहरी यातायात को वैकल्पिक रास्ता मिलेगा। अभी शहर के मुख्य मार्ग से बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है, जिसके कारण कई जगहों पर जाम की स्थिति बनती रहती है।
नए बाईपास के जरिए बाहर से आने-जाने वाले वाहनों को शहर के अंदर प्रवेश किए बिना आगे जाने का रास्ता मिलेगा। इससे मुख्य बाजार और शहर के व्यस्त हिस्सों में वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है।
पथ निर्माण विभाग से जुड़ी पूर्व रिपोर्टों के अनुसार बेदा से मोकर सिंचाई नहर बांध तक करीब 9 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण कराया गया है। इसका उद्देश्य पुराने जीटी रोड पर यातायात का दबाव कम करना है।
Sasaram Bypass: आरा-बक्सर जाने वाली बसों को मिलेगा नया रास्ता
Sasaram Bypass शुरू होने के बाद आरा, बक्सर और पटना की ओर जाने वाली बसों और अन्य वाहनों के लिए शहर के बाहर से गुजरने का विकल्प उपलब्ध होगा। इससे सासाराम शहर के अंदर बसों की आवाजाही कम होने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था से उन यात्रियों को भी फायदा मिल सकता है जो सासाराम शहर में प्रवेश किए बिना दूसरे शहरों की ओर जाना चाहते हैं। बाईपास का इस्तेमाल बढ़ने से शहर के मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक फ्लो को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
पूर्व में प्रकाशित विभागीय जानकारी के अनुसार बाईपास चालू होने पर बक्सर और आरा की ओर जाने वाले भारी वाहन तथा बसों को शहर के भीतर प्रवेश करने की जरूरत नहीं होगी।
Sasaram Bypass: 122.39 करोड़ की लागत से तैयार हुई परियोजना
Sasaram Bypass का निर्माण करीब 122.39 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह परियोजना सासाराम के पुराने जीटी रोड पर लगातार बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए तैयार की गई थी।
शहर के मुख्य मार्ग पर जिला मुख्यालय, अनुमंडल कार्यालय, सदर अस्पताल, रेलवे स्टेशन, नगर निगम कार्यालय और न्यायालय समेत कई महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। ऐसे में इस मार्ग पर स्थानीय यातायात के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों से आने वाले वाहनों का दबाव भी रहता है।
बाईपास के चालू होने के बाद बाहरी यातायात को अलग रास्ता मिलने से शहर के अंदर आने वाले वाहनों की संख्या कम होने की संभावना है। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
Sasaram Bypass: रेलवे ओवरब्रिज भी परियोजना का हिस्सा
Sasaram Bypass में रेलवे लाइन के ऊपर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी किया गया है। पूर्व की रिपोर्टों के अनुसार बेदा में बनाए गए रेलवे ओवरब्रिज की लंबाई करीब 1360 मीटर है।
बाईपास और आरओबी का निर्माण पूरा होने के बाद इस मार्ग से वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने का प्रयास किया गया है। निर्माण के दौरान आरओबी के एप्रोच रोड और अन्य जुड़े कार्यों को भी पूरा किया गया था।
इससे बाईपास के जरिए शहर के बाहर से गुजरने वाले वाहनों को रेलवे लाइन वाले हिस्से में भी सुगम कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
Sasaram Bypass: नीतीश कुमार ने किया था शिलान्यास, अब सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन
Sasaram Bypass की आधारभूत परियोजना का शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में किया गया था। अब परियोजना पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इसके उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होंगे।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 6 अक्टूबर के सासाराम दौरे को लेकर जिला प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। उनके दौरे के दौरान 550 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 176 योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
बाईपास का उद्घाटन सासाराम के यातायात व्यवस्था के लिहाज से इस दौरे का प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है।
Sasaram Bypass: शहर से बाहर निकलेगा ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा
Sasaram Bypass के शुरू होने के बाद सासाराम शहर के अंदर से गुजरने वाले बाहरी वाहनों की संख्या कम करने की कोशिश होगी। खासकर आरा और बक्सर की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के बाहर से वैकल्पिक मार्ग मिलने से मुख्य सड़क पर दबाव घट सकता है।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि बाईपास शुरू होने के बाद बाजार और प्रमुख चौक-चौराहों पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। साथ ही लंबी दूरी की बसों और दूसरे वाहनों के लिए यात्रा का रास्ता भी अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
फिलहाल बाईपास के उद्घाटन के बाद यातायात व्यवस्था में बदलाव किस तरह लागू किया जाएगा, यह प्रशासन और पथ निर्माण विभाग की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
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