Solapur Farmers Water Crisis: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के तुलशी गांव में सिंचाई के पानी की समस्या को लेकर किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से पानी का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने विरोध के तौर पर गांव में पोस्टर लगा दिया, जिस पर लिखा है- ‘गांव बिकाऊ है’। किसानों का कहना है कि बार-बार मांग और आश्वासन के बावजूद उन्हें सिंचाई के लिए स्थायी पानी नहीं मिल पाया है।
तुलशी गांव सीना-माढ़ा लिफ्ट सिंचाई योजना से करीब 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह योजना वर्ष 2000 में शुरू हुई थी, लेकिन इतने वर्षों के बाद भी तुलशी को इसका लाभ नहीं मिल सका। आसपास के कई गांवों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने के कारण किसान पानी वाली नकदी फसलें उगा पा रहे हैं, जबकि तुलशी के किसान काफी हद तक बारिश पर निर्भर हैं।
गांव के सरपंच शरद मोरे ने कहा कि ‘गांव बिकाऊ है’ का पोस्टर किसी वास्तविक बिक्री प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध है। उनके मुताबिक, बाहर से देखने पर यह संदेश भले ही अलग लगे, लेकिन ग्रामीणों के लिए यह लंबे समय से चले आ रहे संकट और नाराजगी को व्यक्त करने का तरीका है।
Solapur Farmers Water Crisis: बारिश की कमी से 2700 हेक्टेयर जमीन पर संकट
तुलशी में इस साल पानी का संकट और गंभीर हो गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, माढ़ा क्षेत्र के कई गांवों में करीब 45 दिनों से बारिश नहीं हुई है। तुलशी के जलाशयों में पानी बेहद कम रह गया है, जबकि कई कुएं और परकोलेशन झीलें भी सूख चुकी हैं। गांव में जुलाई से टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाए जाने की बात सामने आई है।
किसानों को सबसे ज्यादा चिंता खेती की जमीन को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर मानसून के बाद भी सिंचाई के लिए पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं हुई तो करीब 2,700 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित होकर बंजर होने के खतरे में आ सकती है। पानी की कमी का असर फसलों के साथ-साथ गांव की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
पानी की कमी के कारण किसानों को खेती जारी रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ किसानों ने फलों के बागों और नई खेती को लेकर भी नुकसान की स्थिति बताई है। ऐसे में ग्रामीण चाहते हैं कि सिर्फ टैंकरों के जरिए तत्काल राहत देने के बजाय सिंचाई के लिए स्थायी जल व्यवस्था विकसित की जाए।
Solapur Farmers Water Crisis: उपवास और विरोध के बाद प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
पानी की समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों ने गणेश चतुर्थी के दौरान अनिश्चितकालीन उपवास भी शुरू किया था। किसानों की ओर से तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखी गईं। विरोध के दौरान ग्रामीणों ने कड़े कदम उठाने और चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी भी दी थी।
मामला बढ़ने के बाद महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने ग्रामीणों से बातचीत की। बातचीत के बाद किसानों ने अपना विरोध प्रदर्शन फिलहाल वापस ले लिया। प्रशासन की ओर से समस्या के समाधान के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी गई है।
सोलापुर के जिलाधिकारी एस. कार्तिकेयन के मुताबिक, सिंचाई विभाग ने तुलशी गांव का हाइड्रोलॉजिकल सर्वे पूरा किया है। सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर राज्य सरकार को नहर नेटवर्क के लिए प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समाधान में तुलशी और आसपास के गांवों के जलस्रोतों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन और पंप आधारित व्यवस्था पर भी विचार किया गया है।
ग्रामीणों का ‘गांव बिकाऊ है’ अभियान इसी लंबे समय से चले आ रहे सिंचाई संकट की ओर प्रशासन और सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश है। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि सर्वे और प्रस्ताव की प्रक्रिया के बाद तुलशी को स्थायी सिंचाई सुविधा कब मिलती है।
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