UPI MDR Charge 2026 : क्या छोटे कारोबारियों और आमजन पर सीधा असर ?क्या अमेरिका के दबाव में फैसला, आरोपों में कितना दम ?
UPI MDR Charge 2026 : डिजिटल पेमेंट की दुनिया में UPI ने लेन-देन को जितना आसान बनाया है, अब उसी UPI को लेकर चार्ज की चर्चा ने दुकानदारों से लेकर आम उपभोक्ताओं तक टेंशन बढ़ा दी है। खासकर 2 हजार रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट की खबरों ने बाजार में नई बहस छेड़ दी है। दरअसल नया MDR 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा P2M UPI भुगतानों पर लागू होगा। 2,000 रूपये से ऊपर के भुगतान पर 0.4% MDR है, जबकि 75,000 रूपये या उससे अधिक के लेन-देन पर अधिकतम 300 रूपये की सीमा है। P2P भुगतान और 2,000 रूपये तक के व्यापारी भुगतान मुफ्त रहेंगे, छोटे कारोबारियों के लिए भी शून्य-MDR प्रावधान है। लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद जहां राजनीत आरोप प्रत्यारोप हैं। विपक्षी दलों ने फैसले को जनविरोधी करार देते हुए इसे मोदी टैक्स नाम दिया है। आरोप है कि सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों (जैसे गूगल और वॉलमार्ट) को फायदा पहुंचाने के लिए यह कदम उठा रही है और उन्होंने इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।
UPI MDR Charge 2026 : भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं पर कोई नया टैक्स या अतिरिक्त प्रभार नहीं लगाया गया है और यह केवल बड़े व्यावसायिक लेन-देन से जुड़ा एमडीआर नियम है सरकार और एनपीसीआई (NPCI) का कहना है कि 95% से अधिक यूपीआई लेनदेन 2,000 रुपये से कम के होते हैं, इसलिए छोटे कारोबारियों और आम जनता पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।अब यूपीआई से 2,000 रुपये से बड़े भुगतानों पर शुल्क, दुकानदारों और लोगों में चिंता और भ्रम, क्या बढ़ेगी आम लोगों की परेशानी और सरकार और विपक्ष में राजनीतिक बयानबाजी है। सवाल ये है कि अगर दुकानदार से शुल्क लिया गया, तो क्या उसका असर ग्राहक की जेब पर भी पड़ेगा? क्या डिजिटल पेमेंट की रफ्तार पर ब्रेक लगेगा? और क्या कैशलेस इकोनॉमी के सामने फिर नकद भुगतान की वापसी का खतरा खड़ा हो सकता है? इन्ही सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे, लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।।
UPI MDR Charge 2026 : यूपीआई से पेमेंट करने वालों के लिए बड़ी खबर है, डिजिटल भुगतान की दुनिया में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है, 15 अक्टूबर से चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाया जाएगा। UPI से 2,000 रूपये से ज्यादा पेमेंट पर 0.4 % चार्ज लगेगा। यह शुल्क ग्राहकों से नहीं बिजनसेमैन से लिया जाएगा। दरअसल यह शुल्क हर आम आदमी या हर लेनदेन पर नहीं लगेगा। यूपीआई के जरिये होने वाले कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शन का 95 फीसदी हिस्सा 2000 रुपये से कम का होता है। इन सभी छोटे भुगतानों पर एमडीआर पूरी तरह शून्य रहेगा। जो ग्राहक या व्यापारी 2000 रुपये से अधिक का भुगतान करते हैं, उन पर मानक रूप से 0.4 % का एमडीआर तय किया गया है। यदि भुगतान 75000 रुपये या उससे अधिक का है, तो शुल्क को अधिकतम 300 पर सीमित रखा गया है। लेकिन इसको लेकर दुकानदारों और व्यापारियों का इस पर क्या कहना है पहले वो सुन लेते हैं। जिन्होंने फैसले का विरोध भी शुरू कर दिया है।
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