भोपाल। MP Gen-Z Politics के बीच देशभर में युवाओं से जुड़े आंदोलनों और बदलते डिजिटल ट्रेंड्स के बाद मध्यप्रदेश में भी राजनीतिक दलों का ध्यान युवा वर्ग की ओर बढ़ा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही युवाओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए अलग-अलग कार्यक्रमों और संवाद अभियानों पर जोर दे रहे हैं। रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, सरकारी भर्तियां, डिजिटल अवसर, स्टार्टअप और राजनीति में युवाओं की भागीदारी जैसे मुद्दे इस संवाद के केंद्र में हैं।
MP Gen-Z Politics: युवाओं से सीधे संवाद पर बढ़ा जोर
MP Gen-Z Politics के तहत राजनीतिक दल अब केवल पारंपरिक जनसभाओं तक सीमित रहने के बजाय स्कूल-कॉलेज, छात्रावास, विश्वविद्यालय और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। युवाओं की बदलती पसंद और सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता को देखते हुए राजनीतिक संगठनों ने संवाद के नए तरीके अपनाने शुरू किए हैं।
कांग्रेस की ओर से ‘छात्रों की गूंज’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों से संवाद की कोशिश की जा रही है। इन कार्यक्रमों में छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की बात सामने आई है। दूसरी ओर भाजपा और उससे जुड़े संगठन भी विश्वविद्यालयों और स्थानीय स्तर पर युवाओं तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
MP Gen-Z Politics: 17 से 19 सितंबर तक कई बड़े युवा कार्यक्रम
MP Gen-Z Politics में मध्यप्रदेश के लिए 17, 18 और 19 सितंबर की तारीखें खास मानी जा रही हैं। इन दिनों प्रदेश में युवाओं से संवाद से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम युवाओं के साथ संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद के दौरान युवाओं से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से युवा और विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं।
इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर भाजपा का सेवा संकल्प अभियान भी शुरू होने जा रहा है। इस अभियान में पार्टी स्तर पर सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
MP Gen-Z Politics: BJP की रील्स और सोशल मीडिया रणनीति
MP Gen-Z Politics में भाजपा ने सोशल मीडिया को युवा संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया है। दिए गए विवरण के मुताबिक सेवा संकल्प अभियान के दौरान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और दैनिक रील्स के माध्यम से सरकारी नीतियों और योजनाओं की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने की योजना है।
इसके लिए भाजपा के शक्ति केंद्रों से जुड़े कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। पार्टी की संगठनात्मक व्यवस्था के अनुसार करीब चार से पांच मतदान केंद्रों को मिलाकर एक शक्ति केंद्र बनाया जाता है। स्क्रिप्ट में प्रदेश में करीब 12 हजार शक्ति केंद्र होने और प्रत्येक शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील्स बनाने का लक्ष्य दिए जाने का उल्लेख है।
इस रणनीति का उद्देश्य युवाओं तक राजनीतिक और सरकारी गतिविधियों की जानकारी ऐसे डिजिटल माध्यम से पहुंचाना है, जिनका युवा वर्ग नियमित रूप से इस्तेमाल करता है।
MP Gen-Z Politics: स्कूल-कॉलेज और हॉस्टल तक पहुंचेगा संवाद
MP Gen-Z Politics के तहत भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर युवाओं के प्रत्यक्ष संवाद पर भी है। इसके लिए स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों तक पहुंच बनाने की योजना पर जोर दिया जा रहा है।
युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और करियर से जुड़े सवाल लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया, निजी क्षेत्र में अवसर, स्टार्टअप और डिजिटल प्लेटफॉर्म से रोजगार जैसे विषय युवा संवाद का हिस्सा बन सकते हैं।
भाजपा की ओर से सरकार के मंत्रियों, पार्टी विधायकों और सांसदों को युवा संवाद की जिम्मेदारी देने की बात कही गई है। इससे स्थानीय स्तर पर युवाओं की समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास किया जाएगा।
MP Gen-Z Politics: 31.4% युवा आबादी पर राजनीतिक दलों की नजर
MP Gen-Z Politics का एक बड़ा आधार प्रदेश की युवा आबादी है। स्क्रिप्ट में मध्यप्रदेश में करीब 31.4 प्रतिशत युवा आबादी का उल्लेख किया गया है। 2023 के विधानसभा चुनाव के संदर्भ में 18 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 1.63 करोड़ युवा होने और इनमें लगभग 22 लाख पहली बार मतदान करने वाले युवा होने का आंकड़ा दिया गया है।
पहली बार मतदान करने वाला वर्ग राजनीतिक दलों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मतदाता लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बना रह सकता है। हालांकि किसी भी चुनाव में किसी वर्ग का रुझान किस दल की ओर रहेगा, यह अलग-अलग मुद्दों, उम्मीदवारों, स्थानीय परिस्थितियों और मतदाताओं के व्यक्तिगत निर्णय पर निर्भर करता है।
MP Gen-Z Politics: Gen-Z के साथ Gen-Alpha पर भी नजर
MP Gen-Z Politics अब केवल Gen-Z तक सीमित नहीं है। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर Gen-Alpha पर भी है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म और इंटरनेट के माहौल में बड़ी हो रही पीढ़ी है। हालांकि इस वर्ग का बड़ा हिस्सा अभी मतदान की उम्र में नहीं है, लेकिन भविष्य के मतदाता और राजनीतिक संवाद के दर्शक के रूप में इसे लेकर रणनीति बनती दिखाई दे रही है।
युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने की यह कवायद आने वाले समय में रोजगार, शिक्षा, तकनीक, कौशल विकास, स्टार्टअप और डिजिटल अवसर जैसे मुद्दों को और प्रमुख बना सकती है। मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस की युवा संपर्क रणनीति किस तरह आगे बढ़ती है, यह आने वाले महीनों में राजनीतिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
Read more : Pandokhar Dham vs Bageshwar Dham : अखाड़े में संत, दावों की कथा अनंत,एमपी के पर्ची वाले बाबाओं में ठनी


