Kidney Transplant : अमेरिका में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि सामने आई है, जिसने मेडिकल साइंस की नई संभावनाओं को सामने ला दिया है। एक मरीज के शरीर में जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर की किडनी का ट्रांसप्लांट किया गया, जिसने करीब 271 दिनों तक काम किया। इस दौरान मरीज को डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी। बाद में जब सूअर की किडनी ने काम करना बंद किया, तब तक मरीज के लिए इंसानी डोनर किडनी उपलब्ध हो चुकी थी और उसका सफल ट्रांसप्लांट कर दिया गया।हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल से जुड़े चिकित्सकों की इस उपलब्धि को ट्रांसप्लांट मेडिसिन में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मामले से जुड़े अध्ययन को मेडिकल जर्नल The Lancet में भी प्रकाशित किया गया है।
Kidney Transplant : जनवरी 2025 में हुआ था सूअर की किडनी का ट्रांसप्लांट
रिपोर्ट के अनुसार टिम एंड्रयूज़ एंड-स्टेज किडनी फेल्योर से जूझ रहे थे। उनकी स्थिति ऐसी थी कि उन्हें जीवन बनाए रखने के लिए डायलिसिस पर निर्भर रहना पड़ रहा था। ऐसे में जनवरी 2025 में डॉक्टरों ने उन्हें जेनेटिकली एडिट की गई सूअर की किडनी ट्रांसप्लांट की।ट्रांसप्लांट के बाद यह किडनी मरीज के शरीर में काम करने लगी और करीब 271 दिनों तक उसने किडनी के महत्वपूर्ण कार्यों को संभाला। इस अवधि में टिम एंड्रयूज़ को डायलिसिस की आवश्यकता नहीं पड़ी। बाद में सूअर की किडनी ने काम करना बंद कर दिया, लेकिन तब तक मरीज को इंसानी डोनर किडनी मिल चुकी थी।
Kidney Transplant : 271 दिन तक डायलिसिस से मिली राहत
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मरीज करीब नौ महीने तक सूअर की ट्रांसप्लांट की गई किडनी के सहारे बिना डायलिसिस के रहा। डॉक्टरों के लिए यह उपलब्धि इसलिए अहम है क्योंकि गंभीर किडनी फेल्योर वाले मरीजों को उपयुक्त मानव डोनर मिलने तक लंबे समय तक डायलिसिस पर निर्भर रहना पड़ सकता है।हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, इसे दुनिया का पहला ऐसा मामला बताया जा रहा है जिसमें किसी मरीज ने जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर की किडनी के सहारे लंबा समय बिताने के बाद मानव डोनर किडनी का सफल ट्रांसप्लांट कराया।
Kidney Transplant : अंगों की कमी के बीच नई उम्मीद
दुनिया के कई देशों में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों की संख्या उपलब्ध मानव डोनर अंगों से कहीं ज्यादा है। ऐसे में डॉक्टर लंबे समय से इस बात पर शोध कर रहे हैं कि क्या जानवरों के अंगों को इंसानों में ट्रांसप्लांट करके इस कमी को कम किया जा सकता है।इसी तकनीक को जेनोट्रांसप्लांटेशन या ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है। इसमें जानवर के अंग को इंसानी शरीर के अनुकूल बनाने के लिए जेनेटिक बदलाव किए जाते हैं।अध्ययन से जुड़े डॉ. लियोनार्डो रिएला के अनुसार, भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल उन मरीजों के लिए एक तरह के ‘ब्रिज’ के रूप में किया जा सकता है, जो मानव डोनर का इंतजार कर रहे हैं। यानी मरीज को डोनर मिलने तक अस्थायी रूप से जानवर का अंग सहारा दे सकता है।
Kidney Transplant : आखिर क्यों फेल हुई सूअर की किडनी?
डॉक्टरों के मुताबिक शुरुआत में ट्रांसप्लांट की गई सूअर की किडनी ने अच्छी तरह काम किया। कई महीनों तक इसके कामकाज को सामान्य माना गया। हालांकि, करीब छह महीने बाद किडनी की रक्त वाहिकाओं में नुकसान के संकेत दिखाई देने लगे।समय बीतने के साथ रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्या बढ़ती गई। इसका असर किडनी की कार्यक्षमता पर पड़ा और धीरे-धीरे अंग ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद चिकित्सकों को ट्रांसप्लांट की गई सूअर की किडनी को निकालना पड़ा।
Kidney Transplant : सूअर की किडनी के बाद मिली इंसानी किडनी
महत्वपूर्ण बात यह रही कि सूअर की किडनी के काम करना बंद करने तक मरीज को मानव डोनर किडनी मिल चुकी थी। इसके बाद डॉक्टरों ने इंसानी किडनी का ट्रांसप्लांट किया और मरीज को आगे का इलाज उपलब्ध कराया।इस पूरे मामले ने यह संभावना मजबूत की है कि भविष्य में जेनेटिकली मॉडिफाइड जानवरों के अंग उन मरीजों के लिए अस्थायी जीवनरक्षक विकल्प बन सकते हैं, जिन्हें तत्काल मानव डोनर उपलब्ध नहीं हो पाता।
Kidney Transplant : ट्रांसप्लांट मेडिसिन में बड़ी उपलब्धि
हालांकि सूअर की किडनी को अभी इंसानी किडनी का स्थायी विकल्प नहीं माना जा सकता, लेकिन 271 दिनों तक उसका काम करना मेडिकल रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस प्रयोग से यह संकेत मिला है कि जेनेटिक एडिटिंग के जरिए जानवरों के अंगों को इंसानी शरीर में ज्यादा समय तक काम करने योग्य बनाने की दिशा में प्रगति हो रही है।फिलहाल इस तकनीक पर और शोध की जरूरत है। इसके बावजूद टिम एंड्रयूज़ का मामला अंगों की भारी कमी से जूझ रही ट्रांसप्लांट व्यवस्था के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। आने वाले समय में यदि इस तकनीक को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से विकसित किया जाता है, तो मानव डोनर अंगों की कमी को दूर करने में इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।


