Vishwanath And Sons Review : सूर्या और ममिता बैजू की फिल्म विश्वनाथ एंड संस एक पारिवारिक ड्रामा है, जिसमें रिश्तों, प्यार, परिवार की उम्मीदों और जिंदगी में पैसों से आगे बढ़कर चीजों को महत्व देने की बात दिखाई गई है। फिल्म का निर्देशन वेंकी अटलूरी ने किया है। कहानी में रोमांस, कॉमेडी और पारिवारिक भावनाओं को साथ लाने की कोशिश की गई है। हालांकि फिल्म का पहला हिस्सा काफी मनोरंजक है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी की रफ्तार कुछ धीमी पड़ जाती है।

Vishwanath And Sons Review : विश्वनाथ एंड संस की कहानी क्या है?
फिल्म में सूर्या ने संजय विश्वनाथ का किरदार निभाया है। संजय 40 की उम्र पार कर चुका एक सफल कारोबारी है, लेकिन शादी करने में उसकी कोई खास दिलचस्पी नहीं है। आर्थिक रूप से बेहद सफल होने के बावजूद उसकी जिंदगी सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है। उसे पिस्टल शूटिंग का भी शौक है और वह ओलंपिक पदक विजेता रह चुका है।संजय अपनी मां निर्मला देवी के साथ रहता है। मां चाहती हैं कि उनका बेटा शादी करके अपना परिवार बसाए, इसलिए वह लगातार उसके लिए रिश्ते तलाशती रहती हैं। संजय हर बार शादी से बच निकलता है। लेकिन जब निर्मला देवी की हार्ट सर्जरी होती है, तो परिवार और विरासत को आगे बढ़ाने को लेकर उनकी चिंता सामने आती है।
Vishwanath And Sons Review : संजय की जिंदगी में कैसे आती है मड्डी?
परिवार की कोशिशों के बीच संजय की मुलाकात सैन फ्रांसिस्को में रहने वाली एक डॉक्टर से होती है। दोनों के बीच बातचीत बढ़ती है और ऐसा लगता है कि शायद संजय की जिंदगी में प्यार की शुरुआत हो रही है। लेकिन कहानी अचानक एक नया मोड़ लेती है।कुछ समय बाद संजय चेन्नई एयरपोर्ट पर एक बच्चे के साथ दिखाई देता है और उस बच्चे को अपना बेटा बताता है। इसके बाद बच्चे की तबीयत खराब होने पर 22 वर्षीय मड्डी यानी मडनकामेश्वरी की कहानी में एंट्री होती है। मड्डी और संजय के बीच का रिश्ता फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाता है और यहीं से कई सवाल खड़े होते हैं।
Vishwanath And Sons Review : पहले हाफ में कॉमेडी और रिश्तों का अच्छा मेल
विश्वनाथ एंड संस रिव्यू की बात करें तो फिल्म का पहला भाग इसकी सबसे मजबूत कड़ी है। संजय का व्यक्तित्व, उसकी मां की प्रतिक्रियाएं और मड्डी के साथ उसके मजेदार संवाद कहानी को हल्का और मनोरंजक बनाए रखते हैं।संजय और मड्डी के बीच की बातचीत में सहजता दिखाई देती है। दोनों कलाकारों की स्क्रीन केमिस्ट्री भी फिल्म को मजबूती देती है। परिवार से जुड़े दृश्य और बच्चे की एंट्री के बाद आने वाले कई संवाद कहानी में मनोरंजन बढ़ाते हैं। यही वजह है कि फिल्म का पहला भाग दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब रहता है।
Vishwanath And Sons Review : दूसरे हाफ में कमजोर पड़ जाती है कहानी
फिल्म का दूसरा भाग पहले हिस्से की तुलना में उतना प्रभावी नहीं है। कहानी धीरे-धीरे ज्यादा भावुक हो जाती है और कई जगह घटनाक्रम अनुमान के मुताबिक आगे बढ़ता हुआ महसूस होता है।दूसरे हाफ में कॉमेडी का प्रभाव कम हो जाता है और पारिवारिक ड्रामा जरूरत से ज्यादा खिंचा हुआ लगता है। पटकथा को यहां ज्यादा कसावट की जरूरत थी। अगर दूसरे हिस्से में कहानी की रफ्तार और भावनात्मक दृश्यों के बीच बेहतर संतुलन बनाया जाता, तो फिल्म का प्रभाव और मजबूत हो सकता था।
Vishwanath And Sons Review : उम्र के अंतर और सरोगेसी को अलग नजरिए से दिखाया
निर्देशक वेंकी अटलूरी की एक अच्छी बात यह है कि उन्होंने संजय और मड्डी के बीच उम्र के अंतर को फिल्म का सबसे बड़ा विवाद बनाने की कोशिश नहीं की। इसी तरह सरोगेसी को भी कहानी में एक अलग पहलू के तौर पर रखा गया है।हालांकि फिल्म में एक पुरुष के एक से अधिक विवाह को जिस तरह सामान्य रूप में दिखाने की कोशिश की गई है, वह हिस्सा सवाल खड़े करता है। कहानी में इस उप-कथानक की जरूरत को लेकर भी दर्शकों की अलग राय हो सकती है।
Vishwanath And Sons Review : किरदारों को दिया गया है मजबूत आधार
फिल्म के तीन प्रमुख किरदारों को निर्देशक ने अलग-अलग खूबियों के साथ पेश किया है। मड्डी को सिर्फ कहानी का हिस्सा बनाकर नहीं रखा गया, बल्कि उसके किरदार में आत्मविश्वास और अपनी सोच दिखाई गई है। संजय भी कम उम्र की महिला की ओर से मिलने वाले प्रेम को लेकर सहज नहीं है।वहीं निर्मला देवी का किरदार बदलते समय और समाज की वास्तविकताओं को समझने वाली मां के रूप में नजर आता है। फिल्म में किसानों के महत्व, माता-पिता के सम्मान और जिंदगी में सिर्फ पैसे को लक्ष्य न बनाने जैसे सामाजिक संदेश भी शामिल किए गए हैं।
Vishwanath And Sons Review : सूर्या ने संजय के किरदार में छोड़ी छाप
विश्वनाथ एंड संस रिव्यू में सूर्या की एक्टिंग फिल्म की बड़ी ताकत के तौर पर सामने आती है। अभिनेता ने संजय के किरदार को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाने के बजाय सहज अंदाज में निभाया है।वह एक सफल कारोबारी, बेटे और पिता के अलग-अलग पहलुओं के बीच संतुलन बनाने में सफल दिखाई देते हैं। उनकी कॉमेडी टाइमिंग भी कई दृश्यों को बेहतर बनाती है। संजय के किरदार में उनका अनुभव और परिपक्वता साफ नजर आती है।
Vishwanath And Sons Review : ममिता बैजू और राधिका सरथकुमार का अभिनय
ममिता बैजू ने मड्डी के किरदार में अपनी उम्र के अनुरूप ऊर्जा और सहजता दिखाई है। वह कई दृश्यों में आत्मविश्वासी होने के साथ-साथ भावुक और मजेदार भी नजर आती हैं। सूर्या के साथ उनके दृश्य फिल्म के मनोरंजक हिस्सों में शामिल हैं।वहीं राधिका सरथकुमार ने निर्मला देवी के किरदार को प्रभावी ढंग से निभाया है। उनके अभिनय में एक मां की चिंता, भावनाएं और बदलते समय को स्वीकार करने की समझ दिखाई देती है।
Vishwanath And Sons Review : कैसी है विश्वनाथ एंड संस?
कुल मिलाकर विश्वनाथ एंड संस रिश्तों और परिवार को केंद्र में रखकर बनाई गई एक ईमानदार कोशिश है। फिल्म का पहला हाफ मनोरंजन, कॉमेडी और पारिवारिक भावनाओं के कारण मजबूत है, जबकि दूसरा हाफ कुछ जगहों पर जरूरत से ज्यादा लंबा और अनुमानित लगता है।सूर्या, ममिता बैजू और राधिका सरथकुमार का अभिनय फिल्म को संभालता है। अगर आपको पारिवारिक कहानियां, हल्का-फुल्का मनोरंजन और रिश्तों पर आधारित फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म आपको पसंद आ सकती है। हालांकि इसे पूरी तरह बेहतरीन फिल्म कहना मुश्किल होगा, क्योंकि कहानी का दूसरा हिस्सा पहले भाग जैसी पकड़ नहीं बना पाता।

