Datia Bypoll : दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी का चुनावी अभियान अब पूरी रफ्तार पकड़ने की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों के विरोध और बवाल से पार्टी के लिए असहज स्थिति बन गई थी। हालांकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल से मुलाकात के बाद पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के तेवर नरम पड़ गए हैं।

उन्होंने संगठन के फैसले को स्वीकार करते हुए भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में चुनाव प्रचार और नामांकन में शामिल होने का ऐलान किया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थक बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा जो असहज स्थिति निर्मित की गई उस पर बीजेपी हाईकमान ने भी संज्ञान लिया है, खबर है हाईकमान ने नरोत्तम मिश्रा को दिल्ली तलब किया है। ये भी खबर है कि अब नरोत्तम मिश्रा दिल्ली रवाना हो गए हैं. जानकारी के मुताबिक रविवार की सुबह नरोत्तम मिश्रा ने पहली फ्लाइट से दिल्ली के लिए उड़ान भरी है।

Datia Bypoll : दतिया में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने संभाला मोर्चा
Datia Bypoll : इसी बीच पार्टी ने चुनावी अभियान को और धार देने के लिए उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को दतिया भेजा, जहां उन्होंने आशुतोष तिवारी के साथ विश्व प्रसिद्ध श्री पीतांबरा पीठ में मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना कर विजय का आशीर्वाद लिया।

Datia Bypoll : पूजा-अर्चना के बाद डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा दतिया के रतन होटल में आयोजित भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए। सम्मेलन में सांसद संध्या राय, विधायक प्रदीप अग्रवाल, पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ने का संदेश दिया।
Datia Bypoll : भाजपा नेतृत्व का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि संगठन की एकजुटता और राजनीतिक साख की भी परीक्षा है। यही वजह है कि वरिष्ठ नेताओं के लगातार दौरे और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद के जरिए चुनावी माहौल को भाजपा के पक्ष में करने की कोशिश तेज कर दी गई है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को आने वाले परिणाम पर अब पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।
Datia Bypoll : संपादकीय नजरिया
दतिया उपचुनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीति में व्यक्तिगत कद और संगठनात्मक अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना निश्चित रूप से उनके समर्थकों के लिए अप्रत्याशित रहा, लेकिन उसके बाद जिस तरह उन्होंने पार्टी नेतृत्व से संवाद किया और अंततः संगठन के निर्णय के साथ खड़े होने का संदेश दिया, वह भाजपा की कार्यशैली के अनुरूप माना जा सकता है।
दूसरी ओर, समर्थकों की नाराजगी यह भी संकेत देती है कि बड़े नेताओं के फैसलों का स्थानीय कार्यकर्ताओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अब नरोत्तम मिश्रा के सामने चुनौती केवल भाजपा प्रत्याशी को जिताने की नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक अनुभव और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को भी साबित करने की है। दतिया का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि भाजपा अपने भीतर के मतभेदों को कितनी प्रभावी ढंग से अवसर में बदल पाती है।

