Orphan Siblings : माता-पिता के निधन के बाद संघर्षमय जिंदगी, अब सिर से छिन गई छत
Orphan Siblings : झारखंड के हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड स्थित फुसरी गांव में रहने वाले दो अनाथ भाई-बहन की जिंदगी लगातार मुश्किलों से गुजर रही है।बचपन में माता-पिता को खोने के बाद किसी तरह जीवन यापन कर रहे इस परिवार पर अब लगातार हो रही बारिश ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। तेज बारिश के कारण उनका कच्चा मकान ढह गया, जिससे अब उनके सिर पर छत भी नहीं बची है। ग्रामीणों के सहयोग से फिलहाल दोनों भाई-बहन अस्थायी रूप से रह रहे हैं, जबकि सरकारी सहायता का इंतजार अब भी जारी है। जानकारी के अनुसार, करीब तीन-चार वर्ष पहले सड़क हादसे में उनकी मां की मौत हो गई थी। कुछ समय बाद आग लगने की एक घटना में पिता का भी निधन हो गया। माता-पिता के जाने के बाद सुनील तिर्की, उनकी बहन सुमन तिर्की और एक अन्य भाई पूरी तरह अनाथ हो गए। आर्थिक तंगी के चलते उनकी पढ़ाई भी बीच में ही छूट गई।

Orphan Siblings : ग्रामीणों ने बढ़ाया मदद का हाथ, प्रशासन से आवास और राहत की मांग
Orphan Siblings : सुनील तिर्की ने बताया कि परिवार का एकमात्र सहारा उनका कच्चा मकान था, लेकिन लगातार बारिश के चलते वह भी ढह गया। अब गांव के लोगों की मदद से भोजन और रहने की व्यवस्था हो रही है। उनकी बहन सुमन तिर्की दूसरे के घरों में काम करके परिवार का खर्च चलाने में सहयोग करती हैं, जबकि एक भाई रोजगार की तलाश में बाहर गया हुआ है। सुमन तिर्की ने कहा कि माता-पिता के निधन के बाद उनका जीवन पूरी तरह संघर्षों से घिर गया है। मकान गिरने के बाद उन्हें दूसरे के घर में शरण लेनी पड़ रही है। उन्होंने जिला प्रशासन से पक्का आवास, आर्थिक सहायता और रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की है।
Orphan Siblings : ग्रामीण बंधन तिर्की ने बताया कि तेज बारिश के दौरान जर्जर मकान अचानक भरभराकर गिर गया। सौभाग्य से दोनों भाई-बहन समय रहते बाहर निकल गए और उनकी जान बच गई। फिलहाल गांव के लोग ही उनकी हर संभव मदद कर रहे हैं।वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता रामा सोनी ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि अनाथ होने के बावजूद इन बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उपायुक्त को जानकारी दे दी गई है और जल्द राहत उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है। उन्होंने प्रशासन से प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य आवासीय योजना के तहत पक्का घर, आर्थिक सहायता और रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि आखिर इन अनाथ भाई-बहन को सरकारी सहायता और स्थायी आवास कब तक मिल पाता है।

