Ayodhya Ram Mandir Donation Investigation : इस्तीफा क्या, बड़े आरोपियों को बचाने की कोशिश ?राम नाम की लूट, जांच के घेरे में और कौन-कौन ?
Ayodhya Ram Mandir Donation Investigation : अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में जांच तेज है, कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा भी दे दिया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित है या जिम्मेदारी की पूरी श्रृंखला की भी पड़ताल होगी ? अब चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की अगली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। लेकिन इस सबके बीच सवाल जांच और चढ़ावे की लूट में शामिल अन्य लोगों पर उठ रहे हैं। दावा ये किया जा रहा है कि एसआईटी की जांच में छोटी मछलियों को फंसा दिया गया है जबकि ट्रस्ट से जुड़े कई बड़े चेहरों को अब भी बेनकाब होना बाकी है। आरोपों की सुई सीधे तौर पर इस्तीफा दे चुके या यूं कहें कि दबाव में लिये गए इस्तीफे के बाद चंपत राय पर धूम गई है।अब चढ़ावा चोरी के मामले में भले ही चंपत राय सवालों के घेरे में लेकिन संघ से लेकर यूपी और केंद्र सरकार तक को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। ऐसे में जो विपक्ष द्वारा आरोप लगाये जा रहे हैं कि जांच केवल निचले स्तर तक सीमित है उसमें कितना दम है। सवाल ये कि क्या जो बड़े चेहरे इस चढ़ावा चोरी में शामिल हैं वो बेनकाब होंगे। और इस पूरे मामले में क्या ट्रस्ट के कर्ताधर्ता जिन पर पूरी जिम्मेदारी तय थी चंपत राय पर कोई कार्रवाई होगी ? इसी मुद्दे पर हम चर्चा करेंगे लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।

Ayodhya Ram Mandir Donation Investigation : अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की कार्रवाई के बाद कई सवाल लगातार उठ रहे हैं। एफआईआर दर्ज हुई, कई आरोपी गिरफ्तार हुए, लेकिन विपक्ष और संत समाज का एक वर्ग आरोप लगा रहा है कि जांच सिर्फ निचले स्तर तक सीमित रखी गई और बड़े पदों पर बैठे लोगों को जांच के दायरे से बाहर रखा गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जांच के दायरे से कौन बाहर है और क्यों ? दरअसल राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक की जांच में ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों पर कार्रवाई हुई है। कई आरोपियों की गिरफ्तारी और एफआईआर के बाद जांच आगे बढ़ रही है। लेकिन इस पूरे मामले में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। आरोपों में कहा जा रहा है कि यदि कथित गड़बड़ी लंबे समय से चल रही थी, तो केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। उनका तर्क है कि वित्तीय निगरानी, ऑडिट और प्रशासनिक जवाबदेही की भी जांच होनी चाहिए। अब भले ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया हो। लेकिन कुछ संतों और विपक्षी नेताओं ने आरोप है कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
Ayodhya Ram Mandir Donation Investigation : सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के अलावा निर्माण समिति के सहायक गोपाल राव को एसआईटी ने क्लीन चिट नहीं दी है। एसआईटी की विस्तृत जांच में इन सभी की भूमिका की जांच जारी है।प्राथमिक रिपोर्ट में इसका जिक्र भी है। विस्तृत जांच रिपोर्ट में इन पदाधिकारियों के बारे में स्पष्ट किया जाएगा कि इनकी भूमिका है या नहीं, या फिर ये लापरवाही के दोषी हैं। लेकिन अब देशभर की नजरें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर टिकी हुई हैं। क्योंकि मंदिर प्रबंधन से जुड़ा ऐसा कोई कार्य नहीं था जो चंपत राय की बिना जानकारी के होता रहा हो। 19 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक में चंपत राय को महासचिव नियुक्त किया गया था। तभी से वे राम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों की प्रमुख जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
Ayodhya Ram Mandir Donation Investigation : जांच एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल जिन लोगों के खिलाफ प्रत्यक्ष साक्ष्य मिले हैं, उन्हीं पर कार्रवाई की गई है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसे भी जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा। लेकिन विपक्ष का कहना है कि जो रामधन है उसका हिसाब जनता मांग रही है।विपक्षी नेताओं ने दोषियों को बचाने का आरोप लगाते हुए सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया। विपक्ष का कहना है कि लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है।हिसाब तो देना होगा। तो वहीं मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कह चुके हैं कि जांच के बाद दूध का दूध पानी का पानी होगा।
Ayodhya Ram Mandir Donation Investigation : मंदिर के भीतर हुई चढ़ावा और चंदा चोरी ने देशभर में सनसनी फैला दी है। राम मंदिर में नौकरी लगने के बाद कईयों की हैसियत 50 से लेकर 100 गुना तक बढ़ी है। इसी को एसआईटी ने आधार बनाकर तफ्तीश आगे बढ़ाई है।आरोपियों के अलावा ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भी संपत्तियां अचानक बढ़ी हैं। ये सभी जांच के दायरे में आ गए हैं। अब राम मंदिर जैसे संवेदनशील स्थान पर इतनी बड़ी घटना का होना सुरक्षा में बड़ी चूक है। एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा की खामियों का जिक्र किया है। साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट में अहम बदलाव की सिफारिश की है। सुरक्षा में लगे अधिकारियों से लेकर तमाम कर्मचारी बदले जाएंगे और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए कई और कदम उठाए जाएंगे। बहरहाल इस मामले में अभी जांच पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई लगातार जारी है, ऐसे में यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है। और कई ऐसे नामों का शिंकजा कसा जा सकता है जो संदेह के घेरे में हैं।।।

