TMC NCPI Merger : क्या टीएमसी-एनसीपीआई का विलय होगा, TMC ने विलय को बताया असंवैधानिक
TMC NCPI Merger : टीएमसी (TMC) के 20 बागी सांसदों का नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय एक रणनीतिक कदम है। इसके तहत दलबदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों ने विलय किया है और वे एनडीए (NDA) के साथ जाने की तैयारी में हैं। हालांकि, NCPI के संस्थापक का कहना है कि उन्हें इस विलय की कोई औपचारिक जानकारी नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल क्या ये विलय संवैधानिक रूप से सही है ? और बागी सांसदों का ncpi में ही विलय क्यों ? कैसे ncpi जीरो से देश की पांचवी सबसे बड़ी पार्टी सांसदों के लिहाज से बन गई है? क्या है इस मुद्दे के पूरे सियासी और कानूनी दाव पेंच..पर पढ़िए ये रिपोर्ट..

TMC NCPI Merger : बागियों का NCPI से हुआ मेल, संवैधानिक मर्यादाओं से खेल ?
राजनीति की अच्छी समझ रखने वाले किसी व्यक्ति के लिए भी ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) का नाम सुनना लगभग नामुमकिन है। अब यह लोकसभा की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बनने जा रही है। एक चौंकाने वाला घटनाक्रम तब सामने आया जब (TMC) के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सूचित किया कि उनके समूह का विलय NCPI के साथ हो गया है। यह पश्चिम बंगाल के हावड़ा में रजिस्टर्ड है और जिसने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था। बागी सांसदों ने कहा कि वे एनसीपीआई और BJP के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि अपने अधिकारों को बचाने के लिए, ‘’राजनीतिक दल बदलने वालों को नकारें’’ का नारा देने वाली NCPI ने ऐसे ही बागियों को स्वीकारा है |
TMC NCPI Merger : क्या है NCPI के जीरो से संसद तक का सफर ?
इस विलय से यह कम जानी-पहचानी पार्टी सत्ताधारी गठबंधन में BJP (240) TDP (16) JDU (12) से आगे 20 लोकसभा सदस्य वाला दूसरा सबसे बड़ा गुट बन जाएगी। tmc के बागी सासंदों ने लोकसभा स्पीकर से उन्हें ट्रेज़री बेंच (सत्ता पक्ष की सीटों) पर जगह देने का अनुरोध किया, क्योंकि अब तक वे संसद में TMC के सदस्य के रूप में विपक्षी दलों के साथ बैठते थे। सुदीप बंद्योपाध्याय छह बार के सांसद होने के नाते इस अलग हुए गुट के सबसे अनुभवी सदस्य हैं। उन्होंने असली TMC होने का दावा करने के लिए चुनाव आयोग जाने की संभावना भी खुली रखी है।

TMC NCPI Merger : अब जिस NCPI की चर्चा जोरों पर है उसके बारे में भीं जान लेते है…
TMC NCPI Merger : कौन है NCPI
• NCPI चुनाव आयोग के पास रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है
• यह उन 2,049 पार्टियों में से एक है जो मान्यता प्राप्त करने के लिए ज़रूरी
• चुनावी प्रदर्शन के स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं
• NCPI को जनवरी 2023 में भारत के चुनाव आयोग (ECI) के साथ रजिस्टर किया गया था
• यह पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में रजिस्टर्ड है, लेकिन त्रिपुरा में राजनीतिक मौजूदगी है
• श्वेली कुंडू इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष है, और आधिकारिक चुनाव चिह्न सात स्ट्रोक वाला इंक पेन का निब है
• पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में अपनी शुरुआत की
• पार्टी ने कुछ चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे, लेकिन बहुत कम वोट मिले
• यह चुनाव पर कोई खास असर नहीं डाल पाई
बहरहाल अब सवाल इस बात का है कि …. टीएमसी-एनसीपीआई विलय के बाद क्या होगा ?
TMC NCPI Merger : टीएमसी-एनसीपीआई विलय के बाद क्या होगा ?
• यदि लोकसभा स्पीकर इस विलय को मान्यता दे देंगे तो NCPI के पास 20 सांसद हो जाएंगे
• यह BJP, कांग्रेस (98), SP (37) और DMK (22) के बाद पांचवां सबसे बड़ा समूह होगा
• NCPI के समर्थन से NDA की संख्या 361 (लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा) के करीब पहुंचकर
• 313 हो जाएगी, BJP यह आंकड़ा हासिल करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है
• ‘सुपर मेजॉरिटी’ न होने के कारण महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन का बिल गिर गया था
TMC NCPI Merger : स्पीकर ओम बिरला के साथ बैठक के बाद, सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि यह विलय दलबदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) की ज़रूरतों के अनुसार किया गया है। यह कानून पार्टी में विभाजन को मान्यता नहीं देता है। एक ऐसा बिंदु जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में शिवसेना में विभाजन के मामले में भी जोर दिया था। हालांकि एक पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों के दूसरी पार्टी में विलय के लिए अपवाद की अनुमति देता है। 20 सांसदों के साथ, TMC के बागी गुट के पास ज़रूरी दो-तिहाई संख्या से एक सांसद ज़्यादा है ऐसे में जब तक लोकसभा स्पीकर के जवाब तक मामले में पेंच फंसा रहेगा | उधर इस पूरे मामले के सामने आने के बाद प्रतिक्रियाओं ने भी जोर पकड़ा है |
बहरहाल बागी गुट के नेताओं ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर अलग मान्यता और ‘असली टीएमसी’ होने का दावा पेश किया है। उधर अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को पत्र लिखकर इस विलय को असंवैधानिक बताया है। उनका तर्क है कि संविधान और 10वीं अनुसूची के तहत मूल पार्टी की सहमति के बिना अलग गुट बनाना गैर-कानूनी है। ऐसे में अब लोकसभा अध्यक्ष अब दोनों पक्षों की दलीलें और कानून के जानकारों की राय के आधार पर तय करेंगे कि इस विलय और अलग गुट को मान्यता दी जाए या नहीं। और फैसले आने तक सभी की नजर इस मुद्दे पर टिकी है |

