TMC Congress Alliance : अल्पसंख्यक मतों का गणित और लेफ्ट का पेच, क्या सब कुछ सेट ?TMC में टूट जारी, आगे की क्या है तैयारी ?
TMC Congress Alliance : ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कांग्रेस के साथ जाने की अटकलें और गठबंधन की संभावनाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व विशेषकर सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को उनके पुराने मूल में लौटने यानी कांग्रेस में वापस आने का विकल्प दिया है… हाल ही में तृणमूल कांग्रेस में भारी आंतरिक असंतोष और बगावत देखने को मिली है,, पार्टी के 58 विधायक, और करीब 20 सांसदों के बागी रुख के कारण, ममता बनर्जी को अपनी पार्टी को एकजुट रखने और अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता महसूस हो रही है..उधर राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के लिए कांग्रेस के लिए भी ये बड़ी आवश्यकता है और इसलिए कांग्रेस ममता को साथ लाने के पक्ष में दिखाई दे रही है ? लेकिन इन सब के बीच में बड़ा सवाल यही है कि क्या जरूरी और मजबूरी के बीच tmc और कांग्रेस का विलय होगा ? इसी पर करेंगे चर्चा उससे पहले देखिये ये रिपोर्ट
TMC Congress Alliance : भाजपा की भगवा आंधी में क्षत्रपों की बुरी तरह से हार के बाद देश की राजनीति में विपक्ष एक नई रणनीति पर काम कर रहा है। अगर यह रणनीति काम कर गई तो इससे देश की सियासत पूरी तरह से बदल सकती है। पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों ने क्षेत्रीय क्षत्रपों की ताकत के जिस सबसे मजबूत किले को ढहाया है,उसके बाद अब कांग्रेस से टूटकर बनी पार्टियों के विलय और पुराने दिग्गजों की घर वापसी के प्लान पर शीर्ष स्तर पर बेहद रणनीतिक तरीके से काम शुरू हो चुका है। सबसे बड़ा धमाका पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी को लेकर हुआ है। माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान की ओर से ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में पूर्ण विलय करने का सीधा और बड़ा ऑफर दिया गया है। कांग्रेस के लिए भी इस समय ममता बनर्जी को साथ लाना राजनीतिक मजबूरी और जरूरत, दोनों है। पश्चिम बंगाल में नई सत्ता के उभार के बाद कांग्रेस को डर है कि यदि उसने जमीन मजबूत नहीं की, तो अल्पसंख्यक वोट बैंक पूरी तरह वाम दलों या तृणमूल के बिखरे हुए धड़ों में बंट जाएगा। कांग्रेस को बंगाल में खुद को स्थापित करने के लिए मजबूत और स्थापित चेहरे की जरूरत है। कांग्रेस हाल ही में केरल में वामपंथियों को मात देकर सत्ता में आई है। बंगाल में लेफ्ट को मजबूत होने देना कांग्रेस के लिए केरल की जमीन को खतरे में डालना होगा। इसीलिए, कांग्रेस के लिए बंगाल में वामपंथियों के मुकाबले टीएमसी का ढांचा ज्यादा मुफीद और व्यावहारिक बैठता है।
TMC Congress Alliance : ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में लगातार टूट जारी है। TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने भी साफ कर दिया है कि ममता दीदी को तय करना होगा कि वे मेरे साथ हैं या अभिषेक बनर्जी के साथ..उधर राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के बाद TMC के एक और राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने भी इस्तीफा दे दिया | पिछले चार दिनों में तीन राज्यसभा सांसद ममता को छोड़कर जा चुके हैं। इससे पहले 8 जून को सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था, पार्टी भी छोड़ दी थी। संसद के दोनों सदनों में बागी सांसदों ने एनडीए के समर्थन का दावा किया है। ऐसे में वर्तमान में दल-बदल और इस्तीफों के बाद TMC का गणित लगातार बदल रहा है.. बहरहाल संभावनाओं से इतर अभी सभी की नजरे TMC और कांग्रेस पर है कि क्या ये विलय होगा ? क्या ममता कांग्रेस का दमन थामेगी ? और यदि ममता कांग्रेस के साथ जाती है तो ये कांग्रेस सहित विपक्ष की कितनी बड़ी ताकत और एकजुटता का संदेश होगा ? ये देखने वाली बात होगी |
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