Pakistan Occupied Kashmir : PoK में हिंसक प्रदर्शन के बाद फिर चर्चा में आया पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर
Pakistan Occupied Kashmir : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में क्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 30 से अधिक लोगों की मौत और करीब 200 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। यह घटना 27 जुलाई 2026 को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले हुई, जिसने PoK की राजनीतिक स्थिति, प्रशासनिक व्यवस्था और वहां के लोगों की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

Pakistan Occupied Kashmir : प्रदर्शन क्यों भड़के?
विरोध प्रदर्शनों की मुख्य वजह आगामी चुनावों में 45 विधानसभा सीटों में से 12 सीटों को शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने का फैसला बताया जा रहा है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने इस निर्णय का विरोध करते हुए इसे स्थानीय जनता की राजनीतिक आवाज को कमजोर करने वाला कदम बताया। इसी मुद्दे को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिन पर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की।
Pakistan Occupied Kashmir : 1947 से शुरू होती है PoK की कहानी
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के इतिहास को समझने के लिए 1947 के विभाजन काल में जाना होगा। भारत की आजादी के समय रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने अथवा स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया गया था।जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन शासक महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों और बाद में पाकिस्तानी सेना के हस्तक्षेप से संघर्ष शुरू हुआ। 1949 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ और जम्मू-कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया, जिसे आज PoK कहा जाता है।
Pakistan Occupied Kashmir : PoK का प्रशासनिक ढांचा कैसा है?
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर दो हिस्सों में विभाजित है—आज़ाद जम्मू-कश्मीर (AJK) और गिलगित-बाल्टिस्तान। मुजफ्फराबाद AJK की राजधानी है।कागजों पर यहां विधानसभा, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय जैसी संस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन वास्तविक प्रशासनिक और राजनीतिक नियंत्रण पाकिस्तान की संघीय सरकार के हाथों में माना जाता है।
Pakistan Occupied Kashmir : कितना ‘आज़ाद’ है आज़ाद कश्मीर?
नाम भले ही “आज़ाद कश्मीर” हो, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यहां की राजनीतिक स्वतंत्रता सीमित है। पाकिस्तान की संसद में इस क्षेत्र का कोई प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व नहीं है। कई महत्वपूर्ण निर्णय इस्लामाबाद के नियंत्रण वाले संस्थानों के माध्यम से लिए जाते हैं।क्षेत्रीय संविधान में ऐसी राजनीतिक गतिविधियों पर भी प्रतिबंध है जो पाकिस्तान में विलय के विचार का विरोध करती हों। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को भी पाकिस्तान के प्रति समर्थन संबंधी शपथ लेनी होती है।
Pakistan Occupied Kashmir : पाकिस्तान को PoK से क्या लाभ मिलता है?
PoK प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र माना जाता है। यहां जलविद्युत उत्पादन की बड़ी संभावनाएं हैं। सिंधु नदी प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसके अलावा यहां वन संपदा, संगमरमर, ग्रेफाइट, रत्न और अन्य खनिज संसाधन भी पाए जाते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान की सिंचाई और बिजली उत्पादन व्यवस्था में PoK का महत्वपूर्ण योगदान है। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि संसाधनों का लाभ क्षेत्र के विकास की तुलना में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों को अधिक मिलता है।
Pakistan Occupied Kashmir : लोगों की स्थिति कैसी है?
विभिन्न अध्ययनों के अनुसार PoK की बड़ी आबादी कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। खाद्य असुरक्षा, कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी यहां बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।रिपोर्टों में बताया गया है कि कई पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकांश परिवार खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। बच्चों में कुपोषण की दर भी चिंताजनक है। शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर के आंकड़े भी क्षेत्र के विकास संबंधी सवालों को उजागर करते हैं।
Pakistan Occupied Kashmir : भारत का रुख क्या है?
भारत लगातार यह कहता रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है। फरवरी 1994 में भारतीय संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान से उसके कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करने की मांग की थी।भारत का मानना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारतीय क्षेत्र का हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है।
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