Swamitva Yojana MP : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से प्रदेश के 48.32 लाख निजी संपत्ति धारकों को वैधानिक स्वामित्व अधिकार मिलने का रास्ता साफ हो गया है। मोहन सरकार का यह फैसला ग्रामीण संपत्ति धारकों को कानूनी सुरक्षा देने के साथ-साथ उन्हें बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बनेगा जहां ग्रामीण आबादी को बड़े पैमाने पर संपत्ति अधिकारों का पंजीकृत संरक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
Swamitva Yojana MP : स्वामित्व अधिकार अभिलेख, नंबर-1 मध्यप्रदेश
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, दिशा-निर्देश जारी करने और समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। मंत्रि परिषद द्वारा निर्णय लिया गया है कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन निर्मित अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस का निष्पादन एवं पंजीयन किया जाएगा ताकि नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेष अभियान के तहत कार्यवाही पूर्ण की जाएगी।
Swamitva Yojana MP : स्टॉम्प ड्यूटी, पंजीयन शुल्क माफ करने का फैसला
अब तक कुल 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया है। इसमें 48.32 लाख निजी संम्पत्तियां शामिल है। अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टॉम्प ड्यूटी अथवा पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा, संपूर्ण व्यय राशि 3800 करोड़ रूपये का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाएगा।स्वामिव योजना में मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में निवासरत नागरिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्रदान करने के लिए अधिकार अभिलेखों का निर्माण ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए किया गया है। अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टॉम्प ड्यूटी अथवा पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा।

Swamitva Yojana MP : क्या है योजना की खास बात?
• स्वामित्व योजना के तहत तैयार किए गए अधिकार अभिलेखों का अब विधिवत पंजीयन कराया जाएगा।
• पंजीयन के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक अपनी संपत्ति को कानूनी रूप से प्रमाणित कर सकेंगे।
• संपत्ति के आधार पर बैंक ऋण लेने, मकान निर्माण, व्यवसाय और कृषि कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करना आसान होगा।
Swamitva Yojana MP : नागरिकों को नहीं देना होगा कोई शुल्क
• अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
• इस पूरी प्रक्रिया पर आने वाला लगभग 3,800 करोड़ रुपये का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
Swamitva Yojana MP : अब तक कितने अभिलेख बने ?
• प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं।
• इनमें से 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं, जिन्हें इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा।
Swamitva Yojana MP : स्वामित्व अधिकार अभिलेख योजना को मंजूरी
• मप्र पहला राज्य, जहां ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी के नागरिकों के भू-खण्ड संबंधी अधिकार सुरक्षित कर उनकी आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलेंगे।
• ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में निवासरत लोगों को उनका वैधानिक अधिकार प्रदान करने, अधिकार अभिलेखों का निर्माण ड्रोन तकनीक के उपयोग से किया।
• योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में किया जाएगा समिति का गठन।
• योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है।
• योजना का विस्तृत परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण आदि जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है।
• ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ करने का फैसला।
• स्वामित्व योजना में अधिकार अभिलेख प्राप्त करने वाले भू-खण्डधारियों आसानी से ऋण उपलब्ध हो सकेगा
• लोगों को आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त करने में आसानी के लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस का निष्पादन एवं पंजीयन कराया जाएगा।
• जनता को स्वामित्व संबंधी अधिकार देने के लिए विशेष अभियान चला कर के तहत कार्यवाही पूर्ण की जाएगी।
• अब तक 48.32 लाख निजी संम्पत्तिधारकों के स्वामित्व अधिकार संबंधी अभिलेख निर्मित किया जा चुके है, कुल 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया।
• जनता को स्वामित्व अधिकार देने पर लगने वाले शुल्क संबंधी संपूर्ण व्यय राशि 3800 करोड़ रूपये का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाएगा।
• योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन होगा।

