Madhya Pradesh UCC : ‘समानता और न्याय की दिशा में बड़ा कदम’,सरकार के फैसले पर सियासी संग्राम तेज
Madhya Pradesh UCC : उत्तराखंड, गुजरात और असम में समान नागरिक संहिता UCC लागू होने के बाद अब मध्य प्रदेश में भी इसे लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार UCC लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए जनता से सुझाव भी मांगे जा रहे हैं। सरकार ने सुझाव जुटाने के लिए एक समिति का गठन किया है, जो विभिन्न वर्गों और समुदायों से राय ले रही है। राज्य सरकार का कहना है कि UCC लागू होने से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू होगा। मुख्यमंत्री ने UCC पोर्टल लॉन्च कर आमजन से सुझाव देने की अपील भी की है।सरकार का दावा है कि सभी वर्गों की भागीदारी के बाद UCC का मसौदा तैयार किया जाएगा। लेकिन UCC लागू करने को लेकर मुख्यमंत्री के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस और आदिवासी नेतृत्व इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं।
Madhya Pradesh UCC : कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल UCC के मसौदे, उसके स्वरूप और विभिन्न समुदायों पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को पहले विस्तृत ड्राफ्ट सार्वजनिक करना चाहिए और सभी पक्षों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि UCC से आदिवासी समाज की पारंपरिक पहचान और संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इसे आदिवासी हितों के खिलाफ बताया है।जबकि UCC को लेकर भाजपा इसे सामाजिक समानता और महिला अधिकारों से जोड़कर पेश कर रही है। भाजपा का मानना है कि प्रदेश में भी UCC लागू कर नागरिकों को एक समान कानूनी ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का तर्क है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय एक समान व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सरल होगी। बहरहाल अब मध्य प्रदेश में UCC का मुद्दा केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। आगामी चुनावी समीकरणों और सामाजिक समूहों पर इसके प्रभाव को देखते हुए यह विषय प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
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