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Swadesh News > राज्य > मध्य प्रदेश > Sagar Mess Scam : पुलिस का अपने ही ट्रेनी आरक्षकों के निवाले पर डाका,करोड़ों का मैस घोटाला
मध्य प्रदेश

Sagar Mess Scam : पुलिस का अपने ही ट्रेनी आरक्षकों के निवाले पर डाका,करोड़ों का मैस घोटाला

Abhishek Singh
Last updated: May 18, 2026 5:09 pm
By Abhishek Singh
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9 Min Read
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Sagar Mess Scam : PTS सागर की टेंडर प्रक्रिया में बड़ी जालसाजी, शिकायत पर डीजीपी (ट्रेनिंग) ने लिया संज्ञान, EOW सुस्त

Sagar Mess Scam : मध्य प्रदेश पुलिस के गौरव और शुचिता पर एक बार फिर गंभीर दाग लगा है। मामला सागर स्थित पुलिस प्रशिक्षण शाला (PTS) मकरोनिया का है, जहाँ देश की सुरक्षा का कड़ा पाठ पढ़ने वाले करीब 300 नव-आरक्षकों के निवाले पर ही विभागीय सांठगांठ से डाका डाल दिया गया। सूचना के अधिकार (RTI) से सनसनीखेज खुलासे के बाद, सागर के शनीचरी वार्ड के पार्षद ताहिर खान मासाब ने इस महाघोटाले के खिलाफ सीधे मोर्चा खोलते हुए विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) भोपाल और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से शिकायत की है। शिकायत के बाद जहाँ डीजीपी (ट्रेनिंग) रवि कुमार गुप्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संज्ञान लिया है, वहीं स्थानीय EOW इस पर चुप्पी साधे बैठी है।

Contents
Sagar Mess Scam : PTS सागर की टेंडर प्रक्रिया में बड़ी जालसाजी, शिकायत पर डीजीपी (ट्रेनिंग) ने लिया संज्ञान, EOW सुस्तSagar Mess Scam : अस्पताल के बेड से तय हुआ ‘भ्रष्टाचार का मेन्यू’Sagar Mess Scam : विशिष्ट प्रकरण (कार्यवाहक निरीक्षक ज्ञानेंद्र प्रसाद शुक्ला): नियम विरुद्ध पदस्थापना का ज्वलंत उदाहरणSagar Mess Scam : ऑनलाइन के नियम को ठेंगा, बैक डेट में बनीं जाली रसीदेंSagar Mess Scam : अपात्र फर्मों को रेवड़ी की तरह बांटे अवैध फायदेSagar Mess Scam : सुरक्षा निधि का गबन और ‘सुरक्षा’ से ही खिलवाड़Sagar Mess Scam : टेंडर निरस्त करने और FIR दर्ज करने की उठी मांग

Sagar Mess Scam : अस्पताल के बेड से तय हुआ ‘भ्रष्टाचार का मेन्यू’

शिकायत में सीधे तौर पर मैस पर्यवेक्षक कार्यवाहक निरीक्षक ज्ञानेंद्र प्रसाद शुक्ला पर पद और शक्तियों के घोर दुरुपयोग के संगीन आरोप लगे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जब निविदा (टेंडर) जमा करने की समयावधि चल रही थी, तब मैस पर्यवेक्षक मकरोनिया के “रॉय हॉस्पिटल” में इलाज के लिए भर्ती थे। आरोप है कि उन्होंने अस्पताल के बेड से ही पूरी निविदा प्रक्रिया को अवैध रूप से संचालित किया। वहां बैठकर न केवल आर्थिक सौदेबाजी की गई, बल्कि चहेती फर्मों से ही फार्म जमा करवाए गए और कुछ अन्य जेन्युइन निविदा आवेदनों को गायब कर दिया गया। सीसीटीवी फुटेज और अस्पताल के रिकॉर्ड इस बात की गवाही दे सकते हैं। आरोप है कि अपने एक करीबी रिश्तेदार की फर्म को फायदा पहुँचाने और दोहरा आर्थिक लाभ कमाने के लिए 300 नव-आरक्षकों का शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

Sagar Mess Scam : विशिष्ट प्रकरण (कार्यवाहक निरीक्षक ज्ञानेंद्र प्रसाद शुक्ला): नियम विरुद्ध पदस्थापना का ज्वलंत उदाहरण

पुलिस ट्रेनिंग स्कूल सागर के ही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 23वीं वाहिनी वि.स. बल (SAF) भोपाल के मूल अधिकारी (कार्यवाहक) निरीक्षक ज्ञानेंद्र प्रसाद शुक्ला को वर्ष 2014 में 5 साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर यहां तैनात किया गया था।नियमानुसार प्रतिनियुक्ति की अधिकतम सीमा 5 वर्ष होने के बावजूद, उक्त अधिकारी को वर्ष 2014 से निरंतर 12 वर्षों तक PTS सागर में जकड़े रखा गया है। आश्चर्यजनक यह है कि गत वर्ष पदोन्नति प्राप्त होने के बाद भी उन्हें उनकी मूल इकाई (23वीं वाहिनी) वापस क्यों नहीं भेजा गया?

Sagar Mess Scam : ऑनलाइन के नियम को ठेंगा, बैक डेट में बनीं जाली रसीदें

वित्त विभाग के “भंडार क्रय नियमों” के अनुसार, करीब 1 करोड़ रुपये की लागत वाले इस भारी-भरकम निविदा कार्य के लिए “ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया” अनिवार्य थी। लेकिन मैस पर्यवेक्षक ने मैस समिति के साथ मिलकर उच्च अधिकारियों को गुमराह किया और घोटाला करने की नियत से जानबूझकर “ऑफलाइन” प्रक्रिया अपनाई। इतना ही नहीं, टेंडर फार्म की 2000 रुपये फीस में भी भारी गबन सामने आया है। RTI में सिर्फ एक फर्म शिवाय एसोसिएट (रसीद नंबर 001) की रसीद दिखाई गई, जिसमें गंभीर गड़बड़ी यह है कि निविदा फार्म जारी होने के एक दिन बाद (20 जून को) पैसे का जमा होना दिखाया गया। बाकी 4 निविदाकारों से ली गई नकद राशि को सरकारी खाते में जमा न कर सीधे हजम कर लिया गया।

Sagar Mess Scam : अपात्र फर्मों को रेवड़ी की तरह बांटे अवैध फायदे

भ्रष्टाचार का खेल यहीं खत्म नहीं हुआ। निविदा शर्तों के मुताबिक इच्छुक फर्मों के पास कैटरिंग का 3 वर्ष का अनुभव और 50 लाख रुपये का टर्नओवर होना अनिवार्य था। लेकिन एक चहेती फर्म को छोड़कर बाकी 4 फर्मों के पास ऐसा कोई अनुभव नहीं था, फिर भी उन्हें रेस में शामिल रखा गया।

नियम विरुद्ध दो अलग-अलग लिफाफों (तकनीकी व वित्तीय) के बजाय सिर्फ एक लिफाफा दिया, फिर भी इसे अयोग्य करने के बजाय L-03 पर शामिल कर लिया गया।तुलनात्मक सूची में इसका पता झाबुआ लिखा है जबकि दस्तावेजों में छिंदवाड़ा। इस फर्म के पास सिर्फ ‘मांसाहारी खाद्य लाइसेंस’ है, कैटरिंग का कोई अनुभव या टर्नओवर नहीं है। जबकि यह निविदा विशुद्ध शाकाहारी भोजन के लिए थी।इन फर्मों के आवेदन की तारीखों पर ‘ओवर राइटिंग’ की गई। सुनील स्टेशनरी के शपथ पत्र पर तो जमा करने की तिथि 27 मई दर्ज है, जो साफ करता है कि अंतिम तिथि के बाद इसे पिछले दरवाजे से शामिल किया गया।सबसे मजेदार और हैरान करने वाली बात यह है कि सभी निविदा प्रपत्रों में हस्तलिखित अक्षरों और अंकों की बनावट हुबहू समान है। प्रथम दृष्टया साफ है कि एक ही व्यक्ति ने बैठकर ये सारे फर्जी फार्म भरे हैं, जिसकी फॉरेंसिक जांच होना बेहद जरूरी है।

Sagar Mess Scam : सुरक्षा निधि का गबन और ‘सुरक्षा’ से ही खिलवाड़

नियमों के मुताबिक सफल निविदाकार को कार्य शुरू करने से पहले कुल लागत की 10 प्रतिशत राशि सुरक्षा निधि (Security Deposit) के रूप में जमा करनी थी, लेकिन कोई राशि जमा नहीं की गई। जब उच्च स्तर पर शिकायत का डर सताया, तो आनन-फानन में 2 लाख रुपये की एक संदिग्ध बैंक रसीद दिखाई गई, जिसे सीधे PTS के पक्ष में जमा न कर वित्तीय जोखिम बढ़ाया गया।इसके अलावा, सबसे गंभीर मामला देश की सुरक्षा से जुड़े ट्रेनी आरक्षकों की सुरक्षा का है। नियमों के तहत मैस में काम करने वाले सभी 10-15 कर्मचारियों का पुलिस चरित्र सत्यापन (Police Verification) और मेडिकल फिटनेस अनिवार्य था। लेकिन यहाँ कानून की धज्जियां उड़ा दी गईं। शिवाय एसोसिएट के पंकज मिश्रा का चरित्र प्रमाण पत्र टेंडर शुरू होने के साढे छह महीने बाद (5 जनवरी 2026 को) प्रस्तुत किया गया, जो खुद कूट रचित लग रहा है। एक अन्य कर्मचारी अतुल सिंह का चरित्र प्रमाण पत्र 2022 का है जो कब का एक्सपायर हो चुका है, और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट की जगह बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर की ओपीडी (OPD) पर्ची लगा दी गई है।

Sagar Mess Scam : टेंडर निरस्त करने और FIR दर्ज करने की उठी मांग

इस महाघोटाले के उजागर होने के बाद पार्षद ताहिर खान मासाब ने मांग की है कि: इस पूरी दूषित और अवैध निविदा प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। दोषी फर्म को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए। मैस पर्यवेक्षक ज्ञानेंद्र प्रसाद शुक्ला और निविदा समिति के सदस्यों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, कूटरचना (IPC धारा 420, 467, 468, 120-B या नई संहिता की सुसंगत धाराएं) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर जेल भेजा जाए। निष्पक्ष जांच के लिए वर्तमान मैस समिति को हटाकर संस्थान के कैशबुक, बैंक खातों, आवक-जावक रजिस्टर और अधिकारियों के मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच कराई जाए।अब देखना यह है कि जहाँ डीजीपी (ट्रेनिंग) इस मामले में कड़े कदम उठाने की तैयारी में हैं, वहीं सागर EOW अपनी सुस्ती तोड़कर इस बड़े आर्थिक अपराध पर कब तक कार्रवाई करती है।

read more : Congress Press Conference : पेट्रोल-डीजल संकट को लेकर कांग्रेस का हमला, उमेश पटेल बोले- केंद्र सरकार के पास कोई नीति नहीं

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