Global Crisis Strategy : अमेरिका,इजराइल-ईरान युद्ध, दुनिया पर संकट ,वैश्विक चुनौतियों से आखिर कैसे पार पाएगा भारत ?
Global Crisis Strategy : दुनिया इस समय कई बड़े संकटों से जूझ रही है। कहीं युद्ध का खतरा है, तो कहीं महंगाई और आर्थिक मंदी की आशंका। ऊर्जा संकट, खाद्यान्न संकट, जलवायु परिवर्तन और सप्लाई चेन में बाधाएं भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। दुनिया के कई देशों में आर्थिक मंदी, युद्ध जैसे हालात और सप्लाई चेन प्रभावित होने से विकासशील देशों पर दबाव बढ़ा है। भारत भी इन चुनौतियों से अछूता नहीं है, ऐसे समय में सवाल उठ रहा है कि भारत इन चुनौतियों से कैसे निपटेगा ? पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईंधन बचाने, सोना न खरीदने, विदेश दौरे कम करने, वर्कफॉर्म होम जैसी अपील देशवासियों से की, तो वहीं अब देश के साथ ही दुनिया को भी चेताया है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विदेश दौरे पर हैं,जहां नीदरलैंड की धरती से देश-दुनिया को संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ दुनिया को स्थिरता और समाधान देने की दिशा में काम कर रहा है।भारत लगातार शांति, कूटनीति और आर्थिक सहयोग की वकालत कर रहा है जिससे वैश्विक संकट का असर कम किया जा सके। दरअसल भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी रणनीति को केवल घरेलू विकास तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वैश्विक स्तर पर मजबूत साझेदारी, आत्मनिर्भरता और आर्थिक संतुलन पर जोर दिया है।

Global Crisis Strategy : अब वैश्विक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन भारत बहुआयामी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। मजबूत कूटनीति, आत्मनिर्भरता, तकनीकी विकास और आर्थिक संतुलन के जरिए भारत न केवल संकटों का सामना करने की तैयारी कर रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका भी मजबूत कर रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह कूटनीतिक पहल सिर्फ भारत के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्थिरता, व्यापार सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इन यात्राओं से भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है। अब वैश्विक चुनौती से निपटने की रणनीति के तौर पर जो अपील और दलील प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी दे रहे हैं, वो कितनी मजबूत है। सवाल यही है कि क्या वैश्विक संकट का जो सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था व अन्य चीजों पर पड़ेगा उसका प्रभाव कम किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री का यह बयान केवल चेतावनी नहीं, बल्कि दुनिया के देशों के लिए एक संदेश भी माना जा रहा है कि यदि वैश्विक शक्तियां टकराव छोड़कर सहयोग नहीं होगा, तो आने वाले समय में गरीबी और आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
Global Crisis Strategy : दुनिया इस समय कई बड़े वैश्विक संकटों से जूझ रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट, महंगाई और सप्लाई चेन पर दबाव जैसे मुद्दों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।इस सबसे भारत भी अछूता नहीं है, तमाम स्थितियों, परिस्थितियों और संकट की संभावनाओं के बीच एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से भी साथ मांगा है। तो वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 5 देशों की विदेश यात्रा को भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया में अस्थिरता बढ़ रही है और कई देशों के सामने आर्थिक चुनौतियां मुंह बांये खड़ी हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा केवल कूटनीतिक दौरा नहीं, बल्कि भारत के हितों को सुरक्षित करने की बड़ी रणनीति भी है। भारत लगातार वैश्विक मंचों पर शांति, संवाद और सहयोग की नीति को आगे बढ़ा रहा है।यूएई के बाद प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी नीदरलैंड पहुंचे, जहां उन्होंने वैश्विक आर्थिक संकट और बढ़ती जंग की आशंकाओं को लेकर दुनिया को बड़ी चेतावनी दी है। नीदरलैंड के हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय लगातार बढ़ते संकटों से जूझ रही है। यदि हालात जल्द नहीं बदले तो पिछले कई दशकों में गरीबी के खिलाफ हासिल की गई उपलब्धियां मिट सकती हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी, युद्ध और ऊर्जा संकट ने दुनिया को ‘आपदाओं के दशक’ की ओर धकेल दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि पहले कोरोना महामारी, फिर अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध और अब दुनिया ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि इन संकटों पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो दुनिया की बड़ी आबादी दोबारा गरीबी और आर्थिक अस्थिरता की चपेट में आ सकती है।
Global Crisis Strategy : प्रधानमंत्री की विदेश नीति का एक बड़ा उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत और भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करना भी है। यही वजह है कि अपनी विदेश यात्राओं में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का फोकस ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर है। सरकार का दावा है कि यह दौरा आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक हितों को मजबूत करेगा।अब सरकार भले ही पीएम मोदी की यात्रा को भारत के ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार विस्तार और कूटनीतिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल बताए। लेकिन विपक्ष प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के राजनीतिक और आर्थिक परिणामों पर सवाल उठाते हुए सरकार की रणनीति को विफल बता रहा है।
Global Crisis Strategy : रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर भारत पर भी पड़ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति दिलाने की कोशिश मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि भारत संवाद और कूटनीति के जरिए दुनिया में स्थिरता और सहयोग का संदेश दे रहा है। सरकार की कोशिश ये भी है कि वैश्विक तनाव का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर कम से कम पड़े। पेट्रोल-डीजल की कीमतों, खाद्य आपूर्ति और निर्यात-आयात से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार लगातार नजर बनाए हुए है। यही वजह है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। और केंद्र सरकार इसे भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। जाहिर है प्रधानमंत्री की ये यात्राएं आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था, निवेश और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं।
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