Hasya Vyang : भैया, ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध कब खत्म होगा कोई नहीं जानता, इस युद्ध से दुनिया भर में जन जीवन प्रभावित हो रहा है, महंगाई बढ़ रही है, हमारी जेब पर भारी पढ़ रही है। महंगाई दबे पांव साथ-साथ चल रही है और हमको इसका पता ही नहीं है। कमिर्शियल गैस के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं। हवा में उड़ना यानि विमान यात्रा महंगी हो चुकी है। हो भी क्यों ना इसके फ्यूल के दाम जो बढ़ गए हैं। अब बारी हमारी रोजमर्रा की दिनचर्या में खर्च होने वाले तेल यानि पेट्रोल-डीजल की है।
Hasya Vyang : सरकार ने संकेत दे दिए हैं। तेल का खर्चा कम करें। सही भी है सरकार भी कब तक इस संकट को झेलेगी, एक ना एक दिन दाम बढ़ाने ही पढ़ेंगे। तो भैया जान लो पेट्रोल-डीजल के दाम जल्दी ही बढ़ने वाले हैं, इसलिए साइकिल निकाल कर साफ सूफ कर लो, ग्रीस ऑयल पहियों में डाल लो, ट्रंपवा कभी भी ईरान पर ताबड़तोड़ हमले का आदेश देने वाला है। ऐसा हुआ तो हमको खाड़ी से तेल मिलने में मुश्किल आएगी। अब सरकार ने भी पल्ला झाड़ लिया है। झाड़े भी क्यों ना हमारा देश 80 फीसदी तेल आयात करता है। इस तेल पर पहले लिखा ये हास्य हथौड़ा पढ़िए..

Hasya Vyang : कहते हैं कि इंसान के सपनों की कोई कीमत नहीं होती… लेकिन आजकल लगता है कि उन सपनों का सीधा कनेक्शन पेट्रोल के दाम से है। पहले लोग कहते थे “दिल बड़ा होना चाहिए”, अब लोग कहते हैं “टंकी फुल होनी चाहिए।” क्योंकि दिल तो फिर भी समझौता कर लेता है, लेकिन खाली टंकी कभी समझौता नहीं करती।
Hasya Vyang : एक जमाना था जब बाइक पर बैठकर बिना सोचे-समझे निकल पड़ते थे, “चलो यार, लंबी ड्राइव पर चलते हैं।” अब वही दोस्त बोलता है, “भाई, ड्राइव तो ठीक है, पहले बता आधा-आधा पेट्रोल डलवाएंगे या तू ही देशभक्ति दिखाएगा?” प्यार में पहले लोग चांद-तारे तोड़ लाने की बातें करते थे, अब बस इतना कहते हैं। “जानू, तेरे लिए आज 200 का पेट्रोल डलवाया है।” और लड़की भी भावुक होकर कहती है, “इतना खर्चा? पागल हो क्या!”
Hasya Vyang : पेट्रोल के दाम इतने बढ़ गए हैं कि अब बाइक स्टार्ट करने से पहले आदमी अपने भविष्य के बारे में सोच लेता है। पहले लोग गाड़ी स्टार्ट करते थे, अब कैलकुलेटर स्टार्ट करते हैं। “ऑफिस जाने में कितना लगेगा, वापस आने में कितना… और अगर रास्ते में चाय पी ली तो EMI कैसे भरेंगे?”
Hasya Vyang : पेट्रोल पंप अब सिर्फ ईंधन भरने की जगह नहीं रहे, ये भावनाओं के परीक्षा केंद्र बन चुके हैं। जैसे ही आप पंप पर पहुंचते हैं, दिल की धड़कन तेज हो जाती है। मशीन पर बढ़ती रकम देखकर ऐसा लगता है जैसे डॉक्टर BP चेक कर रहा हो। और जब लड़का बोलता है “भैया 100 का डाल दो”, तो पंप वाला भी मुस्कुराकर कहता है, “इतना ही? आज बहुत अमीर लग रहे हो!”
Hasya Vyang : दिल के अरमान भी अब पेट्रोल की तरह महंगे हो गए हैं। पहले लोग सोचते थे, “गोवा ट्रिप करेंगे, लद्दाख जाएंगे, पूरी इंडिया घूमेंगे।” अब सोचते हैं, “घर से ऑफिस और ऑफिस से घर… बस यही जीवन यात्रा है।” ट्रैवल प्लान अब Google Maps में ही अच्छे लगते हैं, असल जिंदगी में तो पैदल चलना ही सबसे बड़ा एडवेंचर बन गया है।
Hasya Vyang : प्यार-मोहब्बत भी अब पेट्रोल के हिसाब से चलने लगी है। पहले गर्लफ्रेंड बोलती थी, “मुझसे मिलने आओ।” अब लड़का पूछता है, “लोकेशन भेजो… और ये भी बताओ कि कितने किलोमीटर दूर हो?” दूरी जितनी ज्यादा, प्यार उतना महंगा। और अगर लड़की ने कह दिया “बस 20 किलोमीटर दूर हूं”, तो लड़का तुरंत सोच में पड़ जाता है—“इतना प्यार भी ठीक नहीं।”
Hasya Vyang : मजेदार बात तो ये है कि पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं तो हर कोई अर्थशास्त्री बन जाता है। कोई कहता है “अंतरराष्ट्रीय बाजार की वजह से”, तो कोई कहता है “सरकार की नीतियां हैं।” लेकिन असली सच्चाई ये है कि आम आदमी बस इतना जानता है, “जेब हल्की हो रही है।”
अब तो हाल ये हो गया है कि लोग गाड़ी कम और पैदल ज्यादा चलने लगे हैं। फिटनेस अपने आप बढ़ रही है। डॉक्टर भी खुश, पर्यावरण भी खुश… बस इंसान थोड़ा दुखी है। लेकिन दिल को तसल्ली देता है, “चलो, कम से कम पेट्रोल बच रहा है।”
अंत में यही समझ आता है कि पेट्रोल के दाम और दिल के अरमान में एक गहरा रिश्ता है। दोनों ही जितना बढ़ते हैं, उतना ही इंसान को सोचने पर मजबूर करते हैं। फर्क बस इतना है कि दिल के अरमान कभी-कभी पूरे हो जाते हैं, लेकिन पेट्रोल के दाम… वो तो बस बढ़ते ही जाते हैं।
तो अगली बार जब आप बाइक स्टार्ट करें, तो सिर्फ एक्सीलरेटर ही नहीं, अपने अरमानों को भी थोड़ा कंट्रोल में रखें। क्योंकि आज के दौर में “फुल टंकी” और “फुल लाइफ” दोनों साथ रखना थोड़ा महंगा सौदा है!

