New Government Challenges : बंगाल-तमिलनाडु में नई सरकार, चुनौतियां अपार ?जनता की उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे नए चेहरे ?
New Government Challenges : आज बात देश के दो राज्यों में सबसे बड़ी सियासत की। दो राज्यों में सत्ता के दंगल की और नई सरकार की। जीहां पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी और तमिलनाडु में विजय के नेतृत्व में नई राजनीतिक तस्वीर साफ हो गई है। दोनों ही राज्यो में कल सुबह 11 बजे शपथ ग्रहण समारोह होगा। सत्ता की कमान नए मुख्यमंत्रियों के हाथ में होगी। लेकिन चुनावी जीत के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ शपथ लेने की नहीं, बल्कि सत्ता के उस अग्निपथ पर खुद को साबित करने की है, जहां जनता की उम्मीदें, विपक्ष का दबाव और प्रशासनिक कसौटी, तीनों साथ खड़े हैं। बंगाल में हिंसा, कानून व्यवस्था और राजनीतिक ध्रुवीकरण सबसे बड़ा मुद्दा बने हुए हैं। शुभेंदु अधिकारी के सामने चुनौती होगी कि वे राजनीतिक टकराव से ऊपर उठकर विकास और भरोसे की राजनीति स्थापित करें। दूसरी ओर तमिलनाडु में विजय की जीत ने पारंपरिक राजनीति को बड़ा झटका दिया है। फिल्मी लोकप्रियता को प्रशासनिक क्षमता में बदलना अब उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी। दोनों राज्यों में जनता ने बदलाव के नाम पर जनादेश दिया है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या ये नए चेहरे उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे ? रोजगार, निवेश, कानून व्यवस्था और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे मुद्दे नई सरकारों की दिशा तय करेंगे। राजनीति के इस नए दौर में शपथ सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता से किया गया वह वादा है जिसकी असली परीक्षा सत्ता के अग्निपथ पर ही होगी। इसी मुद्दे पर हम करेंगे चर्चा…लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं
New Government Challenges : राजनीतिक दृष्टि से देश के दो बड़े राज्य पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में नई सरकार के गठन की तैयारियां तेज हैं। शुभेंदु अधिकारी बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे और वे कल सुबह 11 बजे शपथ लेंगे। कोलकाता में हुई विधायक दल की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में शुभेंदु के नाम पर अंतिम मुहर लग गई। शुभेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान होने के बाद उन्होंने राज्यपाल आरएन रवि से मुलाकात की और पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनाने का दावा पेश किया।शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया है। अमित शाह ने कहा कि आज से हमारी जिम्मेदारी बहुत बढ़ गई है। ममता को धूल चटाने वाले शुभेंदु बंगाल के मुख्यमंत्री होंगे। शाह ने कहा कि मन आज भयमुक्त है, सिर गर्व से ऊंचा है। बंगाल अब राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से सीमाओं पर अभेद किला होगा। यहां से एक एक घुसपैठिये को चुन चुन कर बाहर निकालेंगे। इस दौरान शाह ने कांग्रेस को निशाने पर लिया और आत्मचिंतन की नसीहत दी।
New Government Challenges : अब दावे जो भी हों लेकिन नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक हिंसा, घुसपैठ, बेरोजगारी और निवेश है। चुनाव बाद हिंसा के आरोपों ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में सरकार को सबसे पहले प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करना होगा।बीजेपी सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने कहा कि पश्चिम बंगाल के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब कोई ‘हिंदू हृदय सम्राट’ राज्य का मुख्यमंत्री बनेगा। उन्होंने कहा कि TMC शासनकाल में बंगाल की स्थिति को पाकिस्तान जैसा बना दिया था।अब बंगाल की जनता को आजादी मिलेगी, अगले 24 घंटों में बंगाल में एक नया सूरज उगेगा।
New Government Challenges : तो वहीं तमिलनाडु में राज्यपाल और TVK के बीच चल रही उठापटक के बाद विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है, कांग्रेस के बाद अब CPI, CPM और VCK के 2-2 विधायकों के सपोर्ट से विजय की पार्टी TVK ने बहुमत का जादुई आंकड़ा छू लिया है। अब विजय के पास 119 सीटों का आंकड़ा होगा। दरअसल थलपति विजय राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से सरकार बनाने को लेकर दो बार मुलाकात कर चुके थे, लेकिन होनों ही बार राज्यपाल ने उन्हें लौटाते हुए 118 हस्ताक्षर के समर्थन की बात पर अड़े रहे। जिस पर कांग्रेस सवाल खड़े कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि राज्यपाल को संविधान संमत फैसला लेना चाहिए।
New Government Challenges : बहरहाल अब विजय का मुख्यमंत्री लगभग तय है। लेकिन तमिलनाडु में जिस तरह से TVK को समर्थन मिला है, और जिस जादुई आंकड़े के पार विजय हैं, उससे न केवल सरकार चलाना, बल्कि सरकार में बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी। साथ ही नई सरकार के सामने वादों को पूरा करना, रोजगार, आईटी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा, और जल संकट जैसी चुनौतियां प्रमुख होंगी।
New Government Challenges : अब बंगाल और तमिलनाडु में नई सरकार की शपथ होगी, जो किसी अग्निपथ से कम नहीं रहने वाली। भले ही चुनाव खत्म हो चुके हैं लेकिन दोनों ही राज्यों में नई सरकारों असली परीक्षा अब शुरू होने वाली है। जनता बेहतर कानून-व्यवस्था, रोजगार, निवेश और तेज विकास चाहती है। ऐसे में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में नई सरकारों के लिए आने वाले कुछ महीने बेहद अहम माने जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जनता से किए गए वादों को जमीन पर कैसे उतारा जाएगा। सुशासन, विकास और जनविश्वास को बनाए रखने की असली परीक्षा दोनों राज्यों की सरकार आखिर कैसे पूरा करेंगी।
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