REPORT BY : RAKHI VERMA
West Bengal Tamil Nadu Election : तमिलनाडु में किसके वादों पर जनता करेगी भरोसा ? महिला आरक्षण बिल को लेकर क्या बनेंगे समीकरण ?
West Bengal Tamil Nadu Election : एजेंडा में आज बात पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावी रण की, वोटिंग से पहले अपने अपने दांव की और प्रभाव की। जनता के बीच सियासी दलों के दावों की और चुनावी वादों की। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की वोटिंग से पहले सियासी माहौल चरम पर है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे दोनों राज्यों में राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं।पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विकास और कल्याणकारी योजनाओं के दम पर जनता के बीच जा रही हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी बदलाव का नारा देकर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। रैलियों, रोड शो और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। तो वहीं तमिलनाडु में भी चुनावी जंग दिलचस्प मोड़ पर है। डीएमके और एआईए-डीएमके के बीच कड़ी टक्कर है। जहां डीएमके अपनी सरकार के कामकाज को मुद्दा बना रही है, वहीं विपक्ष भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार को घेर रहा है। दोनों राज्यों में पार्टियां हर वर्ग को साधने में जुटी हैं। महिला, युवा और किसान वोट बैंक को लेकर खास फोकस है। अब घोषणाओं और वादों की बौछार के बीच जनता का मूड क्या होगा, यह मतदान के दिन ही साफ हो पाएगा। लेकिन इस बार चुनावी बहस का केंद्र सिर्फ विकास या जातीय समीकरण नहीं, बल्कि महिला आरक्षण बिल भी बन गया है। इस मुद्दे ने दोनों राज्यों की राजनीति का पूरा नैरेटिव बदल दिया है। ऐसे में देखना होगा कि क्या दोनों राज्यों में सत्ता के समीकरण बदलेंगे। महिला आरक्षण बिल को लेकर क्या समीगरण बनेंगे ? और जनता किसके वादों पर कितना भरोसा करेगी। दोनों राज्यों के चुनावी मुद्दे पर करेंगे चर्चा लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।
West Bengal Tamil Nadu Election : पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में पहले चरण के मतदान से पहले सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। आरोप प्रत्यारोप, जनसभाएं, हाई-प्रोफाइल रैलियां, रोड शो, सुरक्षा इंतजाम और उम्मीदवारों पर सवाल… मतदान से पहले हर मोर्चे पर चुनावी जंग तेज होती दिख रही है। सभी दल और गठबंधन चुनावी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। तमाम राजनेता विभिन्न मुद्दों को लेकर मैदान में हैं और मतदाताओं को साधने में जुटे हैं। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक साथ तो पश्चिम बंगाल में पहले चरण 152 सीटों के लिए 23 अप्रैल को और दूसरे चरण में 142 सीटों के लिए 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। दोनों राज्यों में बीजेपी, टीएमसी, डीएमके, एआई-एडीएमके और अन्य क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। बात पश्चिम बंगाल की करें तो यहां मोदी और दीदी सीधे आमने-सामने हैं। बीजेपी अपनी 6 गारंटियों के साथ भ्रष्टाचार और घुसपैठ के मुद्दे पर ममता सरकार पर हमलावर है, और दावा परिवर्तन का है। तो वहीं टीएमसी 200 सीटों पर जीत के दावे के साथ बंगाली अस्मिता, केंद्रीय एजेंसियों और सरकारी तंत्र के चुनाव में दुरुपयोग, महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर देश को गुमराह करने का आरोप बीजेपी पर लगा रही है। उधर तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK-नीत गठबंधन (SPA) और विपक्षी AIADMK व BJP के बीच कड़ा मुकाबला है। अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने भी अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर 2,500 रू. मासिक महिला सहायता और सोने के सिक्के देने का वादा किया है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। दोनों ही राज्यों में चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में स्टार प्रचारकों और हाईप्रोफाइल राजनेताओं की एंट्री से जहां चुनावी माहौल गरमाया हुआ है, लेकिन महिला आरक्षण बिल की बहस ने आधी आबादी को लेकर चुनाव प्रचार को नई दशा और दिशा दे दी है। पश्चिम बंगाल के साथ ही तामिलनाडु में महिला आरक्षण के मुद्दे को सत्ता और विपक्षी दल नारी सशक्तिकरण के बड़े एजेंडे के रूप में पेश कर रहे हैं।क्योंकि दोनों ही राज्यों में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं, सभी दलों के अपने घोषणापत्र में महिलाओं पर अलग फोकस किया है। केस ट्रांसफर, महिला सुरक्षा, रोजगार और प्रतिनिधित्व मुख्य मुद्दे बनकर उभरे हैं। बात पश्चिम बंगाल में TMC और BJP के बीच प्रमुख मुद्दों की करें तो…
West Bengal Tamil Nadu Election : पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के बीच मुख्य मुद्दों में राजनीतिक हिंसा, भ्रष्टाचार के आरोप, घुसपैठ, महिला सुरक्षा, और केंद्र-राज्य के बीच योजनाओं को लेकर टकराव शामिल हैं। टीएमसी कानून-व्यवस्था और विकास पर जोर देती है, जबकि भाजपा ‘कट मनी’, तुष्टिकरण और आदिवासी समुदायों की अनदेखी का आरोप लगाती है। इन मुद्दों पर टीएमसी और भाजपा के बीच राजनीतिक रस्साकशी जारी है, जिसमें ‘मां-माटी-मानुष’ और ‘विकास’ के बीच मुकाबला है। बात तमिलनाडु में सरकार और विपक्ष के बीच मुख्य मुद्दों और आरोप प्रत्यारोप की करें तो डीएमके की ‘भ्रष्टाचार’ वाली सरकार को उखाड़ फेंकने का दावा किया जा रहा है, तो वहीं डीएमके विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित है।
West Bengal Tamil Nadu Election : तमिलनाडु में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान और महिला आरक्षण मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। तो वहीं अमित शाह ने तमिलनाडु में एक चुनावी रोड शो के दौरान कांग्रेस और डीएमके पर महिला आरक्षण को लेकर विश्वासघात का आरोप लगाया कहा कि मोदी सरकार महिलाओं को न्याय दिलाएगी। उन्होंने विपक्ष पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘पहले करुणानिधि, फिर स्टालिन और अब उनका बेटा, ऐसी वंशवादी पार्टियां तमिलनाडु के लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दो ऐसे राज्य होंगे जिन पर देशभर की निगाहें टिकी रहेंगी। बंगाल में ममता बनर्जी की TMC अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है तो वहीं भाजपा वहां अपनी पिछली असफलता को सुधारने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। तो वहीं तमिलनाडु में DMK की सरकार का परफॉर्मेंस और AIADMK की कोशिशें मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। साथ ही जनता यहां बीजेपी की भविष्य भी तय करेगी,अब कल दोनों ही राज्यों में चुनाव प्रचार खत्म हो जाएगा, और प्रत्याशी डोर टू डोर दस्तक देंगे, लेकिन 4 मई को चुनाव परिणाम के साथ तय होगा कि जनता ने इसे फेल किया है और किसे पास।
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