Constitution Debate : आखिर सियासी हथियार क्यों बना संविधान ?संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर, किसके ?
Constitution Debate : देश की राजनीति में संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि सत्ता, अधिकार और विचारधारा का केंद्र बन चुका है। ऐसे में अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच इस पर खींचतान होना स्वाभाविक भी है और रणनीतिक भी। यही वजह है कि संविधान सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। जहां हर दल अपनी-अपनी व्याख्या के साथ मैदान में है। हर दल अपने-अपने तरीके से संविधान की दुहाई दे रहा है, लेकिन असल लड़ाई अब इसके अर्थ और इस्तेमाल को लेकर तेज़ होती दिख रही है। संसद से लेकर सड़क तक संविधान को लेकर सियासी खींचतान लगातार देखी जाती है। कोई संविधान को सिर माथे पर लगाता है तो कोई संविधान को हाथ में लेकर सवाल खड़े करता है।

Constitution Debate : संविधान निर्माता बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकी जाती है। इस विषय को लेकर हमेशा ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने होता है, आरोप-प्रत्यारोप रहता है। विपक्ष आरोप लगाता है कि केंद्र सरकार संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष इसे भ्रम फैलाने की राजनीति बताता है। अब कल 14 अप्रैल को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती है जिसको लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। तो वहीं सियासी बयानबाजी भी हो रही है। लेकिन सवाल यही खड़ा होता है सबके बाबा साहेब आखिर किसके। क्यों संविधान की दुहाई देकर सियासी लड़ाई लड़ी जाती है। बाबा साहब और संविधान पर आखिर सियासत क्यों ?
Constitution Debate : संविधान पर सियासी खींचतान दरअसल कानून बनाम राजनीति नहीं, बल्कि
Constitution Debate : सत्ताधारी दल का कहना है कि संविधान पूरी तरह सुरक्षित है और सरकार सिर्फ विकास और सुशासन के एजेंडे पर काम कर रही है। उनके मुताबिक, विपक्ष “संविधान खतरे में है” का नैरेटिव बनाकर जनता को गुमराह कर रहा है।
विपक्षी दल लगातार यह मुद्दा उठा रहे हैं कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता कमजोर हो रही है। उनका कहना है कि संविधान सिर्फ किताब नहीं, बल्कि देश की आत्मा है और इसकी रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

