By: Digital Desk
MP HC Decision : जबलपुर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में साफ कर दिया है कि महिला गेस्ट फैकल्टी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि मातृत्व अवकाश के दौरान आर्थिक लाभ देना महिला कर्मचारी का अधिकार है। यह फैसला जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने सुनाया, जिसमें मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 का हवाला दिया गया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 26 सप्ताह का सवैतनिक मातृत्व अवकाश देने के निर्देश दिए।

MP HC Decision : ये है मामला इसलिए लगाई याचिका
कटनी के शासकीय तिलक पीजी कॉलेज में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी डॉ. प्रीति साकेत ने इस मामले को कोर्ट में उठाया था। उन्हें पहले मातृत्व अवकाश वेतन सहित स्वीकृत किया गया था, लेकिन बाद में कॉलेज प्रशासन ने आदेश बदलते हुए अवकाश अवधि में मानदेय देने से इनकार कर दिया।
MP HC Decision : कोर्ट में क्या हुई बहस
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कानून के अनुसार हर महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन मिलना चाहिए और इसे रोकना अधिकारों का उल्लंघन है। वहीं, राज्य सरकार ने दलील दी कि गेस्ट फैकल्टी अस्थायी होती है, इसलिए उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं दी जा सकतीं।

MP HC Decision : कोर्ट का स्पष्ट निर्देश
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि मातृत्व लाभ से किसी को वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को पूरे 26 हफ्तों का वेतन सहित अवकाश दिया जाए। इस फैसले को महिला कर्मचारियों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

