BY
Yoganand Shrivastava
Mathura मथुरा साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एक संविदा कर्मचारी सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बंद पड़े जन-धन खातों को सक्रिय कर उनके एटीएम कार्ड साइबर ठगों को सप्लाई करता था। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में सिम कार्ड, एटीएम, चेकबुक और पासबुक बरामद की हैं। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान तक फैला हुआ था।
सिस्टम के भीतर से ही शुरू हुआ ठगी का खेल
Mathura गिरोह का मुख्य आरोपी नीरज, बैंक ऑफ महाराष्ट्र की कृष्णानगर शाखा में संविदा पर तैनात था। उसका काम कर्मचारियों को चाय-पानी देना और दफ्तर की सफाई करना था, लेकिन इसी दौरान वह बैंक के उन खातों की जानकारी जुटा लेता था जो लंबे समय से बंद (Dormant) पड़े थे। नीरज इन खातों में दर्ज मोबाइल नंबरों को चालाकी से बदलवा देता था और फिर उनके नए एटीएम कार्ड जारी करवा लेता था। इन एक्टिव कार्ड्स को वह साइबर ठगों को 25,000 रुपये प्रति कार्ड के हिसाब से बेच देता था।
Mathura जन-धन खातों को बनाया ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का जरिया
Mathura जांच में खुलासा हुआ कि ठग इन ‘डेड’ खातों का इस्तेमाल देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम मँगाने के लिए करते थे। चूंकि खाता किसी और के नाम पर होता था और मोबाइल नंबर बदल दिया जाता था, इसलिए मूल खाताधारक को भनक तक नहीं लगती थी कि उसके अकाउंट में करोड़ों का लेनदेन हो रहा है। गिरोह के सदस्य इन एटीएम कार्ड्स का उपयोग कर विभिन्न शहरों से कैश निकाल लेते थे। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी नीरज के साथ मुकुल, विक्रांत, पुष्पेंद्र और अनिकेत भी इस सिंडिकेट का हिस्सा थे।
राजस्थान तक फैले तार, पुलिस खंगाल रही पूरा नेटवर्क
Mathura मथुरा पुलिस की साइबर टीम ने हाईवे क्षेत्र की बैकुंठ विहार कॉलोनी से इन सभी को दबोचा। पूछताछ में पता चला है कि इस गिरोह के तार राजस्थान के भरतपुर और जयपुर से भी जुड़े हैं। आरोपियों ने जयपुर के ‘भीमू चौधरी’ नामक व्यक्ति का नाम उजागर किया है, जो इस नेटवर्क का एक बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है। थाना प्रभारी रफत मजीद के नेतृत्व में पुलिस अब इन खातों के जरिए हुई ठगी की कुल राशि का आकलन कर रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।





