by: vijay nandan
why-we-celebrate-holi : भारत का सबसे रंगीन और उल्लासपूर्ण त्योहार होली हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह पर्व केवल रंगों और मस्ती का उत्सव नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। होली बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम, भाईचारे और नए मौसम के स्वागत का प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 2026 में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।
why-we-celebrate-holi : होलिका दहन से लेकर राधा-कृष्ण की फूलों वाली होली तक, बुराई पर अच्छाई और प्रेम का संदेश देता है यह पर्व
होली को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे फगुआ, होलिकोत्सव, डोल उत्सव और शिमगा। यह त्योहार सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का भी संकेत देता है। आइए जानते हैं होली से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथाओं के बारे में।

why-we-celebrate-holi : प्रह्लाद और होलिका की कथा
होली का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक प्रसंग भक्त प्रह्लाद और होलिका से जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप नामक असुर राजा चाहता था कि सभी लोग उसकी पूजा करें, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। इससे क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने उसे कई बार मारने का प्रयास किया।

अंततः उसने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे आग से न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। इस घटना को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है। इसी की स्मृति में होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है।
why-we-celebrate-holi : राधा-कृष्ण और फूलों की होली
होली का संबंध भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम से भी माना जाता है। लोककथाओं के अनुसार, एक समय भगवान कृष्ण लंबे समय तक राधा से नहीं मिल पाए, जिससे ब्रज की प्रकृति और वातावरण उदास हो गया। जब कृष्ण राधा से मिलने पहुंचे, तो खुशी का माहौल बन गया और उन्होंने फूलों से होली खेलना शुरू किया।

धीरे-धीरे गोपियों ने भी एक-दूसरे पर फूल बरसाए और यह परंपरा आगे चलकर ‘फूलों की होली’ के रूप में प्रसिद्ध हो गई। आज भी वृंदावन और मथुरा में इस परंपरा को बड़े उत्साह से निभाया जाता है।
why-we-celebrate-holi : धोंडा राक्षसी की कथा
एक अन्य मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में एक राक्षसी बच्चों को परेशान करती थी। ऋषियों ने लोगों को सलाह दी कि उसकी प्रतीकात्मक मूर्ति बनाकर उसे अग्नि में जला दिया जाए। ऐसा करने से उस राक्षसी का प्रभाव समाप्त हो गया। इसके बाद लोगों ने खुशी मनाई और इसी परंपरा से होलिका दहन की प्रथा प्रचलित हुई।
why-we-celebrate-holi : भगवान शिव और कामदेव की कथा
दक्षिण भारत में होली का संबंध भगवान शिव और कामदेव की कथा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जब भगवान शिव गहन तपस्या में लीन थे, तब देवताओं के अनुरोध पर कामदेव ने उन्हें जगाने का प्रयास किया। इससे क्रोधित होकर शिव ने अपनी तीसरी आंख खोल दी, जिससे कामदेव भस्म हो गए।

बाद में पार्वती के तप और समर्पण से शिव का मन शांत हुआ और सृष्टि का संतुलन पुनः स्थापित हुआ। दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में इस घटना की स्मृति में होली को ‘काम-दहन’ के रूप में मनाया जाता है।
why-we-celebrate-holi : सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
होली केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इस दिन लोग पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और मिठाइयां बांटते हैं। यह त्योहार प्रेम, एकता और सकारात्मकता का संदेश देता है।
आज के समय में होली पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के साथ मनाने की भी अपील की जाती है। प्राकृतिक रंगों का उपयोग और जल संरक्षण जैसे कदम इस त्योहार को और भी सार्थक बना सकते हैं। कुल मिलाकर, होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा, प्रेम और जीवन में सकारात्मकता लाने का उत्सव है, जो हर साल लोगों को नई ऊर्जा और खुशियां देता है।

