रिपोर्ट : राजेश पंवार
Maheshwar : धर्म और संस्कृति की प्राचीन नगरी महेश्वर और मंडलेश्वर में रविवार को महाशिवरात्रि का पर्व किसी महाकुंभ जैसा नजर आया। ब्रह्म मुहूर्त से ही नर्मदा के तटों और शिवालयों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दोपहर तक करीब 1 लाख से अधिक भक्तों ने माँ नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।

अहिल्या घाट पर जीवित हुई होल्कर कालीन परंपरा
Maheshwar महेश्वर के ऐतिहासिक अहिल्या घाट पर भक्ति का अलौकिक दृश्य देखने को मिला। होल्कर राजवंश की परंपराओं का निर्वहन करते हुए महाराज शिवाजीराव होलकर ने शास्त्रोक्त विधि से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और माँ नर्मदा का पूजन किया। इस विशेष अनुष्ठान को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। नगर के प्रमुख मंदिरों जैसे श्री राजराजेश्वर, काशी विश्वनाथ और ज्वालेश्वर महादेव में भगवान का भांग, काजू और फूलों से मनमोहक श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।

भक्ति और सेवा का संगम: गूंजे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे
Maheshwar आध्यात्मिक गुरु पंडित प्रदीप शर्मा के अनुसार, महेश्वर साक्षात शिव स्वरूप है और यहाँ महाशिवरात्रि पर पूजन का अनंत फल मिलता है। दिनभर मंदिरों में रुद्राभिषेक और पंचाक्षर मंत्रों का जाप चलता रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्थानीय सामाजिक संस्थाओं ने जगह-जगह साबूदाना खिचड़ी, फलाहार और पेयजल के स्टॉल लगाए। महिलाओं ने शिवालयों में दीप प्रज्वलित कर परिवार की सुख-समृद्धि की मंगलकामना की।

प्रशासनिक सतर्कता: गोताखोरों और पुलिस बल ने संभाला मोर्चा
Maheshwar भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। महेश्वर और मंडलेश्वर में सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा एसडीएम सुश्री पूर्वा मण्डलोई और एसडीओपी श्वेता शुक्ला के नेतृत्व में पुलिस व प्रशासनिक टीम ने संभाला।
- सुरक्षा व्यवस्था: नगर परिषद सीएमओ प्रियंक पंड्या ने बताया कि नर्मदा घाटों पर सुरक्षा की दृष्टि से 10 विशेषज्ञ गोताखोरों की तैनाती की गई है।
- सतर्कता: लाउडस्पीकर के माध्यम से निरंतर मुनादी कराकर श्रद्धालुओं को गहरे पानी से बचने और सावधानीपूर्वक स्नान करने की हिदायत दी गई। शाम होते-होते नर्मदा के तट हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठे।





