report: sewakram chaubey, by-vijay nandan
Kasrawad News : कसरावद, कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, यह कहावत कसरावद क्षेत्र के बलकवाड़ा थाने में दर्ज 45 साल पुराने गेहूं चोरी के मामले में एक बार फिर सच साबित हुई है। साल 1980 में आरोपी की उम्र महज 20 साल, और चोरी की रकम सिर्फ 100 रुपये कीमत का गेहूं। उस वक्त शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि यह मामला पौने पांच दशक बाद फिर जिंदा हो उठेगा।
Kasrawad News : 45 साल तक बदलता रहा ठिकाना, नहीं बदली फाइल
बलकवाड़ा पुलिस ने गेहूं चोरी के इस पुराने मामले में फरार चल रहे आरोपी सलीम को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि सलीम ने उस समय अपने छह साथियों के साथ मिलकर चोरी की थी। वारदात के बाद वह परिवार सहित फरार हो गया और वर्षों तक पुलिस की पकड़ से दूर रहा।

पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी धार जिले के बाग कस्बे में पहचान छिपाकर रह रहा था और अपने बेटे के साथ किराना दुकान चला रहा था। विडंबना देखिए, जिस गेहूं की चोरी की थी, उसी तरह के सामान की दुकान वह सालों से चला रहा था।
Kasrawad News : संयोग या कानून की नजर?
पुलिस को आरोपी का सुराग तब मिला जब वह देवास में एक अन्य मृतक वारंटी की जानकारी जुटा रही थी। कड़ियां जुड़ती गईं और 65 साल की उम्र में सलीम आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने खुद कबूल किया कि उसे पूरा भरोसा था कि इतने साल बाद पुलिस और कानून इस केस को भूल चुके होंगे। लेकिन कानून ने 45 साल बाद भी दस्तक दे दी।

Kasrawad News : कोर्ट ने नहीं दी राहत
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। फिलहाल उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
Kasrawad News संपादकीय नजरिया
45 साल पुराने गेहूं चोरी के मामले में हुई गिरफ्तारी केवल एक आरोपी की पकड़ नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की स्मृति और निरंतरता का प्रतीक है। यह मामला हमें याद दिलाता है कि अपराध चाहे छोटा हो या बड़ा, समय के साथ उसकी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। 100 रुपये के गेहूं की चोरी आज भले ही मामूली लगे, लेकिन कानून की नजर में अपराध की गंभीरता उसकी कीमत से नहीं, बल्कि उसके सिद्धांत से तय होती है।
Kasrawad News हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि इतनी लंबी देरी क्यों हुई? क्या हमारी जांच और ट्रैकिंग व्यवस्था इतनी कमजोर थी कि एक आरोपी दशकों तक सामान्य जीवन जीता रहा? यह घटना पुलिस की हालिया सतर्कता की सराहना करती है, लेकिन साथ ही सिस्टम में सुधार की जरूरत भी उजागर करती है। यह केस समाज को संदेश देता है कि कानून देर से सही, पर पहुंचता जरूर है। साथ ही यह भी जरूरी है कि न्याय समयबद्ध हो, ताकि दंड का उद्देश्य केवल सजा नहीं, बल्कि सुधार और विश्वास बहाली भी बन सके।
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