Hasya Hathauda: भैया, चुगली चाटी दिमाग की सुकून देने की एक जबरदस्त कसरत है, भाई सहाब जिसको इसकी आदत है, उसकी दिमागी सेहत हर दिन तंदुरूस्त है, लेकिन जिस दिन ये खुराक नहीं मिले तो मुसीबत है, मुंह से जुलाप लग जाते हैं, बार-बार उल्टी आती है, दिल मचलाता है, मुंह से दुर्गंध तक आने लगती है, कभी कभी दिमाग की संचार व्यवस्था ठप पड़ जाती है, ऐसे हालात में चुगलखोर कोमा में भी जा सकता है। बिस्तर भी पकड़ सकता है।
Hasya Hathauda: लेकिन ये भी सुना है कि जिसको भी दिनभर दिमागी सुकून देने वाली इस कसरत की लत है, उसे दिन में सिर्फ एक बार लाई-लुतरी करने का मौका मिल जाए तो भी काम चल जाता है। थोड़ी मिचली जरूरत आती है। इतना जानने के बाद आप सोच रहे होंगे बदगोई कोई बुरा अभ्यास है, तो जान लीजिए भैया, इधर की उधर लगाना बेहद आनंद देने वाला अभ्यास है।

Hasya Hathauda: लेकिन कुटाली करना हर किसी के बस की बात नहीं है। ये डीएनए की बात है, बाप दादा मिली विरासत है, ऐसे गुण वाले चुगलखोरों का डीएनए बेहद खास है, क्योंकि इनके दिमाग में पीठ पीछे निंदा करने का ही विशेष कैमिकल बनता रहता है, ये रिलीज ना हो तो तड़प बढ़ती जाती है, और ये कैमिकल स्टोर हो जाए, तो चुगलखोर की जान पर बन आती है।
Hasya Hathauda: अगर समय पर अनुशीलन हो जाए तो क्या कहना, पैरों का दर्द गायब, कमजोरी दूर, झनझनाहट का सबसे असरदार देसी इलाज है ये, चुगली अभ्यास जितनी बार दोहराते हैं, उसका असर उतना की अधिक होता है, सिर से पांव तक सारी नसों को खोल देता है। ये कुछ वैसा ही आनंद है, जैसा सुबह नित्य कर्म कर बाद मिलता है।
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