JusticeForAnkita: वीरेंद्र भंडारी बोले VIP का नाम उजागर और निष्पक्ष CBI जांच तक जारी रहेगा आंदोलन
रिपोर्ट- मुकेश बछेती, पौड़ी
JusticeForAnkita: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। जैसे-जैसे मामले में कथित वीआईपी की संलिप्तता को लेकर चर्चाएं तेज हो रही हैं, जनभावनाएं और अधिक उग्र होती जा रही हैं। आम जनता से लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों तक, सभी की एक ही मांग है कि मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो तथा कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक किया जाए।

JusticeForAnkita: न्याय की मांग तेज: अंकिता भंडारी केस में 11 जनवरी को प्रदेश बंद
अंकिता को न्याय दिलाने के लिए उनके पिता वीरेंद्र भंडारी ने 11 जनवरी को उत्तराखंड प्रदेश बंद का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील की है कि वे इस प्रदेशव्यापी बंद में बढ़-चढ़कर सहयोग करें, ताकि सरकार तक जनता की आवाज़ मजबूती से पहुंच सके।

JusticeForAnkita: पूरे उत्तराखंड की बेटी की लड़ाई: अंकिता भंडारी केस में सड़कों पर उतरे लोग
वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि अब यह लड़ाई सिर्फ उनके परिवार तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह पूरे प्रदेश की बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई बन चुकी है। उन्होंने जनता के समर्थन के लिए आभार जताते हुए स्पष्ट किया कि जब तक मामले में शामिल कथित वीआईपी का नाम उजागर नहीं किया जाता और सीबीआई से निष्पक्ष जांच की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

JusticeForAnkita: अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान करते हुए सीबीआई जांच और वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने की मांग दोहराई
उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड की जनता एकजुट होकर अंकिता को न्याय दिलाने के इस संघर्ष में उनका साथ देती रहेगी।
JusticeForAnkita: क्या है पूरा मामला
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक बन चुका है, जिसने पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर को झकझोर कर रख दिया। यह मामला वर्ष 2022 में सामने आया, जब पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर क्षेत्र में कार्यरत रिसॉर्ट की युवती अंकिता भंडारी अचानक लापता हो गई थी। अंकिता एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती थी और रोजगार की तलाश में रिसॉर्ट में काम कर रही थी।
अंकिता के लापता होने के कुछ दिनों बाद उसका शव चीला नहर से बरामद हुआ, जिसके बाद यह मामला हत्या में तब्दील हो गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि अंकिता पर रिसॉर्ट प्रबंधन की ओर से कथित तौर पर दबाव बनाया जा रहा था, जिससे मामला और गंभीर हो गया। पुलिस ने इस मामले में रिसॉर्ट मालिक और उसके सहयोगियों को आरोपी बनाया और उन्हें गिरफ्तार किया।

जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ मामले में एक कथित “वीआईपी” की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे। इसी बिंदु ने इस हत्याकांड को राजनीतिक और सामाजिक रूप से बेहद संवेदनशील बना दिया। प्रदेशभर में लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए और अंकिता को न्याय दिलाने की मांग तेज हो गई। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक “न्याय दो” की आवाज़ गूंजने लगी।
अंकिता के परिजनों ने लगातार निष्पक्ष जांच और वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक पूरे सच से पर्दा नहीं उठता, तब तक न्याय अधूरा है। यह मामला अब केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सत्ता के दुरुपयोग और न्याय प्रणाली की पारदर्शिता से जुड़ा सवाल बन चुका है। अंकिता भंडारी हत्याकांड आज भी उत्तराखंड की जनता के लिए न्याय की लड़ाई का प्रतीक बना हुआ है।

