BY: Yoganand Shrivastva
भोपाल: भोपाल में आधी सैलरी मिलने से नाराज सफाईकर्मियों ने शनिवार सुबह प्रदर्शन किया और कचरा उठाना बंद कर दिया। इस दौरान निगम के कई दफ्तरों के बाहर सफाईकर्मियों ने गाड़ियां खड़ी कर रखीं। सबसे अधिक असर कोलार इलाके में देखा गया, लेकिन अन्य इलाकों में भी कर्मचारियों की नाराजगी का असर महसूस किया गया।
सफाईकर्मियों के प्रदर्शन का समर्थन कांग्रेस नेता रविंद्र साहू ने भी किया। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह भूख हड़ताल पर बैठने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनके अनुसार, भोपाल को स्वच्छ बनाने में सफाईकर्मियों का योगदान सबसे बड़ा है और इसलिए उन्हें पूरी सैलरी मिलनी चाहिए।
निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने भी कर्मचारियों की मांग को जायज ठहराया। भोपाल नगर निगम में लगभग 15 हजार से अधिक सफाईकर्मी कार्यरत हैं। बताया गया कि 16 अक्टूबर से निगम में आधार आधारित अटेंडेंस सिस्टम लागू किया गया है, जबकि इससे पहले कर्मचारी सार्थक एप के माध्यम से अटेंडेंस दर्ज करते थे। नए सिस्टम के कारण कर्मचारियों को 16 से 31 अक्टूबर तक की ही सैलरी मिली, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ गई। शुक्रवार रात को उनकी तनख्वाह अकाउंट में आई, लेकिन यह केवल आधे महीने की थी।
भारतीय सफाई मजदूर संघ के अध्यक्ष सोनू डागर ने बताया कि सफाईकर्मी अपनी पूरी सैलरी पर निर्भर हैं। यही सैलरी उनके बच्चों की फीस, कर्ज़ की किश्त और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए होती है। उन्होंने कहा कि निगम को या तो पूरे महीने की सैलरी देनी चाहिए थी, या अटेंडेंस का नया सिस्टम 1 नवंबर से लागू करना चाहिए था।
इसके अलावा, अटेंडेंस के समय में बदलाव की भी मांग की गई थी। जिलाध्यक्ष डागर ने कहा कि महिलाओं का समय सुबह 8 बजे और पुरुष कर्मचारियों का सुबह 7 बजे तय किया गया था ताकि वे सुबह के काम समय पर कर सकें और सफाई का कार्य भी पूरा कर सकें। हालांकि, इस समय बदलाव पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सफाईकर्मियों के प्रदर्शन की तस्वीरें कोलार कार्यालय और गेहूंखेड़ा स्थित निगम ऑफिस के बाहर देखी गईं, जहां कर्मचारी नारेबाजी करते नजर आए। कांग्रेस नेताओं और कर्मचारियों के बीच यह समर्थन प्रदर्शन का मुख्य आकर्षण बना।





