BY: Yoganand Shrivastva
लखनऊ: निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल की पहली खेप भारतीय सेना को सौंप दी गई है, जिसे देश की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ स्थित ब्रह्मोस उत्पादन केंद्र में इस खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ब्रह्मोस मिसाइल अब पूरी तरह मेड इन इंडिया बन चुकी है और थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए उपलब्ध कराई गई है।
ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत और महत्व को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह तीनों सेनाओं की रीढ़ बन चुकी है। वर्तमान में भारतीय थलसेना के पास चार ब्रह्मोस रेजिमेंट हैं, जो रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इलाकों में तैनात हैं। भारतीय नौसेना के प्रमुख विध्वंसक युद्धपोत ब्रह्मोस मिसाइल से लैस हैं और वायुसेना के सुखोई Su-30 MKI लड़ाकू विमान अब एयर-लॉन्च ब्रह्मोस के माध्यम से लंबी दूरी तक सटीक हमला कर सकते हैं।
हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस ने निर्णायक भूमिका निभाई। सुखोई-30 एमकेआई से वायु-लॉन्च ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्तान के आतंकी अड्डों को 300 किलोमीटर से अधिक दूरी से सटीक निशाना बनाया। इस अभियान ने मिसाइल की गति, सटीकता और घातक क्षमता को साबित किया।
ब्राह्मोस की वर्तमान रेंज 290 से 400 किलोमीटर है, लेकिन DRDO और ब्रह्मोस एयरोस्पेस मिलकर BrahMos-NG (Next Generation) पर काम कर रहे हैं। यह नई पीढ़ी की हल्की, तेज और स्टील्थ तकनीक से लैस मिसाइल होगी, जिसे भविष्य में लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों और मोबाइल प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकेगा। इसकी रेंज 500 किलोमीटर से अधिक होने की संभावना है।
लखनऊ में बनी यह ब्रह्मोस उत्पादन इकाई भारत की पहली फुल-स्केल असेंबली और इंटीग्रेशन यूनिट है। सालाना 80 से 100 मिसाइलें बन सकती हैं और भविष्य में उत्पादन बढ़ाकर 150 मिसाइल प्रति वर्ष करने की योजना है। यह केंद्र न केवल सेना की जरूरतें पूरी करेगा बल्कि निर्यात केंद्र के रूप में भी उभर सकता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल भारत की रक्षा क्षमता का प्रतीक है और यह आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करता है। लखनऊ से मिली यह पहली खेप दिखाती है कि भारत अब केवल हथियारों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बन चुका है। थल, जल और वायु तीनों सेनाओं के पास पूरी तरह स्वदेशी ब्रह्मोस प्रणाली होने से भारत की स्ट्राइक क्षमता और डिटरेंस पावर पहले से कई गुना मजबूत हो गई है।
इस उपलब्धि ने न केवल भारत की सामरिक शक्ति बढ़ाई है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की तकनीकी और रक्षा योग्यता को प्रमाणित किया है। अब भारत की मिसाइल प्रणाली आधुनिक, स्वदेशी और हर दिशा में सक्षम है, जिससे देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता में नई ऊँचाई हासिल हुई है।





