Women Reservation Bill India : नारी शक्ति वंदन अधिनियम, नए युग का आगमन ,27 साल का इंतजार खत्म, इतिहास रचने तैयार संसद
Women Reservation Bill India : नमस्कार स्वदेश agenda देख रहे है आप… महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) सितंबर 2023 में संसद से पारित होकर कानून बन गया है, जो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करता है। यह ऐतिहासिक फैसला 1996 से जारी लंबी राजनीतिक कशमकश और 2010 में राज्यसभा से पारित होने के बाद 27 साल के इंतजार के बाद आया। और इसी को लागू करने को लेकर एक विशेष सत्र की तैयारी की जा रही है | सरकार 16 से 18 अप्रैल तक संसद का स्पेशल सेशन लाई है जिसको लेकर पीएम मोदी ने दोनों सदनों के सांसदों की चिठी भी लिखी और पूरे समर्थन के साथ इसे आगे बढ़ने की अपील भी की | ऐसे में नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के जीवन का बड़ा अवसर बनने जा रहा है..इसके लागू होने से महिलाएं असल में कितनी सशक्त होंगी ..इसी पर विस्तार से करेंगे चर्चा उससे पहले देखिये ये रिपोर्ट |

Women Reservation Bill India : महिला आरक्षण बिल क्या देश मे महिलाओं के लिए एक बड़ा अवसर बनने जा रहा है… ये एक सवाल भी है.. क्योकि इसके लागू होने से महिलाएं असल में आर्थिक रूप से कितनी सशक्त होंगी और आने वाले समय में हर क्षेत्र में कितनी तरक्की को छुएंगी | ये सब एक चर्चा का विषय बन गया है | और इसी के चलते देश के प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण बिल पर कहा, ‘हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। विधानसभाओं से लेकर संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय आ गया है। इसलिए सरकार 16 से 18 अप्रैल तक संसद का स्पेशल सेशन लाई है। पीएम ने कहा, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के जीवन का बड़ा अवसर बनने जा रहा है। संसद तक पहुंचने का रास्ता आसान बनने जा रहा है। आज महिलाओं की भूमिका और भी अहम हो गई है। हमारी योजनाओं से औरतें आर्थिक रूप से ताकतवर बनीं। उन्होंने कहा कि मैं गृहस्थ नहीं हूं, लेकिन जानता सब हूं। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कई अहम बिन्दुओं को छुआ |
Women Reservation Bill India : महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का एक सत्र बुलाया जा रहा है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ ने महिलाओं के लिए आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन (सीमांकन) से जोड़ दिया था। जनगणना में हुई देरी के चलते, अब 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही आगे बढ़ने की योजना है। संशोधन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो सकती है। उधर सरकार ने दो बड़े संशोधनों की योजना बनाई है, जिसमें एक अलग परिसीमन विधेयक भी शामिल है। महिलाओं के लिए रिजर्वेशन तय करने के लिए इन दोनों विधेयकों को संवैधानिक संशोधन के तौर पर पारित किया जाना जरूरी है। मौजूदा स्थिति को बरकरार रखते हुए, OBC आरक्षण के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जबकि SC/ST आरक्षण पहले की तरह ही जारी रहेगा। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने सोमवार को महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि पीएम विपक्षी दलों से उन बिलों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं, जिन्हें सरकार संसद के विशेष सत्र में जबरदस्ती पास कराना चाहती है। यह सब तब हो रहा है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। इस जल्दबाजी का सिर्फ एक ही मकसद राजनीतिक फायदा उठाना है। सरकार ने 2023 में ही ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को संसद में पास कर लिया था, लेकिन इसे अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू करने की शर्त रखी गई। इधर संसद के विशेष सत्र के लिए कांग्रेस, भाजपा और जेडीयू ने व्हिप जारी कर 16 से 18 अप्रैल तक अपने सभी सांसदों को संसद में मौजूद रहने को कहा है। महिला आरक्षण पर सोनिया ने लिखा- राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि इसे 2024 के चुनाव से ही लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना। अब अनुच्छेद 334-A में बदलाव कर महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने की तैयारी है। ऐसे में प्रधानमंत्री को यू-टर्न लेने में 30 महीने क्यों लगे?
Women Reservation Bill India : बहरहाल परिसीमन कानून में संशोधन के लिए सरकार अलग से बिल लाएगी राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का 128वां संवैधानिक संशोधन है, जो 27 वर्षों के लंबे राजनीतिक गतिरोध के बाद सितंबर 2023 में पारित हुआ। 1996 में पहली बार पेश किए गए इस बिल का इतिहास कोटा के भीतर कोटा (OBC आरक्षण) की मांग और पुरुष प्रधान राजनीति के कारण विवादों में रहा, जो अब परिसीमन के बाद लागू होगा। ऐसे में इसका बाकि दलों का इसको लेकर क्या मत होगा और ये जमीनी इस्तर पर कितना सकारात्मक परिणाम देगा ये देखने वाली बात होगी |

